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चिंताजनक : चंडीगढ़ में बिगड़ रहे हालात, 70 प्रतिशत सैंपल में मिला यूके स्ट्रेन, प्रशासन की बढ़ी चिंता

Fri, 16 Apr 2021 02:13 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 16 Apr 2021 02:13 AM IST
सार

  • पीजीआई ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र भेजे थे कई सैंपल
  • बीस प्रतिशत नमूनों में मिला कोरोना का 681 एच म्यूटेशन
  • कोरोना का नया रूप बेहद खतरनाक है

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New UK Strain was found in 70 Percent Corona samples send by Chandigarh PGI
new Corona strain - फोटो : iStock

विस्तार

चंडीगढ़ भी कोरोना के नए स्ट्रेन की चपेट में आ गया है। पीजीआई से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) नई दिल्ली भेजे गए कोरोना जांच के 70 प्रतिशत नमूनों में यूके स्ट्रेन पाया गया है। 20 प्रतिशत नमूनों में कोरोना का 681 एच म्यूटेशन पाया गया है। चिंता की बात यह है कि पीजीआई से भेजे गए कुल 60 नमूनों में से ज्यादातर चंडीगढ़ के मरीजों के हैं। ऐसे में पीजीआई प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग और यूटी प्रशासन की चिंता काफी बढ़ गई है।

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पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने बताया कि मार्च में ही पीजीआई के वायरोलॉजी विभाग से कोरोना के 60 मरीजों के नमूने एनसीडीसी भेजे गए थे, जिसकी रिपोर्ट गुरुवार शाम को मिली। प्रो. जगतराम ने बताया कि पंजाब के साथ अब चंडीगढ़ में भी यूके स्ट्रेन के मिलने से यहां भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्थिति इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि कोरोना का यह नया रूप बेहद खतरनाक और तीव्र गति से संक्रमण फैलाने वाला माना जा रहा है।
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प्रो. जगतराम ने बताया कि भेजे गए नमूनों में केवल बुजुर्गों के ही नहीं बल्कि हर वर्ग के मरीजों के नमूने शामिल थे। इससे एक बात साफ हो गई है कि अब कोरोना वायरस बच्चे और युवाओं के साथ हर वर्ग को अपनी चपेट में ले रहा है। इसलिए बुजुर्ग व गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के साथ ही हर वर्ग के लोगों को सचेत हो जाने की जरूरत है।

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लापरवाही जान जोखिम में डाल देगी

यूके स्ट्रेन के मामले सामने आने के बाद एहतियात बरतने को लेकर गंभीर होने की जरूरत है। प्रो. जगतराम का कहना है कि मास्क पहनना और सुरक्षित शारीरिक दूरी के नियम का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है। भीड़भाड़ वाली जगह व गैरजरूरी यात्राओं से जितना हो सके, बचें। साथ ही जल्द से जल्द टीकाकरण करवाएं, क्योंकि टीका इस संक्रमण की गंभीरता को काफी हद तक कम करने में मददगार है।

इलाज के तरीके में नहीं होगा बदलाव
यूके स्ट्रेन वाले मरीजों का इलाज भी मूल वायरस से संक्रमित मरीजों की तरह ही किया जाएगा। प्रो. जगतराम का कहना है कि दोनों ही स्थिति में इलाज की तकनीक एक की रहेगी। इसमें परिवर्तन संबंधी कोई भी निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाएगा लेकिन अभी ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं हुआ है।

क्या है म्यूटेशन

प्रो. जगतराम ने बताया कि खुद को जिंदा रखने के लिए किसी भी जीव के जीन में जो परिवर्तन होता है, उसे म्यूटेशन कहते हैं। इसकी मदद से वायरस एक समय में दो बार खुद को म्यूटेट कर लेता है। साधारण भाषा में कहें तो वायरस जिंदा रहने के लिए बाहरी आक्रमण को झेल पाए, इसके लिए वह खुद को बदल लेता है। जब ये क्षमता दोगुनी हो जाती है तो उसे डबल म्यूटेशन कहते हैं। इसके बल पर जीव दोबारा खुद को बदल लेता है। यही कारण है यह वायरस इस बार तेजी से फैल रहा है।
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