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चंडीगढ़ बना हादसों का शहर, 10 दिन में 10 की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 17 Oct 2016 09:23 AM IST
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चंडीगढ़ में सड़क हादसे
- फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ में पिछले दस दिन में सड़क हादसों में 10 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि शहर में इस साल अब तक 106 लोग सड़क दुर्घटनाओं शिकार हो चुके है। पिछले साल पूरे अक्तूबर महीने में छह लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई थी। जबकि इस महीने हादसों में मारे गए 10 में से 8 लोग दुपहिया वाहन पर थे।
रात के वक्त स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलतीं। इससे साइकिल या पैदल चलने वाले हादसे के शिकार हुए हैं। बिजली विभाग के अनुसार शहर में इस समय शहर में 17 हजार स्ट्रीट लाइटों में से लगभग पांच हजार बंद पड़ी हैं। अराइव सेफ एनजीओ के अध्यक्ष हरमन सिद्धु का कहना है कि अगर इन डिवाइडर पर पौधे या छोटी झाड़ियां लगी हों तो सामने से आ रहे वाहनों की लाइटें आंखों में नहीं पड़ेंगी। इंजीनियरिंग विभाग को चाहिए कि यहां रैलिंग की जगह कुछ ऐसा इंतजाम करे कि हाई बीम पर चल रहे वाहनों की लाइटें सामने वालों की आंखों में न पड़ें।
इसी तरह लोगों का कहना है कि सेक्टर 17-18 , 21-18, 20-19, 30-27, 29-28 की डिवाइडिंग रोड पर रात के वक्त वाहन चलाना सबसे मुश्किल होता है। क्योंकि इन सड़कों पर सामने से आ रहे वाहन की हाई बीम सीधा आंखों में पड़ती हैं। जिसकी वजह से एक समय के लिए कुछ नजर नहीं आता है। इन सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें भी ज्यादातर खराब है।
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रात के वक्त स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलतीं। इससे साइकिल या पैदल चलने वाले हादसे के शिकार हुए हैं। बिजली विभाग के अनुसार शहर में इस समय शहर में 17 हजार स्ट्रीट लाइटों में से लगभग पांच हजार बंद पड़ी हैं। अराइव सेफ एनजीओ के अध्यक्ष हरमन सिद्धु का कहना है कि अगर इन डिवाइडर पर पौधे या छोटी झाड़ियां लगी हों तो सामने से आ रहे वाहनों की लाइटें आंखों में नहीं पड़ेंगी। इंजीनियरिंग विभाग को चाहिए कि यहां रैलिंग की जगह कुछ ऐसा इंतजाम करे कि हाई बीम पर चल रहे वाहनों की लाइटें सामने वालों की आंखों में न पड़ें।
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इसी तरह लोगों का कहना है कि सेक्टर 17-18 , 21-18, 20-19, 30-27, 29-28 की डिवाइडिंग रोड पर रात के वक्त वाहन चलाना सबसे मुश्किल होता है। क्योंकि इन सड़कों पर सामने से आ रहे वाहन की हाई बीम सीधा आंखों में पड़ती हैं। जिसकी वजह से एक समय के लिए कुछ नजर नहीं आता है। इन सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें भी ज्यादातर खराब है।
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मरने वालों में 8 दुपहिया चालक, अक्तूबर से दिसंबर के बीच अधिक हादसे
चंडीगढ़ में सड़क हादसे
- फोटो : File Photo
पिछले कई सालों में देखा गया है कि साल के अंतिम तीन महीनों में शहर में दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है। पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर के महीने में 43 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें 80 फीसदी दुपहिया वाहन चालक थे।
जब भी हादसे में किसी की मौत होती है तो हादसे का विश्लेषण किया जाता है। अगर किसी तरह की कोई इंजीनियरिंग से जुड़ी समस्या पाई जाती है तो इंजीनियरिंग विभाग को लिखा जाता है। जिन सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें खराब होती हैं तो उसके बारे में प्रशासन को बताया जाता है और ठीक करवाया जाता है। - यशपाल सिंह, डीएसपी, ट्रैफिक
जब भी हादसे में किसी की मौत होती है तो हादसे का विश्लेषण किया जाता है। अगर किसी तरह की कोई इंजीनियरिंग से जुड़ी समस्या पाई जाती है तो इंजीनियरिंग विभाग को लिखा जाता है। जिन सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें खराब होती हैं तो उसके बारे में प्रशासन को बताया जाता है और ठीक करवाया जाता है। - यशपाल सिंह, डीएसपी, ट्रैफिक