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Chandigarh: कार्मल कान्वेंट हादसे के बाद भी प्रशासन सुस्त, सूखे पेड़ों का बस दो दिन हुआ सर्वे, लोग डर में

Sun, 17 Jul 2022 04:31 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 17 Jul 2022 04:31 PM IST
सार

जो हरियाली चंडीगढ़ के लिए वरदान थी, वही अब उनके लिए खतरा बन रही है। इसका कारण है अधिकारियों की लापरवाही। न समय से पेड़ों की प्रूनिंग होती है और न हेरीटेज पेड़ों के रखरखाव का कोई ब्योरा है।

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Chandigarh administration is not alert even after the accident at Carmel Convent School
चंडीगढ़ में कई जगह पेड़ गिरने की कगार पर हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हुए हादसे के बाद भी प्रशासन, नगर निगम और वन विभाग नहीं चेत रहा है। शहर में सड़क किनारे सूखे व खोखले पेड़ खड़े हैं लेकिन अधिकारियों ने दो दिन सर्वे कर खानापूर्ति कर दी। प्रतिदिन सड़क के किनारे टहनियां गिरने से लोग चोटिल हो रहे हैं, बावजूद इसके सड़क किनारे पेड़ों की छंटाई को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं है। 

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जो हरियाली शहर के लिए वरदान थी, वही अब उनके लिए खतरा बन रही है। इसका कारण है अधिकारियों की लापरवाही। न समय से पेड़ों की प्रूनिंग होती है और न हेरीटेज पेड़ों के रखरखाव का कोई ब्योरा है। जागरूक लोग शिकायत करें तो विभाग के चक्कर लगाकर और फोन कर थक जाते हैं लेकिन सुनवाई नहीं होती। वहीं कई बार लोगों को यही जानने में कई महीने लग जाते हैं कि पेड़ नगर निगम, प्रशासन और वन विभाग में से किसका है। यही कारण है कि कार्मल कॉन्वेंट में हुए हादसे के बाद स्कूल प्रबंधन और वन विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते दिखे। 

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चबूतरा तोड़ने के चक्कर में लॉयंस कंपनी के कर्मियों ने काट दीं पेड़ की जड़ें

सेक्टर-26 सब्जी मंडी में सफाई का काम लॉयंस कंपनी के पास है। यहां एक पेड़ के चारों ओर चबूतरा बना दिया गया था। कई बार लोग यहां सब्जी रखकर बेचते थे और गंदगी वहीं इकट्ठी कर देते थे। कंपनी के कर्मचारियों ने उस चबूतरे को तोड़ने के चक्कर में पेड़ की जड़ों को ही काट दिया। स्थिति यह है कि अब यह पेड़ कभी भी गिर सकता है। 

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पेड़ गिरने की घटना को हमें गंभीरता से समझना होगा 

स्कूल के अंदर हेरिटेज पेड़ का गिरना एक साधारण घटना नहीं है। इसकी गंभीरता को सभी शहरवासियों को समझना होगा। चंडीगढ़ की हरियाली और पर्यावरण के लिए वन विभाग, नगर निगम और प्रशासन जिम्मेदार है, फिर भी इनकी हालत दयनीय है। इसका रखरखाव समय से हो। खासकर प्रूनिंग को लेकर समस्या न आए। पुराने जर्जर पेड़ों को निकालने की जरूरत है, लेकिन उनके बदले हमें उचित स्थान पर पहले पेड़ लगाने भी चाहिए।  -प्रभुनाथ शाही, पर्यावरणप्रेमी


पेड़ को काटना हल नहीं, बागवानी और पर्यावरण विभाग करे देखभाल 

पेड़ों को काटना हल नहीं है। ऐसा हाल हुआ तो हर छह महीने में एक हजार पेड़ कट जाएंगे। बागवानी और पर्यावरण विभाग को पेड़ों की देखभाल करनी चाहिए। इतने बड़े हादसे के बाद भी महज सर्वे कर खानापूर्ति कर दी। पेड़ों में डीमक लग रही है या पेड़ खोखले हो गए हैं इसे देखने के लिए अफसर दफ्तरों से बाहर निकलना ही नहीं चाहते। प्रशासक से आग्रह है कि जो लोग काम नहीं कर रहे हैं उन्हें तत्काल बदल देना चाहिए।  - राहुल महाजन, पर्यावरणप्रेमी

गंभीरता से सर्वे कर अवांछित पेड़ों को कटवाए प्रशासन 

हेरीटेज पेड़ का बोर्ड लगाकर प्रशासन अपना दायित्व पूरा कर लेता है। अभी भी समय है कि प्रशासन को हेरिटेज पेड़ों की देखभाल की नीति की समीक्षा करनी चाहिए ताकि शहर में खोखले हो रहे पेड़ों को बचाया जा सके।  उनकी देखभाल की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रशासन को गंभीरता से सर्वे कर अवांछित पेड़ों को कटवाना चाहिए। जल्द यह कार्य पूरा करके प्रशासन सार्वजनिक सूचना प्रसारित करनी चाहिए। - आरके गर्ग, अध्यक्ष, सेकेंड इनिंग एसोसिएशन

उम्र पूरी कर चुके पेड़ों को हटाकर इनकी जगह नई पौधे लगाएं 

40 रुपये की दीमक की दवा आती है लेकिन जिम्मेदार लोगों को इसके लिए गंभीरता से विचार करना होगा। उम्र पूरी कर चुके पेड़ों का समय पर सर्वे कर हटाएं। इनकी जगह नए पौधे रोपना और उनका ब्योरा तैयार करना जरूरी है। विभाग के कर्मचारियों के साथ लोगों से मिलने वाली शिकायत पर भी त्वरित कार्रवाई करने की प्रक्रिया ही इस शहर की सुंदरता को बनाए रखने में हमारी मदद कर सकती है। - प्रदीप त्रिवेणी, पर्यावरणप्रेमी

निरीक्षण के दौरान 31 पेड़ खतरनाक निकले थे। उसमें से 11 निगम के थे। हमने वन विभाग को पत्र भेजकर सामूहिक कार्रवाई के लिए कहा है। इसमें से कुछ पेड़ों को हटा दिया है, शेष पेड़ों को भी हटाया जा रहा है। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम


लोगों की ओर से मिलने वाली शिकायतों पर विभिन्न विभागों की टीम निरीक्षण कर रही है। मौके पर टीम पेड़ की स्थिति का जायजा लेती है और समस्या के अनुसार उसे हटाया जा रहा है। - सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, प्रशासन

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