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राजकीय सम्मान के साथ चंडीगढ़ के 'रॉक लेजेंड' नेकचंद की विदाई

Sun, 14 Jun 2015 08:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 14 Jun 2015 08:46 AM IST
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chandigarg rock garden creator nekchand funerla with guard of honour

रॉक गार्डन निर्माता पद्मश्री नेक चंद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बाऊजी (नेक चंद) के अंतिम दर्शन के लिए आम आदमी से लेकर कई जानी मानी हस्तियां पहुंचीं।

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90 वर्षीय नेक चंद के शव को सुबह 8 बजे पीजीआई से उनके सेक्टर-27 स्थित घर पर लाया गया। फिर शव को विशेष वाहन से रॉक गार्डन ले जाया गया। रॉक गार्डन में आम जनता के दर्शनों के लिए शव को सुबह 10 से शाम 4 बजे तक रखा गया।
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 दिनभर नेक चंद को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। अंतिम दर्शन के लिए रॉक गार्डन में जब शव रखा गया तो अचानक बादल घिर आए और बारिश हुई। ऐसा लगा कि मानो ऊपर वाले के भी आंसू निकल पड़े हों।

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कंधों पर ही सही, आखिरी दिन भी दफ्तर पहुंचे नेक चंद

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दरअसल नेक चंद के शव को अंतिम दर्शन के लिए रॉक गार्डन के फेज-1 में रखवाया गया था। अचानक आंधी चलने लगी। बारिश शुरू हो गई। टेंट में पानी टपकने लगा तो शव को उनके दफ्तर के बाहर बरामदे में ही रखवाया गया।

करीबियों ने कहा कि देखो नेक चंद अपने बचे काम निपटाने दफ्तर पहुंच गए। दफ्तर के बाहर बरामदे में जहां अक्सर वह बैठा करते थे, वहीं शाम 4 बजे तक शव को रखा गया।

दस दिन पहले कह दिया था चला जाऊंगा
अस्पताल में भर्ती होने से दस दिन पहले ही नेक चंद ने रॉक गार्डन के प्रवेश द्वार पर खड़े होकर कहा था कि यह मेरी स्टेट है और मुझे एक दिन इसे छोड़कर जाना है। खालसा कालेज की प्रोफेसर एम ढिल्लो ने बताया कि दस दिन पहले वे छात्रों के साथ रॉक गार्डन आई थीं। वे सब तो अंदर आ गए मगर नेक चंद बाहर ही खड़े होकर रॉक गार्डन को निहार रहे थे।

इस पर ढिल्लो ने जब कहा कि बाऊ जी अंदर आ जाओ तो उन्होंने उक्त बात कही। एनएसएस के छात्र सफाई अभियान के तहत रॉक गार्डन आते हैं और नेक चंद ही उन्हें पिलर और अन्य सफाई की जिम्मेदारी सौंपते थे। एनएसएस के छात्र अर्जुन गर्ग ने बताया कि वह खुद ही सफाई संबंधी निर्देश और सावधानियां बताते थे।

रोटी हक दी खांदे, फिर बूट पॉलसां करदे
नेक चंद के सहकर्मी रामपाल शर्मा ने बताया कि नेक चंद की एक आदत थी कि उनके थैले में हमेशा ही पॉलिश और ब्रश पड़ा रहता था। नेक चंद खाना खाने के बाद अपने बूट पॉलिश करते थे। शर्मा ने बताया कि वह अपने साथ काम करने वालों को भी अपने बूट पॉलिश करने के लिए कहते थे।

जो भी नेक चंद के पास आता, उसे गुड़-चने खिलाते थे

chandigarg rock garden creator nekchand funerla with guard of honour

नेक चंद चालीस साल से भी अधिक समय से उनके पारिवारिक मित्र थे। यह कहना है रिटायर्ड जस्टिस अजीत सिंह बैंस और उनकी पत्नी रछपाल कौर का। उन्होंने कहा कि नेक चंद बहुत ही नेक और मिलनसार इंसान थे। रछपाल कौर कहती हैं कि उनका भाई-बहन का रिश्ता था।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बनने के बाद भी बैंस साहब रॉक गार्डन के छोटे से कमरे में नेकचंद के साथ घंटों बैठते थे। नेकचंद फार्म हाउस पर आते तो छल्ली खाए और लस्सी पिए बिना नहीं जाते। 2004 में लाहौर में वर्ल्ड पंजाबी कांफ्रेंस में वे 15 दिन तो लगातार साथ रहे। 15 फरवरी, 2015 को उनके घर पर हम सभी मिले थे। कई पत्थरों से बनाई कलाकृतियां उन्होंने दी।

15 मार्च को उन्होंने पत्थर से बनाई बत्तख भिजवाई थी। नेकचंद का कोई मुकाबला नहीं है। वे हमेशा चने और गुड़ साथ रखते थे। जो भी आता उन्हें खिलाते थे। रॉक गार्डन का नाम नेकचंद गार्डन होना चाहिए। नेकचंद ने चंडीगढ़ को पूरी दुनिया में नाम दिया। अब हम सब को नेकचंद को देने की बारी है।

नेक चंद की तपस्या है रॉक गार्डन : सोलंकी

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रॉक गार्डन नेक चंद की तपस्या का परिणाम है। यहां उनका व्यक्तित्व झलकता है। बीमारी के बावजूद वह अपना काम करते रहे और किसी को एहसास भी नहीं होने दिया। यह अपने आपमें उनको दूसरों से अलग करती है।
-प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी, यूटी एडमिनिस्ट्रेटर एवं गवर्नर पंजाब-हरियाणा

एयरपोर्ट का नाम नेक चंद पर हो तो गर्व: खट्टर
नेक चंद अनूठी प्रतिभा के धनी थे। उन्हें वर्क मैनेजमेंट के आइकन की संज्ञा दी जा सकती है। उनके निधन से अपूर्णीय क्षति हुई है। नेक चंद की कलाकृतियों से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। अगर उनका नाम चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ जुड़ता है तो यह गर्व की बात है। मैं अपनी और हरियाणा की जनती की तरफ से उनके चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
- मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री, हरियाणा

देश ने एक महान आर्टिस्ट को खो दिया है। उनकी याद दिलों में हमेशा बनी रहेगी। नई चीजों से कुछ बनाना बड़ा आसान होता है, लेकिन पुरानी चीजों से ऐसी अनूठी चीजें बनाना अचंभित करता है। युवाओं के लिए वह प्रेरणास्त्रोत हैं।
- पूनम शर्मा, मेयर, चंडीगढ़।

रॉक गार्डन के नाम के पहले नेक चंद का नाम जोड़ा जाए और उन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित भी किया जाना चाहिए। क्योंकि उनके जैसा क्रिएटर चंडीगढ़ को दूसरा नहीं मिलेगा।
- सविता भट्टी

नेक चंद का वर्क पूरे विश्व में पहचान बना चुका है। युवाओं केलिए रॉक गार्डन प्रेरणा का स्त्रोत है। वेस्ट से वेल्थ बनाया जाने वाला एक इंस्टीट्यूट चंडीगढ़ में होना चाहिए। सरकार से इसके लिए सिफारिश भी करेंगे।
- संजय टंडन, प्रदेशाध्यक्ष, बीजेपी, चंडीगढ़

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