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अब बंदरों को खाना खिलाया तो माना जाएगा अपराध, जुर्माना भी लगेगा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Dec 2017 09:36 AM IST
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अब बंदरों को खाना खिलाना होगा अपराध
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अगर आप बंदरों को भोजन देते हैं तो अब से वह अपराध माना जाएगा और इसके लिए जुर्माना भी लगाया जाएगा। जी हां, दरअसल बंदरों के आतंक के लिए स्थानीय नागरिकों को जिम्मेदार ठहराने के बाद अब चंडीगढ़ प्रशासन ने शिमला की तर्ज पर बंदरों को भोजन देने को अपराध की श्रेणी में लाने का निर्णय लिया है।
ऐसे में अब शहर में बंदरों को भोजन देने को अपराध माना जाएगा और इसके लिए जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह जानकारी यूटी प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट को एक मामले की सुनवाई के दौरान दी गई।
अपने हलफनामे में प्रशासन ने कहा कि लोगों को बार-बार जागरूक किया जाता है कि बंदरों को कुछ खाने को न दिया जाए परंतु मंदिरों, ढाबों व रेस्तरां आदि के बाहर उन्हें खाने को दिया जाता है, जिसके चलते उनकी आबादी बढ़ रही है। साथ ही बंदरों को रोकने के मामले में अपनी मजबूरियां बताते हुए मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए उनके पास पर्याप्त साधन मौजूद हैं लेकिन बंदरों को सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में छोड़ने के अतिरिक्त उनके पास कोई विकल्प मौजूद नहीं है।
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ऐसे में अब शहर में बंदरों को भोजन देने को अपराध माना जाएगा और इसके लिए जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह जानकारी यूटी प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट को एक मामले की सुनवाई के दौरान दी गई।
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अपने हलफनामे में प्रशासन ने कहा कि लोगों को बार-बार जागरूक किया जाता है कि बंदरों को कुछ खाने को न दिया जाए परंतु मंदिरों, ढाबों व रेस्तरां आदि के बाहर उन्हें खाने को दिया जाता है, जिसके चलते उनकी आबादी बढ़ रही है। साथ ही बंदरों को रोकने के मामले में अपनी मजबूरियां बताते हुए मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए उनके पास पर्याप्त साधन मौजूद हैं लेकिन बंदरों को सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में छोड़ने के अतिरिक्त उनके पास कोई विकल्प मौजूद नहीं है।
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अब बंदरों को खाना खिलाना होगा अपराध
साथ ही कहा कि बंदर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत संरक्षित है और इसलिए उसे मारा भी नहीं जा सकता है। उन्होंने बताया कि बंदरों के आतंक से शहर को निजात दिलाने के लिए 24 घंटे शिकायत के निवारण का प्रबंध है। इसके लिए एक हॉट लाइन नंबर 0172-4639999 भी जारी की गई है जिस पर बंदरों के बारे में शिकायत दी जा सकती है।
इसके अतिरिक्त एक टीम शिफ्ट के आधार पर काम करती है। इसके साथ ही प्रशासन ने बताया कि बंदरों को शहर में आने से रोकने के लिए वन क्षेत्र में अधिक से अधिक फल वाले वृक्ष लगाने की योजना है ताकि भोजन की तलाश में उन्हें वन से शहर में न आना पड़े। इसके साथ ही कचरे के ढेर को ढंकने और अन्य प्रकार के इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि बंदरों के आतंक से शहर को बचाया जा सके।
मामला इमारत से बंदर द्वारा गिराए गए पत्थर के कारण 17 साल के युवक की जान जाने से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता की वकील एडवोकेट एकता ठाकुर ने इस मामले को सीधे तौर पर प्रशासन की लापरवाही करार दिया था। इस मामले में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट के आदेशों पर प्रशासन मृतक के परिजनों को अंतरिम रूप से 2 लाख का मुआवजा दे चुका है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने बंदरों के आतंक से शहर को बचाने के लिए प्रशासन से उठाए गए कदमों का ब्योरा तलब किया था।
मुख्य वन संरक्षक ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा था कि मृतक के परिजनों को 2 लाख मुआवजा काफी है और नहीं दिया जाना चाहिए। इस मामले में बंदर के काटने से नहीं बल्कि पत्थर के गिरने से युवक की मौत हुई थी। किसी को नहीं पता कि वह पत्थर बंदर ने गिराया था या किसी और कारण से गिरा था। सोमवार को हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए कि वे दो लाख और मुआवजा जारी करे।
इसके अतिरिक्त एक टीम शिफ्ट के आधार पर काम करती है। इसके साथ ही प्रशासन ने बताया कि बंदरों को शहर में आने से रोकने के लिए वन क्षेत्र में अधिक से अधिक फल वाले वृक्ष लगाने की योजना है ताकि भोजन की तलाश में उन्हें वन से शहर में न आना पड़े। इसके साथ ही कचरे के ढेर को ढंकने और अन्य प्रकार के इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि बंदरों के आतंक से शहर को बचाया जा सके।
मामला इमारत से बंदर द्वारा गिराए गए पत्थर के कारण 17 साल के युवक की जान जाने से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता की वकील एडवोकेट एकता ठाकुर ने इस मामले को सीधे तौर पर प्रशासन की लापरवाही करार दिया था। इस मामले में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट के आदेशों पर प्रशासन मृतक के परिजनों को अंतरिम रूप से 2 लाख का मुआवजा दे चुका है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने बंदरों के आतंक से शहर को बचाने के लिए प्रशासन से उठाए गए कदमों का ब्योरा तलब किया था।
मुख्य वन संरक्षक ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा था कि मृतक के परिजनों को 2 लाख मुआवजा काफी है और नहीं दिया जाना चाहिए। इस मामले में बंदर के काटने से नहीं बल्कि पत्थर के गिरने से युवक की मौत हुई थी। किसी को नहीं पता कि वह पत्थर बंदर ने गिराया था या किसी और कारण से गिरा था। सोमवार को हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए कि वे दो लाख और मुआवजा जारी करे।