चंडीगढ़: प्रशासन ने आठ फीसदी घटाया अनार्जित लाभ, व्यापारी बोले- ये ऊंट के मुंह में जीरा
उद्योगपति नवीन मंगलानी ने कहा कि उन्होंने 1980 में इंडस्ट्रियल एरिया में प्लॉट लिया। प्रशासन ने कोई सब्सिडी नहीं दी। फ्री होल्ड जितना ही दाम लिया बल्कि हर साल लीज मनी भी जमा करा रहे हैं।
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एस्टेट ऑफिस के कार्यों में सुधार लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सांसद किरण खेर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन हुआ था। कमेटी की सिफारिशों पर प्रशासन ने लीज होल्ड आवंटित संपत्ति के हस्तांतरण पर अनार्जित लाभ को आठ फीसदी घटाया है लेकिन इससे शहर के उद्योगपति व सोसाइटी में रहने वाले लोग खुश नहीं हैं। लोगों ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा के समान बताया है।
यूटी प्रशासन ने गुरुवार को एस्टेट रूल्स में संशोधन कर अनार्जित लाभ को 33 से 25 फीसदी किया है। प्रशासन ने नए नियमों को चंडीगढ़ एस्टेट (अमेंडमेंट्स) रूल्स 2022 का नाम दिया है। वर्ष 1970 और 80 के बीच शहरभर में लीज होल्ड पर संपत्तियों का आवंटन किया गया था। इसमें इंडस्ट्रियल एरिया के प्लॉट समेत शहर की बूथ मार्केट की सभी दुकानों के अलावा अन्य संपत्ति शामिल है।
कॉपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के लिए ट्रांसफर पॉलिसी में नया नियम जोड़कर उनसे भी अनार्जित लाभ वसूला जा रहा है। आवंटन के समय ये शर्त लगाई गई थी कि 15 वर्ष तक इन संपत्तियों व दुकानों को बेचा नहीं जा सकेगा जबकि 15 वर्ष के बाद प्रॉपर्टी की ट्रांसफर के समय मार्केट वैल्यू के हिसाब से प्रशासन को प्रॉफिट का एक हिस्सा देना होगा। यह एक तिहाई होगा और अब इसे कम कर एक चौथाई तक कर दिया है।
अनार्जित लाभ का विरोध करने वाले लोगों का तर्क
उद्योगपति नवीन मंगलानी ने कहा कि उन्होंने 1980 में इंडस्ट्रियल एरिया में प्लॉट लिया। प्रशासन ने कोई सब्सिडी नहीं दी। फ्री होल्ड जितना ही दाम लिया बल्कि हर साल लीज मनी भी जमा करा रहे हैं। अब अगर वो अपनी प्रॉपर्टी को ट्रांसफर करना चाहते हैं तो उन्हें प्रशासन को कुल राशि का एक चौथाई हिस्सा देना पड़ेगा।
फ्री होल्ड में ऐसा कुछ नहीं है तो ये लीज होल्ड के लोगों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। सोसाइटी के मुद्दे पर वर्षों से लड़ रहे जेजे सिंह ने बताया कि उन्हें अनार्जित लाभ के नाम पर आठ से 18 लाख रुपये तक भरने पड़ते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री का खर्च और 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना पड़ता है। सभी सोसायटियों ने फ्लैट्स का निर्माण खुद कराया है। विकास से जुड़े काम भी खुद कराए हैं फिर प्रशासन किस चीज का लाभ मांग रहा है।
जानिए... क्या है अनार्जित लाभ, क्यों हो रहा है विरोध
चंडीगढ़ में वर्ष 1971-72 में औद्योगिक क्षेत्र-एक और दो में करीब 3700-3800 प्लॉट आवंटित किए गए थे। आवंटन के समय यह नियम जोड़ा गया कि आवंटन के 15 साल तक उस संपत्ति को किसी और के नाम पर ट्रांसफर/बेचा नहीं जा सकेगा। 15 साल के बाद अगर कोई ट्रांसफर करना चाहेगा तो उस समय के कलेक्टर रेट और जिस दाम पर प्लॉट आवंटित हुआ था, उसके बीच की राशि में से एक तिहाई (अब एक चौथाई) रुपये प्रशासन के पास जमा कराना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो संपत्ति ट्रांसफर नहीं होगी। जो पैसा प्रशासन को दिया जाता है उसे अनार्जित लाभ कहा जाता है। यह राशि करोड़ों में होती है इसलिए कोई भी उद्योगपति ट्रांसफर नहीं करा सकता है। उद्योगपति पिछले कई साल से राहत की मांग कर रहे हैं।
इस नीति से न व्यापार बढ़ेगा और न उद्योग
एक कनाल पर 75 लाख रुपये और उसके ऊपर जीएसटी के रूप में अनार्जित लाभ प्रशासन को देना पड़ता है। ये बहुत ज्यादा है। प्रशासन को सभी संपत्तियां फ्री होल्ड करनी चाहिए या अनार्जित लाभ को बेहद कम करना चाहिए। इस तरह की नीतियों से शहर में न तो व्यापार बढ़ेगा और न उद्योग। - नवीन मंगलानी, प्रेसिडेंट, चेंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
प्रशासन ने लोगों को मूर्ख बनाया
हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे। महज 8 फीसदी कम कर प्रशासन ने लोगों को मूर्ख बनाने का काम किया है। सोसाइटी में रहने वाले लोग इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं हैं। लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड कर देना चाहिए। ट्रांसफर पर इंडिपेंडेंट प्लॉट की तरह ही नियम होने चाहिए। - जेजे सिंह, प्रधान, आरडब्ल्यूए-48
फ्री होल्ड में बदलने के लिए लाई जाए नीति
अनार्जित लाभ को 33 से घटाकर 25 प्रतिशत करने के कदम का स्वागत करते हैं लेकिन यह अभी भी बहुत अधिक है। इसलिए मैं यूटी प्रशासन से उचित शुल्क के साथ लीज होल्ड संपत्ति को फ्री होल्ड में बदलने के लिए एक नीति लाने का आग्रह करता हूं ताकि यह मुद्दा हमेशा के लिए बंद हो जाए। -चरणजीव सिंह, अध्यक्ष, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
अनार्जित लाभ को समाप्त किया जाना चाहिए
अनार्जित लाभ घटाने का हम स्वागत करते हैं लेकिन 15 वर्षों के बाद ट्रांसफर के लिए किसी इजाजत की जरूरत नहीं फिर अनार्जित लाभ क्यों लिया जा रहा है। हमारी प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में पुनर्विचार कर 15 वर्षों बाद लिए जाने वाले अनार्जित लाभ को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए। - कैलाश चंद जैन, अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल