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'रॉक लेजेंड' नेकचंद की विरासत की हो रही अनदेखी, बेटे ने बयां किया दर्द
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 11 Dec 2016 03:26 PM IST
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नेकचंद एक्सीलेंस अवार्ड
- फोटो : फाइल फोटो
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रॉक गार्डन के निर्माता दिवंगत पद्मश्री नेकचंद के सपनों की अनदेखी हो रही है। उनके बेटे अनुज सैनी से बात की गई तो उन्होंने कुछ यूं दर्द बयां किया। अमर उजाला से बातचीत के दौरान रॉक गार्डन के निर्माता के बेटे अनुज सैनी ने कहा कि बाबू जी ने कई बार प्रशासन से मांग की थी कि यहां पर व्यवस्थाएं ठीक की जाएं। इसके बावजूद भी अभी तक रॉक गार्डन की व्यवस्था ठीक नहीं की है।
यूटी प्रशासन और रॉक गार्डन सोसायटी की ओर से पिछले वर्ष 15 दिसंबर से 18 दिसंबर तक नेकचंद का जन्मदिवस मनाया गया था। इस दौरान रॉक गार्डन में नेकचंद म्यूजियम, डॉल म्यूजियम, ऑडियो वीडियो रूम और सीसीटीवी कैमरे लगाए की घोषणा की गई थी। इस पर अभी भी काम चल रहा है। रॉक गार्डन की लाइटिंग का काम भी तीनों फेस में कराने के लिए तीन करोड़ से ज्यादा का बजट बनाया गया था।
इस सभी कामों को अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। हर साल रॉक गार्डन से तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व प्रशासन इकट्ठा करता है, लेकिन इसके लिए कोई काम नहीं करना चाहता है। वहीं, एक साल पहले बच्चों के लिए पांच और बड़ों के लिए 20 रुपये किराया लगता था। इसे बढ़ाकर प्रशासन ने बच्चों के लिए 10 और बड़ों के लिए 30 रुपये कर दिया गया है।
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अनुज ने कहा कि रॉक गार्डन में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने के कारण कई बार लोग दीवारों पर गलत शब्द लिख देते हैं। इसके अलावा पान की पीक थूकने के निशान पड़े हैं। उन्होंने कहा कि यहां सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएं तो यहां पर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त हो जाएगा।
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यूटी प्रशासन और रॉक गार्डन सोसायटी की ओर से पिछले वर्ष 15 दिसंबर से 18 दिसंबर तक नेकचंद का जन्मदिवस मनाया गया था। इस दौरान रॉक गार्डन में नेकचंद म्यूजियम, डॉल म्यूजियम, ऑडियो वीडियो रूम और सीसीटीवी कैमरे लगाए की घोषणा की गई थी। इस पर अभी भी काम चल रहा है। रॉक गार्डन की लाइटिंग का काम भी तीनों फेस में कराने के लिए तीन करोड़ से ज्यादा का बजट बनाया गया था।
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इस सभी कामों को अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। हर साल रॉक गार्डन से तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व प्रशासन इकट्ठा करता है, लेकिन इसके लिए कोई काम नहीं करना चाहता है। वहीं, एक साल पहले बच्चों के लिए पांच और बड़ों के लिए 20 रुपये किराया लगता था। इसे बढ़ाकर प्रशासन ने बच्चों के लिए 10 और बड़ों के लिए 30 रुपये कर दिया गया है।
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अनुज ने कहा कि रॉक गार्डन में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने के कारण कई बार लोग दीवारों पर गलत शब्द लिख देते हैं। इसके अलावा पान की पीक थूकने के निशान पड़े हैं। उन्होंने कहा कि यहां सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएं तो यहां पर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त हो जाएगा।
कई मुश्किलों का सामना करके बनाया गया रॉक गार्डन
रॉक गार्डन चंडीगढ़ के निर्माता नेकचंद
- फोटो : फाइल फोटो
नेकचंद को शुरुआत में रॉक गार्डन को बचाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इस बारे में 1975 में जब अधिकारियों को पता चला तो, उन्होंने इसे नष्ट करने की धमकी दी। उनका कहना था कि यह उन कड़े नियोजन कानूनों का उल्लंघन है जो ली-काबूजिए की सिटी ब्यूटीफुल की रक्षा के लिए बनाए गए थे। वहां यह अनिवार्य था कि हर चीज मास्टर प्लान का हिस्सा होनी चाहिए।
नेक चंद फाउंडेशन के अनुसार उस समय कई नेताओं ने रॉक गार्डन को अवैध निर्माण बताकर उसे ढहाए जाने की मांग की थी। लोगों से राय लेने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि रॉक गार्डन एक सार्वजनिक पार्क बने, जिसे अच्छा फंड मिले। नेकचंद को उनके कार्यभार से मुक्त कर दिया गया और ‘निर्माता-निदेशक’ के तौर पर रॉक गार्डन का विस्तार जारी रखने के लिए उन्हें वेतन दिया जाता रहा।
इसके अलावा उनकी कलाकृतियों को रॉक गार्डन में स्थापित करने में मदद करने के लिए प्रशासन ने श्रमिक भी मुहैया कराए। इसके बाद नेक चंद के काम को समर्थन देने और रॉक गार्ड के बारे में विश्व भर में जागरूकता पैदा करने के लिए 1997 में नेक चंद फाउंडेशन का गठन किया गया था।
नेक चंद फाउंडेशन के अनुसार उस समय कई नेताओं ने रॉक गार्डन को अवैध निर्माण बताकर उसे ढहाए जाने की मांग की थी। लोगों से राय लेने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि रॉक गार्डन एक सार्वजनिक पार्क बने, जिसे अच्छा फंड मिले। नेकचंद को उनके कार्यभार से मुक्त कर दिया गया और ‘निर्माता-निदेशक’ के तौर पर रॉक गार्डन का विस्तार जारी रखने के लिए उन्हें वेतन दिया जाता रहा।
इसके अलावा उनकी कलाकृतियों को रॉक गार्डन में स्थापित करने में मदद करने के लिए प्रशासन ने श्रमिक भी मुहैया कराए। इसके बाद नेक चंद के काम को समर्थन देने और रॉक गार्ड के बारे में विश्व भर में जागरूकता पैदा करने के लिए 1997 में नेक चंद फाउंडेशन का गठन किया गया था।
दुनिया भर में मशहूर है नेकचंद का अनूठा वर्ल्ड
रॉक गार्डेन
- फोटो : file photo
नेकचंद ने पंजाब के लोक निर्माण विभाग में 1951 में सड़क निरीक्षक के तौर पर काम करते हुए प्रसिद्ध सुखना लेक के पास वन के एक छोटे से हिस्से को साफ करके एक छोटा बगीचा बना कर लोगों को एक अनूठी जादुई दुनिया से रू-ब-रू कराया था।
रॉक गार्ड न में चीनी मिट्टी के टूटे बर्तन, बिजली के सामान, टूटी चूड़ियों, स्नानघर की टाइल, वॉशबेसिन और साइकिल के फ्रेमों जैसे बेकार सामान का इस्तेमाल करके पुरुषों, महिलाओं, जानवरों और भगवान की मूर्तियां बनाई। रॉक गार्डन का उद्घाटन 1976 में हुआ था।
यह अब 40 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। हर साल इसको देखने के लिए चार लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। अनुज ने कहा कि बाबूजी के विश्व भर में लाखों प्रशंसक हैं। नेकचंद हमेशा से लद्दाख घूमने जाना चाहते थे। जब उन्हें आर्मी ने लद्दाख आने का न्योता भेजा तो उनकी यह इच्छा प्रबल हो गई, लेकिन लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी और नेकचंद के दिल के मरीज होने के कारण डॉक्टर ने उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी।
और उनकी लद्दाख जाने की इच्छा अधूरी ही रह गई। अनुज सैनी उनकी अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते थे। इस वजह से नेकचंद के ऑफिस एरिया में मौजूद आइलैंड को बुनियादी तौर पर न छेड़ते हुए अपने आप में लद्दाख की शकल दी गई। इसे बहुत खूबसूरती के साथ झरने से संवारा गया है। अनुज ने उनकी अस्थियों को इसमें रखा है।
रॉक गार्ड न में चीनी मिट्टी के टूटे बर्तन, बिजली के सामान, टूटी चूड़ियों, स्नानघर की टाइल, वॉशबेसिन और साइकिल के फ्रेमों जैसे बेकार सामान का इस्तेमाल करके पुरुषों, महिलाओं, जानवरों और भगवान की मूर्तियां बनाई। रॉक गार्डन का उद्घाटन 1976 में हुआ था।
यह अब 40 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। हर साल इसको देखने के लिए चार लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। अनुज ने कहा कि बाबूजी के विश्व भर में लाखों प्रशंसक हैं। नेकचंद हमेशा से लद्दाख घूमने जाना चाहते थे। जब उन्हें आर्मी ने लद्दाख आने का न्योता भेजा तो उनकी यह इच्छा प्रबल हो गई, लेकिन लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी और नेकचंद के दिल के मरीज होने के कारण डॉक्टर ने उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी।
और उनकी लद्दाख जाने की इच्छा अधूरी ही रह गई। अनुज सैनी उनकी अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते थे। इस वजह से नेकचंद के ऑफिस एरिया में मौजूद आइलैंड को बुनियादी तौर पर न छेड़ते हुए अपने आप में लद्दाख की शकल दी गई। इसे बहुत खूबसूरती के साथ झरने से संवारा गया है। अनुज ने उनकी अस्थियों को इसमें रखा है।
रॉक गार्डन में किए जाने थे ये सभी काम
नेकचंद
डॉल म्यूजियम नहीं बनायाः रॉक गार्ड न के फेज-3 में जल्द ही डाल म्यूजियम बनाया जाना था। प्रशासन और रॉक गार्डन सोसायटी की ओर से पिछले साल इसका उद्घाटन किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जा सका है। तीसरे फेज में बनने वाले इस विलेज में करीब डॉल्स को डिस्पले किया जाएगा जो विलेज की कहानी बयां करेंगी। साथ ही डॉल्स के जरिए कई तरह के विलेज सीन भी दिखाए जाने के दावे किए गए थे।
शादी समारोह के आयोजन नहीं रुकेः अनुज सैनी बताया कि रॉक गार्डन फेज-3 को पर्यटकों के लिए विकसित होने की बात प्रशासन की ओर से भले ही की जा रही है, लेकिन यहां पर शादी में टेंट लगा दिए जाते हैं। इस कारण यहां पर पर्यटक भी नहीं आते हैं। यहां पर गंदगी का आलम बना हुआ है। रॉक गार्डन में शादी समारोह के आयोजनों का बाबू जी ने कई बार विरोध किया था, लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
1984 में मिला था पद्मश्रीः नेकंचद ने रॉक गार्डन में टूटे हुए चीनी मिट्टी के मग और प्लेट के टुकड़ों से मूर्ति, कांच की चूड़ियों को पंछियों का आकार, सिरेमिक के बेकार हो चुके प्लग से कलाकृति बनाई थीं। इस वेस्ट मैटेरियल से उन्होंने नायाब रॉक गार्डन का निर्माण किया। जिसे बाद में काफी सराहा गया। इसको देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1984 में पद्मश्री से नवाजा था।
रॉक गार्डन के सभी प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। रॉक गार्डन सोसायटी की ओर से म्यूजियम सहित सभी व्यवस्थाओं को जल्द ही सुधारा जाएगा। -अनुराग अग्रवाल, गृहसचिव, चंडीगढ़ प्रशासन
शादी समारोह के आयोजन नहीं रुकेः अनुज सैनी बताया कि रॉक गार्डन फेज-3 को पर्यटकों के लिए विकसित होने की बात प्रशासन की ओर से भले ही की जा रही है, लेकिन यहां पर शादी में टेंट लगा दिए जाते हैं। इस कारण यहां पर पर्यटक भी नहीं आते हैं। यहां पर गंदगी का आलम बना हुआ है। रॉक गार्डन में शादी समारोह के आयोजनों का बाबू जी ने कई बार विरोध किया था, लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
1984 में मिला था पद्मश्रीः नेकंचद ने रॉक गार्डन में टूटे हुए चीनी मिट्टी के मग और प्लेट के टुकड़ों से मूर्ति, कांच की चूड़ियों को पंछियों का आकार, सिरेमिक के बेकार हो चुके प्लग से कलाकृति बनाई थीं। इस वेस्ट मैटेरियल से उन्होंने नायाब रॉक गार्डन का निर्माण किया। जिसे बाद में काफी सराहा गया। इसको देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1984 में पद्मश्री से नवाजा था।
रॉक गार्डन के सभी प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। रॉक गार्डन सोसायटी की ओर से म्यूजियम सहित सभी व्यवस्थाओं को जल्द ही सुधारा जाएगा। -अनुराग अग्रवाल, गृहसचिव, चंडीगढ़ प्रशासन