Chandigarh: 60 घंटे बाद भी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पेड़ गिरने की घटना का जिम्मेदार तय नहीं, पुलिस ने अज्ञात पर केस दर्ज कर झाड़ा पल्ला
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इस मामले पर कहा कि उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। जांच चल रही है। रिपोर्ट में ही स्पष्ट होगा कि हेरिटेज पेड़ होने पर किसकी क्या जिम्मेदारी होती है। वन विभाग की तरफ से क्या-क्या एक्शन लिया गया था और क्या लेना चाहिए था।
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चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 250 साल पुराना हेरिटेज पीपल का पेड़ गिरने की घटना को 60 घंटे से ज्यादा हो चुका है, लेकिन अब तक प्रशासन ये नहीं तय कर पाया है कि किसकी लापरवाही से 16 वर्षीय हीराक्षी को जान गंवानी पड़ी। यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल का कहना है कि वह जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
हादसे के बाद से पूरे शहर में हादसे की चर्चा हो रही है। कोई प्रशासन के वन विभाग को गलत ठहरा रहा है, जिसके पास हेरिटेज पेड़ों की जिम्मेदारी है तो कोई स्कूल को जिम्मेदार मान रहा है, क्योंकि उनके परिसर में पेड़ मौजूद था। लोगों को कहना है कि वन विभाग की तरफ से पेड़ को हेरिटेज का स्टेटस दिए जाने के बाद उसकी समय-समय पर खुद देखभाल करनी चाहिए थी लेकिन विभाग ने बोर्ड लगाने के बाद दोबारा कभी ध्यान नहीं दिया। कुछ साल पहले भी इसकी एक टहनी गिरी थी। उस समय ही विभाग सतर्क हो गया होता तो हीराक्षी को अपनी जान न गंवानी पड़ती। न इशिता को हाथ गंवाना पड़ता और न अटेंडेंट शीला को वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जंग लड़ना पड़ता।
सेवानिवृत जज और पंजाब के चीफ विजिलेंस कमिश्नर मेहताब सिंह गिल ने तो प्रशासन के अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग कर दी है। दूसरी तरफ, प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पेड़ में दीमक लग गए थे। इसकी जानकारी स्कूल की तरफ से दी जानी चाहिए थी लेकिन नहीं दी गई। दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पुलिस ने भी अज्ञात पर केस दर्ज कर अपना पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
प्रशासक के सलाहकार ने दिए हैं जांच के आदेश
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इस मामले पर कहा कि उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। जांच चल रही है। रिपोर्ट में ही स्पष्ट होगा कि हेरिटेज पेड़ होने पर किसकी क्या जिम्मेदारी होती है। वन विभाग की तरफ से क्या-क्या एक्शन लिया गया था और क्या लेना चाहिए था। हालांकि पेड़ स्कूल के अंदर था, इसलिए स्कूल को जानकारी देनी चाहिए थी, क्योंकि साफ देखा जा सकता था कि पेड़ में दीमक लगे हुए थे। अगर स्कूल ने कभी पेड़ की स्थिति को लेकर वन विभाग को पत्र लिखा हो, तो उन्हें इसकी जानकारी देनी चाहिए ताकि पता करें कि उस पत्र पर विभाग ने क्या कार्रवाई की। दूसरी तरफ ये संज्ञान में आया है कि बच्चों को क्लास में लंच नहीं करने दिया जाता है। ये बात अजीब है, क्योंकि अगर बच्चों को क्लास में खाना खाने नहीं दिया जाता है तो उनके लिए डाइनिंग हॉल की व्यवस्था करनी चाहिए। कोई अलग एरिया बनाना चाहिए। धर्मपाल ने कहा कि वह रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, उसके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अभी भी कई पेड़ ऐसे जो गिरने के कगार पर
स्कूल में पेड़ गिरने की घटना के बाद से शहरवासी डरे हुए हैं। लगातार प्रशासन और नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विभाग के पास पेड़ों की छंटाई को लेकर शिकायतें आ रही हैं। लोग प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को सूखे एवं मृत पेड़ों की फोटो भेज रहे हैं और उन्हें जल्द कटवाने की मांग कर रहे हैं। शहर के कई नेता सोशल मीडिया पर गिरने की हालत में खड़े पेड़ों की फोटो शेयर कर रहे हैं और उन्हें जल्द कटवाने की मांग कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ के को-इंचार्ज प्रदीप छाबड़ा ने कई फोटो ट्वीट करते हुए प्रशासन पर तंज कसा। कहा कि क्या वह फिर किसी हादसे का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कुछ पेड़ों की फोटो डाली है, जिसमें पेड़ गिरने की कगार पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। सेक्टर-37 के योगेश ने बताया कि उन्होंने एक पुराने पेड़ की छंटाई के लिए 18 मार्च को आवेदन किया लेकिन 23 मार्च को उसे खारिज कर दिया गया। दोबारा भी आवेदन किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।