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हरियाणा की अलग विधानसभा: यूटी प्रशासन 10 एकड़ जमीन देने पर राजी, शिअद-कांग्रेस ने किया विरोध

Fri, 14 Jul 2023 08:54 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 14 Jul 2023 08:54 AM IST
सार

विधानसभा भवन के लिए हरियाणा को 10 एकड़ जमीन आवंटित करने के चंडीगढ़ प्रशासन के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि पंजाब कांग्रेस राजधानी में पंजाब के विशेष अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ती रहेगी।

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Chandigarh administration decision give land to Haryana for separate assembly heated up politics in Punjab
भगवंत मान और मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हरियाणा को अपना अलग विधानसभा भवन तैयार करने के लिए जमीन देने के फैसले से पंजाब में सियासत गरमा गई है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस ने इसे चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा है।
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गौरतलब है कि यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ में हरियाणा को अपना अलग विधानसभा भवन बनाने के लिए 10 एकड़ जमीन देने का फैसला लिया है। इस संबंध में यूटी प्रशासन ने हरियाणा के साथ कागजी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। हरियाणा सरकार इसके बदले में यूटी प्रशासन को आईटी पार्क से सटी अपनी 12 एकड़ जमीन देगी।
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शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने वीरवार को एक बयान जारी कर हरियाणा को यूटी चंडीगढ़ में जमीन आवंटित करने के लिए केंद्र और पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना की है। शिअद अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पिछले साल 9 जुलाई को जयपुर में नार्थ जोन काउंसिल की बैठक में, हरियाणा को अलग विधानसभा भवन के लिए यूटी में जमीन देने का फैसला लिया गया था। बादल ने कहा,‘मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घोषणा का विरोध नहीं किया, जिसके कारण चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार गंभीर रूप से कमजोर हो गया है।’

बादल ने कहा कि जब हरियाणा ने पहली बार प्रस्ताव रखा था तब भी भगवंत मान ने इसका विरोध नहीं किया बल्कि केंद्र से पंजाब को भी जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संवेदनशील मुद्दे पर संदिग्ध भूमिका निभाई, जिससे केंद्र सरकार का हौसला बढ़ा और आखिरकार हरियाणा को अलग विधानसभा के निर्माण के लिए 10 एकड़ जमीन का औपचारिक आवंटन किया गया।

इस घटना को पंजाब के साथ घोर अन्याय करार देते हुए शिअद अध्यक्ष ने कहा, ‘‘चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है। इसे खरड़ तहसील के पंजाबी भाषी गांवों को उजाड़कर बनाया गया था। चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम,1966 और बाद में राजीव-लोंगोवाल समझौते के माध्यम से अनुमोदित किया गया और फिर संसद द्वारा भी अनुमोदित किया गया था। यह भी एक स्थापित तथ्य है कि जब भी किसी राज्य का विभाजन होता है तो राजधानी मूल राज्य में विकसित होती है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला संघवाद की भावना के खिलाफ है और पंजाब के प्रति भेदभावपूर्ण है। हरियाणा को विधानसभा के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन मांगने का कोई अधिकार नहीं है और उसे अपने राज्य में ही विधानसभा भवन का निर्माण करना चाहिए।


आप सरकार ने चंडीगढ़ पर पंजाब का दावा कमजोर कियाः बाजवा
विधानसभा भवन के लिए हरियाणा को 10 एकड़ जमीन आवंटित करने के चंडीगढ़ प्रशासन के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि पंजाब कांग्रेस राजधानी में पंजाब के विशेष अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ती रहेगी। बाजवा ने कहा कि सिर्फ केंद्र सरकार ही पंजाब की राजधानी और नदी जल पर सूबे के दावे को ध्वस्त नहीं कर रही बल्कि पंजाब की आप सरकार ने चंडीगढ़ पर पंजाब के दावे को कमजोर किया है।

हरियाणा विधानसभा के अलग भवन को लेकर बाजवा ने कहा कि यह यूटी प्रशासन का एक नाजायज फैसला है, जिसे पंजाबी कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। बाजवा ने कहा कि हमेशा की तरह, पंजाब कांग्रेस सूबे की राजधानी पर दावे की रक्षा के लिए कानून के तहत सभी कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि चंडीगढ़ केवल पंजाब का है और किसी भी अन्य राज्य या सरकार को राजधानी पर पंजाब के इकलौते दावे का उल्लंघन करने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए बाजवा ने कहा, ‘पिछले साल जुलाई में, इस तथ्य के बावजूद कि राजधानी केवल पंजाब की है, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक ट्वीट में अलग विधानसभा के लिए चंडीगढ़ में केंद्र सरकार से जमीन का एक टुकड़ा मांगा था। इस तरह केंद्र सरकार से जमीन का एक टुकड़ा मांगना राजधानी पर पंजाब के दावे को कमजोर कर रहा है।’

 
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