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ट्राइसिटी में कोरोना से 11 की मौत, 1252 संक्रमित मिले
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चंडीगढ़। ट्राइसिटी में शनिवार को जहां 11 कोरोना संक्रमितों ने दम तोड़ दिया, वहीं 1252 नए मरीज मिले। मृतकों में से पांच मोहाली और तीन-तीन चंडीगढ़ और पंचकूला के रहने वाले थे। वहीं, नए संक्रमितों में से 321 चंडीगढ़, 605 मोहाली और 326 पंचकूला के हैं।
चंडीगढ़ में जिन तीन मरीजों की मौत की पुष्टि की गई, उनमें से सेक्टर-38 निवासी 74 वर्षीय वृद्ध ने पीजीआई में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह मधुमेह, उच्च रक्तचाप और सांस की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। उन्होंने कोरोना टीके की दोनों खुराक लगवा ली थीं। वहीं, सेक्टर-20 निवासी 76 वर्षीय वृद्धा ने भी इलाज के दौरान पीजीआई में दम तोड़ दिया। वह भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप व सांस की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थीं। उन्होंने टीके की एक ही खुराक लगवाई थी। इनके अलावा धनास निवासी 27 वर्षीय युवती को अचेत अवस्था में जीएमएसएच-16 लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्होंने भी टीके की एक डोज ही लगवाई थी।
स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे के दौरान 4363 लोगों की जांच की, जिनमें से 321 में संक्रमण की पुष्टि होने पर संक्रमण दर घटकर 7.36 प्रतिशत पर आ गई है। संक्रमित मिले मरीजों में पुरुषों की संख्या 164 व महिलाओं की संख्या 157 रही। अब शहर में सक्रिय मरीजों की संख्या 3819 रह गई है। वहीं, सात दिन की अवधि पूरी हो जाने पर 1146 मरीजों को छुट्टी दी गई। बता दें कि शहर में कोरोना से अब तक 1115 मरीजों की मौत हो चुकी है।
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राहत : संक्रमित हो रहे मरीजों की संख्या से तीन गुना ज्यादा हो रहे ठीक
लगातार हो रही मौतों के बीच राहत की बात यह है कि प्रतिदिन मिल रहे संक्रमित मरीजों से तीन गुना ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे सक्रिय मरीजों की संख्या चंद दिनों में घटकर 3819 पर आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर के दौरान 95 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में मामूली लक्षण होने के कारण उन्हें 7 दिन के बाद छुट्टी दे दी जा रही है, लेकिन इन सात दिनों के दौरान आइसोलेशन में रहते हुए अगर लापरवाही की गई तो स्थिति गंभीर हो सकती है। जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि आइसोलेशन में रहने के दौरान अगर अंतिम तीन दिनों में बुखार नहीं आया तो 7 दिन की अवधि के बाद मरीज को ठीक मान लिया जाता है।
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चंडीगढ़ में जिन तीन मरीजों की मौत की पुष्टि की गई, उनमें से सेक्टर-38 निवासी 74 वर्षीय वृद्ध ने पीजीआई में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह मधुमेह, उच्च रक्तचाप और सांस की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। उन्होंने कोरोना टीके की दोनों खुराक लगवा ली थीं। वहीं, सेक्टर-20 निवासी 76 वर्षीय वृद्धा ने भी इलाज के दौरान पीजीआई में दम तोड़ दिया। वह भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप व सांस की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थीं। उन्होंने टीके की एक ही खुराक लगवाई थी। इनके अलावा धनास निवासी 27 वर्षीय युवती को अचेत अवस्था में जीएमएसएच-16 लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्होंने भी टीके की एक डोज ही लगवाई थी।
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स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे के दौरान 4363 लोगों की जांच की, जिनमें से 321 में संक्रमण की पुष्टि होने पर संक्रमण दर घटकर 7.36 प्रतिशत पर आ गई है। संक्रमित मिले मरीजों में पुरुषों की संख्या 164 व महिलाओं की संख्या 157 रही। अब शहर में सक्रिय मरीजों की संख्या 3819 रह गई है। वहीं, सात दिन की अवधि पूरी हो जाने पर 1146 मरीजों को छुट्टी दी गई। बता दें कि शहर में कोरोना से अब तक 1115 मरीजों की मौत हो चुकी है।
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राहत : संक्रमित हो रहे मरीजों की संख्या से तीन गुना ज्यादा हो रहे ठीक
लगातार हो रही मौतों के बीच राहत की बात यह है कि प्रतिदिन मिल रहे संक्रमित मरीजों से तीन गुना ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे सक्रिय मरीजों की संख्या चंद दिनों में घटकर 3819 पर आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर के दौरान 95 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में मामूली लक्षण होने के कारण उन्हें 7 दिन के बाद छुट्टी दे दी जा रही है, लेकिन इन सात दिनों के दौरान आइसोलेशन में रहते हुए अगर लापरवाही की गई तो स्थिति गंभीर हो सकती है। जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि आइसोलेशन में रहने के दौरान अगर अंतिम तीन दिनों में बुखार नहीं आया तो 7 दिन की अवधि के बाद मरीज को ठीक मान लिया जाता है।