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चंडीगढ़ में नहीं थम रहा कोरोना, प्रशासन ने खड़े किए हाथ, काबू पाने को केंद्र से मांगी मदद

Sat, 05 Sep 2020 11:29 AM IST
ajay kumar रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 05 Sep 2020 11:29 AM IST
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Chandigarh Administration meeting with Central Government officials via video conferencing
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई

चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। रोजाना 200 से अधिक नए मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। इसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानों प्रशासन ने कोरोना वायरस के सामने घुटने टेक दिए हैं। इस बीच शुक्रवार को प्रशासन के अधिकारियों की केंद्र सरकार अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एक बैठक हुई। बैठक में प्रशासन ने शहर में कोरोना वायरस को रोकने के लिए केंद्र से एक मेडिकल एक्सपर्ट टीम की मदद मांगी है।

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बैठक में केंद्र सरकार के अधिकारियों ने चंडीगढ़ में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस को लेकर चिंता जताई। अधिकारियों ने चंडीगढ़ में कोरोना के कुल केस, कितने सैंपल लिए, कितने पॉजिटिव आए, कितने मरीजों की मौत हुई और इनमें से कितने पहले से अन्य बीमारियों से ग्रसित थे, जैसी कई जानकारियां हासिल कीं।
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केंद्र सरकार के अधिकारियों ने पाया कि अगस्त महीने के बाद से शहर में कोविड के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस पर यूटी प्रशासन की तरफ से चंडीगढ़ को एक मेडिकल एक्सपर्ट टीम प्रदान करने के लिए आग्रह किया गया। यह टीम शहर में कोरोना के केसों को रोकने में मदद करेगी और समय-समय पर सुझाव देगी। 
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बैठक में अधिकारियों ने चंडीगढ़ के अस्पतालों में डॉक्टर की संख्या, बेड व अन्य जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली। केंद्र सरकार ने पीजीआई को और बेड बढ़ाने के निर्देश दिए। उनका तर्क रहा कि पीजीआई में पंजाब और हरियाणा समेत अन्य राज्यों के मरीज भी भर्ती हो रहे हैं इसलिए बेड की संख्या बढ़ाई जाए।

बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जिन प्रदेश/यूटी में कोरोना के दस हजार से कम केस हैं, उनमें सबसे ज्यादा मौतें चंडीगढ़ में दर्ज की गई हैं। यूटी प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक हुई 68 मौतों में से करीब 70 फीसदी मौतें सिर्फ अगस्त में हुई हैं। चंडीगढ़ के बिगड़ते हालात पर विशेषज्ञों ने भी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि कोरोना को रोकने के लिए अब प्रशासन को युद्ध स्तर पर कदम उठाने होंगे। यदि नहीं चेते तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयानक हो सकती हैं। 

केंद्रीय अधिकारियों ने क्वारंटीन सेंटरों की संख्या बढ़ाने का दिया सुझाव 
केंद्रीय अधिकारियों ने प्रशासन को कुछ अन्य सुझाव भी दिए। कहा कि प्रशासन शहर में क्वारंटीन सेंटरों की संख्या बढ़ाए और वहां पर स्वास्थ्य मंत्रालय के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। इसके अलावा कोरोना के वह पॉजिटिव मरीज जो घर पर क्वारंटीन है, उन पर सख्त नजर रखने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि अगर इन लोगों की तरफ से लापरवाही बरती गई तो समस्या और भी बढ़ सकती है। 

उनकी तरफ से कहा गया कि घर पर क्वारंटीन मरीजों में से किसी की अगर तबीयत बिगड़ती है तो उन्हें बिना संकोच अस्पताल में भर्ती किया जाए। इस बीच चंडीगढ़ प्रशासन ने पीजीआई और जीएमसीएच के लिए 20-20 वेंटिलेटर की भी मांग रखी। गौरतलब है कि पीजीआई को पिछले महीने केंद्र सरकार से कुछ वेंटिलेटर मिले हैं।

अकेले व्यायाम या कार में सफर करते समय मास्क की जरूरत नहीं
अब अगर कोई अकेले कार में कहीं जा रहा हो और उसने मास्क नहीं पहना हो तो पुलिस उसका चालान नहीं काट सकती। न ही अकेले बिना मास्क के व्यायाम करते हुए किसी व्यक्ति का चालान काटा जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के इस दिशा-निर्देश को लागू करने के लिए एडवाइजर मनोज परिदा ने आदेश जारी कर दिए हैं। 

पुलिस को ऐसे लोगों के चालान नहीं काटने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अकेले कार में कही भी जाने पर मास्क की अनिवार्यता नहीं है। भीड़ भाड़ वाले स्थान पर मास्क लगाना अनिवार्य है। वहीं, मार्निंग वॉक या साइक्लिंग के लिए अकेले निकले हैं तो भी मास्क के बिना जा सकते हैं। इस स्थिति में मास्क को लेकर चालान नहीं किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार किसी समूह में साइकिल चलाना या दौड़ना हो तो मास्क जरूरी है। यदि कोई अकेले जा रहा है तो मास्क जरूरी नहीं है, इस स्थिति में पुलिस भी चालान नहीं काट सकती है। 

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