Chandigarh News: नियमों के पाबंद थे पुरोहित, हफ्ते में दो दिन पहुंचते थे सचिवालय, बैठकों का समय भी था बदला
पंजाब के पूर्व राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित की पहचान लीक से हटकर काम करने की है। बतौर चंडीगढ़ प्रशासक उन्होंने अपनी बैठकों का समय बदला। इसकी मुख्य वजह यह थी कि दिन में बैठक होने की वजह से आप लोगों को परेशानी होती थी। वह हर हफ्ते दो दिन सचिवालय पहुंच कर खुद फाइलों को निपटाते थे।
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पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित चंडीगढ़ में खास रुचि रखते थे। वह नियमों के काफी पाबंद थे। हर मंगलवार और गुरुवार को सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय पहुंचते थे और फाइलों को निपटाते थे। पुरोहित ने चंडीगढ़ में सरकारी अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक के समय में बड़ा बदलाव किया था। अमूमन जो बैठकें दोपहर 12 बजे होती थीं, पूर्व प्रशासक ने उसका समय बदलकर शाम को 4:30 बजे कर दिया।
बनवारीलाल पुरोहित के इस्तीफे की खबर से सभी स्तब्ध हैं। कोई भी यह समझ नहीं पा रहा है कि बनवारीलाल पुरोहित ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? यूटी सचिवालय में पूर्व प्रशासक को लोग कई कार्यों की वजह से याद करेंगे। पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर आमतौर पर ज्यादातर बैठकें पंजाब राजभवन में करते थे जबकि बनवारीलाल पुरोहित काफी ज्यादा सक्रिय थे। वे हर मंगलवार और गुरुवार को वह सचिवालय पहुंचते थे। पहले वीपी सिंह बदनौर सचिवालय में सभी बैठकें दोपहर 12 बजे करते थे। दोपहर 12 बजे मीटिंग होने की वजह से अधिकारी पूरे दिन इस बैठक की तैयारी में व्यस्त हो जाते थे और दफ्तर के अन्य काम काफी ज्यादा प्रभावित होते थे।
बनवारीलाल पुरोहित ने बैठक का समय बदला और शाम 4:30 बजे कर दिया ताकि लोगों को परेशानी न हो। अधिकारी पूरे दिन अपने दफ्तर का काम निपटाएं और उसके बाद शाम को बैठक में पहुंचे। बैठकें कभी शाम सात बजे तक तो कभी 7:30 बजे तक चलती थीं। बनवारीलाल पुरोहित अगर मंगलवार या गुरुवार को सचिवालय न आ सके तो शुक्रवार को सचिवालय पहुंच जाते थे। इसकी वजह से फाइलों के निपटारे में तेजी आई।
14 जनवरी को प्रशासक ने बताया था- कभी खाली नहीं बैठूंगा
जिला सैनिक बोर्ड की तरफ से 14 जनवरी को सेक्टर-38 स्थित रानी लक्ष्मीबाई भवन में पूर्व सैनिकों के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में बनवारीलाल पुरोहित मुख्य अतिथि थे। उन्होंने पूर्व सैनिकों को काम करने के लिए काफी प्रोत्साहित किया और अपनी दिनचर्या के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वह आखिरी सांस तक काम करेंगे। उन्होंने यह भी बताया था कि किसी पद पर नहीं रहने के बाद क्या करेंगे। कहा था कि उनके पास दो-तीन लाइब्रेरी हैं, कुछ संस्थान है, वह वहां पर काम करेंगे लेकिन कभी भी खाली नहीं बैठेंगे।
नए सलाहकार के ज्वाइन करने से पहले ही पुरोहित की वापसी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए 23 दिसंबर को चंडीगढ़ पहुंचे थे। इस दौरान बनवारीलाल पुरोहित ने मंच से आग्रह किया था कि चंडीगढ़ को एक अच्छे सलाहकार की जरूरत है। 31 अक्तूबर को आईएएस धर्मपाल के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली था। पांच दिन पहले ही 1992 बैच के हैं आईएएस अधिकारी राजीव वर्मा को केंद्र सरकार ने सलाहकार नियुक्त किया था। अभी उन्होंने ज्वाइन भी नहीं किया है कि इससे पहले ही बनवारीलाल पुरोहित ने इस्तीफा दे दिया। राजीव वर्मा सोमवार को चंडीगढ़ में ज्वाइन कर सकते हैं।