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भ्रष्टाचार के आरोप पर यूटी प्रशासन ने दी सफाई, बोले- नहीं पता कहां से आया 60:40 का फार्मूला
Tue, 23 Jul 2019 01:26 PM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 23 Jul 2019 01:26 PM IST
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फाइल फोटो
पंजाब के खडूर साहिब से सांसद जसबीर सिंह गिल की ओर से मनमाने तरीके से अफसरों की तैनाती और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए जाने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन हरकत में आ गया है। इस मसले पर प्रशासन ने कहा है कि यूटी प्रशासन और एमएचए के पास अब तक ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता हो कि यूटी में अफसरों की तैनाती के मामले में पंजाब और हरियाणा के अफसरों में 60 : 40 का फार्मूला लागू किया जाए।
सांसद की ओर से लोकसभा में उठाए गए सवाल के जवाब में एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा है कि चंडीगढ़ प्रशासन में लंबे समय से फाइनेंस सेक्रेटरी पंजाब कैडर से लगाया जाता रहा है और होम सेक्रेटरी व डीसी हरियाणा कैडर से। उन्होंने कहा कि यूटी प्रशासन में जो भी अफसर लगाए जाते हैं, उनका सिलेक्शन यूपीएससी के तहत होता है। जो योग्य होते हैं, उनकी तैनाती होती है।
अफसरों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा कि किसी पर ऐसे ही आरोप लगाना बहुत आसान है। ऐसे तो किसी का भी नाम लिया जा सकता है। अगर भ्रष्टाचार के आरोपों में तथ्य है तो इसे सामने लाया जाना चाहिए। ऐसे ही किसी के ऊपर या उसके आफिस पर आक्षेप लगाना सही नहीं। इससे अफसर हतोत्साहित होते हैं। तमाम अफसर जी-जान से शहर की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। इसे लेकर कहीं कोई विवाद नहीं है।
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सांसद की ओर से लोकसभा में उठाए गए सवाल के जवाब में एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा है कि चंडीगढ़ प्रशासन में लंबे समय से फाइनेंस सेक्रेटरी पंजाब कैडर से लगाया जाता रहा है और होम सेक्रेटरी व डीसी हरियाणा कैडर से। उन्होंने कहा कि यूटी प्रशासन में जो भी अफसर लगाए जाते हैं, उनका सिलेक्शन यूपीएससी के तहत होता है। जो योग्य होते हैं, उनकी तैनाती होती है।
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अफसरों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा कि किसी पर ऐसे ही आरोप लगाना बहुत आसान है। ऐसे तो किसी का भी नाम लिया जा सकता है। अगर भ्रष्टाचार के आरोपों में तथ्य है तो इसे सामने लाया जाना चाहिए। ऐसे ही किसी के ऊपर या उसके आफिस पर आक्षेप लगाना सही नहीं। इससे अफसर हतोत्साहित होते हैं। तमाम अफसर जी-जान से शहर की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। इसे लेकर कहीं कोई विवाद नहीं है।
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ऐसे हो रही अफसरों की तैनाती
इस संदर्भ में आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि उन्होंने यूटी प्रशासन में अफसरों की तैनाती में 60 प्रतिशत अफसर पंजाब और 40 प्रतिशत अफसर हरियाणा से तैनात करने को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन और होम मिनिस्ट्री से आरटीआई के तहत दस्तावेज मांगे थे। इसके जवाब में उन्हें कहा गया कि इस तरह का कोई लिखित दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। आरटीआई में बताया गया कि पंजाब-री-आर्गेनाइजेशन एक्ट के दौरान कुछ चीजें निर्धारित हुई थीं, जिनके अनुरूप अब तक काम किया जा रहा है।
लोगों की ली जाए राय
आरके गर्ग का कहना है कि जब दोनों राज्यों का बंटवारा हुआ था, तब परिस्थितियां अलग थीं और आज बिल्कुल अलग हैं। चंडीगढ़ की आबादी इस वक्त 13 लाख पार कर गई है। यहां पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, यूपी, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल सहित दक्षिण के राज्यों के लोग भी रहते हैं। पंजाब-हरियाणा अगर अपना दावा चंडीगढ़ पर जताते हैं तो कम से कम अब चंडीगढ़ के लोगों से भी पूछा जाना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं। जो लोग अब चंडीगढ़ में बसते हैं, उन्हें पंजाब या हरियाणा के अधिकार से कोई लेना देना नहीं।
यूटी को नहीं मिल रही अहमियत
45 साल गुजरने के बाद अब यूटी कैडर के अफसरों को भी उतनी अहमियत मिलनी चाहिए जितनी पंजाब-हरियाणा को मिलती है। केवल अफसरों की तैनाती में ही नहीं बल्कि डेपुटेशन पर भी जो टीचर या अन्य पोस्टों के लिए तैनाती होती है, उसमें इस फार्मूले को अब दरकिनार करने का वक्त आ चुका है।
लोगों की ली जाए राय
आरके गर्ग का कहना है कि जब दोनों राज्यों का बंटवारा हुआ था, तब परिस्थितियां अलग थीं और आज बिल्कुल अलग हैं। चंडीगढ़ की आबादी इस वक्त 13 लाख पार कर गई है। यहां पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, यूपी, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल सहित दक्षिण के राज्यों के लोग भी रहते हैं। पंजाब-हरियाणा अगर अपना दावा चंडीगढ़ पर जताते हैं तो कम से कम अब चंडीगढ़ के लोगों से भी पूछा जाना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं। जो लोग अब चंडीगढ़ में बसते हैं, उन्हें पंजाब या हरियाणा के अधिकार से कोई लेना देना नहीं।
यूटी को नहीं मिल रही अहमियत
45 साल गुजरने के बाद अब यूटी कैडर के अफसरों को भी उतनी अहमियत मिलनी चाहिए जितनी पंजाब-हरियाणा को मिलती है। केवल अफसरों की तैनाती में ही नहीं बल्कि डेपुटेशन पर भी जो टीचर या अन्य पोस्टों के लिए तैनाती होती है, उसमें इस फार्मूले को अब दरकिनार करने का वक्त आ चुका है।