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सावधान! पीने लायक नहीं है चंडीगढ़ का पानी

Tue, 14 Apr 2015 07:52 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 14 Apr 2015 07:52 AM IST
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chandigarh 2 area water not able to dring, sample fail

चंडीगढ़ के कुछ इलाकों का पानी पीने के लायक नहीं हैं। इन इलाकों के पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। इनका पानी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

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राम दरबार, विकास नगर और मनीमाजरा के घरों में आ रहे पानी के कुछ सैंपल फेल हो गए हैं, जबकि सेक्टर 25 का पानी मटमैला पाया गया है।

पानी की जांच हाईड्रोजन सल्फाइडल (एचटूएस) बैक्टरियोलॉजिकल फील्ड टेस्ट वायल विधि से की गई है। यह टेस्ट संकेत देता है कि घरों में सप्लाई हो रहा पानी दूषित हो सकता है। इस विधि का इस्तेमाल पब्लिक हेल्थ से जुड़े रिसर्चर करते हैं।
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पिछले साल पीजीआई की ओर से भी एक रिपोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन को सौंपी गई थी, जिसमें बताया गया था कि मनीमाजरा, मौली जांगरा व सेक्टर 25 का पानी पीने लायक नहीं है।

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टाइफाइड, डायरिया फैलने का खतरा

chandigarh 2 area water not able to dring, sample fail

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि दूषित पानी से टाइफाइड, कालरा और डायरिया फैलने का खतरा रहता है। यदि पानी दूषित आ रहा है तो पानी को उबाल कर पीएं और इसकी शिकायत निगम को दें।

जीएमएसएच 16 से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि रोजाना चार से पांच केस डायरिया के आते हैं। हालांकि आउट ब्रेक की कोई खबर नहीं आई। चार महीने पहले राम दरबार में आउट ब्रेक हुआ था। उससे पहले विकास नगर और मौली जांगरा में हुआ था।

बैक्टीरिया पनपने का है यह समयः

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पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर रविंदर खैवाल ने बताया कि इस मौसम में बैक्टीरिया पनप सकते हैं। एक दिन गर्मी तो दूसरे दिन बारिश से जगह-जगह पानी भर रहा है। इससे मच्छरों की तादाद भी काफी बढ़ गई है। ऐसे में लोगों को और नगर निगम की टीम को सतर्क रहने की जरूरत है।

क्या कहते हैं एक्सपर्टः

पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर रविंदर खैवाल का कहना है कि बैक्टरियोलॉजिकल फील्ड टेस्ट वायल की रिपोर्ट को दो तरीके से जांचना जरूरी होता है। पहले तो हमें वाटर सप्लाई जांचनी चाहिए।

साथ में यह भी देखना चाहिए कि जहां से सैंपल लिए गए हैं, वहां के हालात कैसे थे। कई बार लोग घरों में पानी सुरक्षित नहीं रखते हैं। हालांकि फील्ड टेस्ट वायल की रिपोर्ट काफी हद तक ठीक रहती है।

विकास नगर व मौलीजांगरा में लोगों ने सीवरेज व पानी की पाइप लाइन के ऊपर कब्जा कर रखा है। कई ने पाइपलाइन से सीधे कनेक्शन कर रखे हैं। प्रेशर के दौरान मिट्टी व दूषित तत्व भी पाइप लाइन में चले जाते हैं। शिकायत मिलने पर जांच करवाएंगे।
- मुकेश आनंद, चीफ इंजीनियर नगर निगम

अमर उजाला ने खुद भरे थे रेंडम सैंपल

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शहर के कई इलाकों से शिकायत आ रही थी उनके घरों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। स्वास्थ्य विभाग से भी जानकारी मिली कि विकास नगर और चंडीगढ़ के अन्य पेरीफेरी इलाके के पानी के सैंपल फेल हो रहे हैं।

इसके बाद अमर उजाला ने मनीमाजरा के न्यू दर्शनी बाग, विकास नगर, राम दरबार, सेक्टर 25 सहित अन्य इलाकों के सैंपल लिए। मनीमाजरा, विकास नगर और राम दरबार के सैंपल फेल हो गए, जबकि अन्य इलाकों के सैंपल निगेटिव पाए गए।

वडोदरा से मंगवाई किट
बैक्टरियोलॉजिकल फील्ड टेस्ट वायल उत्तर भारत में कहीं नहीं मिलती। यह वायल सिर्फ गुजरात के वडोदरा स्थित एग्रीटेक लिमिटेड नामक कंपनी तैयार करती है। कंपनी से संपर्क कर इस किट को मंगवाया गया। इसमें पानी भरने के बाद इसे रख दिया जाता है। इसके परिणाम 24 से 48 घंटे के बीच में आते हैं।

यदि पानी काला हो जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यदि पानी आरेंज कलर का हो जाए तो इसकी गुणवत्ता ठीक है। पीजीआई, जीएमसीएच 32 व चंडीगढ़ प्रशासन के हेल्थ कर्मी भी इस किट का प्रयोग करते हैं।

निगम टीम रोज लेती है 30 सैंपलः
नगर निगम की ओर से बताया गया है कि निगम की टीम रोजाना 30 सैंपल लेती है। सैंपलों की जांच सेक्टर -39 स्थित प्रयोगशाला में होती है। जिन इलाकों के सैंपल फेल होते हैं, वहां पर टीम तुरंत जांच करती है।

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