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कला किसी की मोहताज नहीं: ऊपर वाले ने नहीं दिए हाथ... पैर से ही जिंदगी में रंग भर रहीं चंडीगढ़ की रहनुमा

Mon, 27 Nov 2023 03:44 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 27 Nov 2023 03:44 PM IST
सार

रहनुमा ने बताया कि पैदा होने के समय से ही उनके दोनों हाथ नहीं है लेकिन पेंटिंग के शौक ने उन्हें यहां तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कार्निवल के अलावा सेक्टर-16 के अंडरपास समेत कई स्टेज पर अपना टैलेंट दिखाया और हर जगह उनके काम को सराहा गया है।

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Chandigarh Art College student Rahnuma paints with her feet
पैरों से पेंटिंग बनातीं रहनुमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ आर्ट कॉलेज की फाइनल ईयर की छात्रा 22 साल की रहनुमा की पेंटिंग में कुछ अलग बात है। दरअसल वे पैरों से पेंट करती हैं। बचपन से ही उनके दोनों हाथ नहीं है। पैर भी सही तरीके से काम नहीं करते हैं लेकिन पेंटिंग का शौंक ऐसा है कि कोई भी बाधा रोक नहीं पाई।

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चंडीगढ़ में रविवार को संपन्न हुए कार्निवल में उन्होंने कई पेंटिंग बनाई, जिन्हें उन्होंने शोकेस भी किया। कार्निवल में लोग रहनुमा को देखकर ठहर जा रहे थे और फिर उनसे पूछने पर मजबूर हो जा रहे थे कि क्या शोकेस में लगी पेंटिंग उन्होंने बनाई हैं। 
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रहनुमा ने बताया कि पैदा होने के समय से ही उनके दोनों हाथ नहीं है लेकिन पेंटिंग के शौक ने उन्हें यहां तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कार्निवल के अलावा सेक्टर-16 के अंडरपास समेत कई स्टेज पर अपना टैलेंट दिखाया और हर जगह उनके काम को सराहा गया है। रहनुमा ने बताया कि वो नेचर और एनिमल की तस्वीरें बनाती हैं।

मोहिंदर तुली की कला के सभी दीवाने
कार्निवल में 80 वर्षीय मशहूर आर्टिस्ट मोहिंदर तुली भी पहुंचे। उनकी कार्बन ड्राइंग और कोलाज वर्क ने कार्निवल में लोगों का मन मोह लिया। तुली ने बताया कि उनका आर्ट सबसे अलग है। वर्ष 1967 में आर्ट कॉलेज से पास हुए थे। उसके बाद से ही उन्होंने अपनी जिंदगी कला के नाम कर दी। बताया कि कोलाज बनाने की कला कहीं से सीखी नहीं, बल्कि अपनी कल्पना से नए प्रयोग कर इसको ग्रहण किया। 

कोलाज वर्क के माध्यम से वह व्यर्थ के कागजों को आकार देते हैं और उसका गहरा अर्थ निकालते हैं। वहीं, कार्बन ड्राइंग वह दिए के काजल को मिट्टी के बर्तन में पका कर उससे पक्का इंक बनाते हैं और फिर उससे पेंटिंग बनाते हैं, दो वर्षों तक नहीं मिटते। बताया कि इस उम्र में भी वह ये सारा काम खुद करते हैं। तुली के बनाए पेंटिंग्स को गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी, पंजाब यूनिवर्सिटी म्यूजियम, होम साइंस कॉलेज चंडीगढ़ और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना के अलावा यूके, यूएसए और जर्मन जैसे देशों के साथ-साथ कई देशों ने भी खरीदा है।

म्यूजिक की धुनों को कैनवास पर उतारते हैं सुरखाब
कार्निवल में आर्ट कॉलेज के छात्र गुरप्रीत सुरखाब की पेंटिंग्स को भी लोगों ने खूब सराहा। उन्होंने बताया कि गाने भी गाते हैं। जो भी धुन उनके दिमाग में चलती है, उसे वह कैनवास पर उतारने की कोशिश करते हैं। इसी में जो पेंटिंग बनती है वह लोगों को काफी पसंद आती है। बता दें कि कार्निवल में इस वर्ष सीनियर आर्टिस्ट दलजीत कौर भी पहुंची। उनके अलावा युवा में अभिषेक राठी, सुनील अंगराल, सूरज, रिया, मंजू रानी और केशव भी रहे।

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