चंडीगढ़ में मेट्रो या मोनो रेल: 12 साल, सौ से ज्यादा बैठक और 10 करोड़ खर्चे, अब प्रशासन फिर करवाएगा सर्वे
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कहा कि 2009 की तकनीक अब पुरानी हो चुकी है। मंत्रालय के मानक भी बदल गए हैं, इसलिए अब नई तकनीक पर कार्य करना होगा।
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चंडीगढ़ के लिए मेट्रो मुफीद रहेगी या मोनो रेल, या फिर सार्वजनिक परिवहन का कोई और साधन, 12 साल में 100 से ज्यादा बैठकें और 10 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च करने के बाद भी चंडीगढ़ प्रशासन अब तक कुछ तय नहीं कर पाया है। लिहाजा एक बार नए सिरे से सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इस संबंध में सोमवार को निर्देश दे दिए हैं। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2009 की मेट्रो परियोजना को समझने के लिए रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स कंपनी) के साथ बैठक की।
सोमवार को हुई इस बैठक में कंपनी की तरफ से पूरी परियोजना को लेकर एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) दी गई। इस दौरान प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कहा कि 2009 की तकनीक अब पुरानी हो चुकी है। मंत्रालय के मानक भी बदल गए हैं, इसलिए अब नई तकनीक पर कार्य करना होगा। सलाहकार धर्मपाल ने आदेश दिए कि नए सिरे से एक अध्ययन किया जाए और पता किया जाए कि शहर के लिए क्या बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि अध्ययन में जो भी सुझाव आएंगे, उन पर गंभीरता से कार्य होगा।
उन्होंने इस काम के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं। राइट्स कंपनी की तरफ से दी गई प्रस्तुति को देखने के बाद सलाहकार ने कहा कि पहली रिपोर्ट काफी पुरानी हो चुकी है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए मोबिलिटी प्लान को तैयार करने की जरूरत है। शहर में मेट्रो चलेगी, मोनो या स्काई बस, ये नए अध्ययन के बाद ही तय होगा। धर्मपाल ने कहा कि शहरी विकास व आवासीय मंत्रालय की तरफ से इस संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं, जिसके मुताबिक ही ये प्लान होना चाहिए।
कंपनी ने बताया -2009 के मुकाबले यातायात कई गुना बढ़ा
राइट्स ने वर्ष 2009 में जो सर्वे किया था, उसमें उस वक्त शहर के विभिन्न इलाकों में यातायात के दबाव आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी। किस चौक पर किस वक्त सबसे ज्यादा यातायात रहता है, यह भी बताया था। राइट्स ने प्रशासन को अर्बन कांप्लेक्स में 2041 तक का यातायात प्रबंधन योजना का ब्लूप्रिंट सौंपा था। सोमवार की प्रस्तुति के दौरान कंपनी के नुमाइंदों ने बताया कि जो सर्वे उन्होंने पहले सौंपा था, वह तब के यातायात दबाव के अनुरूप था। अब परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। ट्रैफिक कई गुना बढ़ चुका है, लिहाजा उसी के अनुरूप प्लान तैयार करना पड़ेगा। मेट्रो के संबंध में राइट्स की ओर से पहले कहा गया था कि इसे पंचकूला तक बढ़ा दिया जाना चाहिए। इसके बाद राइट्स ने चंडीगढ़ सहित मोहाली व पंचकूला की ओर सर्वे किया था। इस सर्वे में सेक्टर-21 को मेट्रो का आखिरी स्टेशन बताया गया था। मनीमाजरा के हाउसिंग बोर्ड को चंडीगढ़ का आखिरी स्टॉप बताया गया था। मेट्रो प्रोजेक्ट में पांच मेट्रो कॉरिडोर तय किए गए थे।
चंडीगढ़ में मेट्रो का सफर
- वर्ष 2009 में मेट्रो परियोजना के लिए राइट्स को सलाहकार कंपनी के तौर पर नियुक्त किया गया
- रिपोर्ट सौंपने के बाद वर्ष 2010 में दिल्ली मेट्रो को डीपीआर का काम मिला
- वर्ष 2012 दिल्ली मेट्रो ने डीपीआर तैयार की
- वर्ष 2014 एमओयू साइन के लिए बैठक
- वर्ष 2016 में सांसद किरण खेर ने मेट्रो प्रोजेक्ट पर सवाल उठाया
- वर्ष 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे घाटे का सौदा बताकर प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया
- कुल खर्च : करीब 10 करोड़