फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   chandi mandir chandigarh condition report

'जिससे मिला चंडीगढ़ को नाम, वही हो गया गुमनाम', दर्द बयां करती रिपोर्ट पढ़िए

Thu, 11 May 2017 03:28 PM IST
गोविंद परवाना/अमर उजाला, चंडीगढ़
गोविंद परवाना/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 May 2017 03:28 PM IST
विज्ञापन
chandi mandir chandigarh condition report
माता चंडी देवी
जिस माता चंडी देवी के नाम पर चंडीगढ़ को नाम मिला क्या आप जानते हैं कि उस चंडीमंदिर की हालत क्या है? इंटरनेट के इस जमाने में इस मंदिर की तस्वीरें और इतिहास तो आप देख और पढ़ सकते हैं कि मंदिर किस तरह से वीरान और उजाड़ है। हम आपको बताते हैं कि इस चंडीमंदिर की हकीकत क्या है। चंडीगढ़ को बसे 51 साल हो गए पर इस शहर को नाम देने वाले इस मंदिर की ओर न तो सिटी प्रशासन का ध्यान है न ही हरियाणा सरकार का।
विज्ञापन


मंदिर अब हरियाणा का हिस्सा है। यह मंदिर पुराना पंचकूला से पिंजौर जाने वाली सड़क पर है, लेकिन इस सड़क से मंदिर को जाने वाली सड़क ठीक नहीं है। मंदिर सड़क के साथ रेलवे लाइन के दूसरी ओर है। इसलिए रेलवे फाटक को पार करके यहां जाना पड़ता है। यहां के लोग कहते हैं कि मंदिर के गेट को रेलवे फाटक से सीधे जोड़ना चाहिए था।
विज्ञापन


बंसीलाल ने बनवाई थी सड़क
काफी समय तक चंडीमंदिर की सुध किसी ने नहीं ली। पहली बार पूर्व सीएम बंसीलाल के ध्यान में मंदिर आया और उनके निर्देश पर अफसरों ने हाईवे से मंदिर तक सड़क का निर्माण कराया। पूर्व गवर्नर बीएन चक्रवर्ती के निर्देश के बाद मंदिर को बिजली का कनेक्शन दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद ही श्रद्धालुओं की मंदिर के दर्शन के प्रति रुचि बढ़ी। मंदिर की प्रबंधक माता निर्मला देवी ने बताया कि उन्होंने इस मंदिर का पुनरुद्धार करवाया। उन्होंने बताया कि पहले मंदिर के बाहर पथरीली जगह और तालाब था। धीरे-धीरे उन्होंने मंदिर को सजाया संवारा। इसके लिए न तो उन्होंने किसी से मदद मांगी और न ही किसी ने कोई मदद की।

मंदिर का इतिहास

chandi mandir chandigarh condition report
माता चंडी देवी
मंदिर की प्रबंधक माता निर्मला देवी ने बताया कि चंडीमाता भगवती का यह स्थान प्राचीन काल 5000 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि एक साधु जंगल में तप किया करते थे। यहां उनको एक मूर्ति मिली जो मां दुर्गा की थी, वह महिषासुर का वध करके उसके ऊपर खड़ी थीं। मूर्ति देखकर साधु ने मां भगवती की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। उन्होंने घास, मिट्टी और पत्थर से यहां चंडी माता का एक छोटा सा मंदिर बना दिया।

इसके बाद आसपास के लोग मंदिर में माथा टेकने लगे। उनकी मनोकामना पूरी होने लगी। कहा जाता है कि 12 वर्ष के बनवास के दौरान पांडव घूमते हुए यहां आए थे और चंडी माता का मंदिर देखा तो अर्जुन ने पेड़ की शाखा पर बैठकर मां की तपस्या की। कहा जाता है कि उनकी तपस्या से खुश होकर माता चंडी ने उनको तेजस्वी तलवार व जीत का वरदान दिया था। यहीं से पांडव कुरुक्षेत्र गए और महाभारत के युद्ध में उनकी जीत हुई।

माता निर्मला देवी ने बताया कि पूर्वज साधु महात्माओं की अब 62वीं पीढ़ी चल रही है। इस समय उनकी बेटी महंत बाबा राजेश्वरी जी गद्दी पर विराजमान है। यह जगह पहले मनीमाजरा रियासत में आती थी। 15वीं पीढ़ी के मनीमाजरा के राजा भगवान सिंह ने मंदिर के ऊपर पहाड़ी पर एक पत्थर का किला बनवा दिया, जिसे गढ़ कहा जाना लगा। इसके साथ ऊपर ही एक चंडी गांव बस गया।

माता निर्मला देवी ने बताया कि  उनके पिता सूरत गिरि जी महाराज के मंदिर की पूजा अर्चना के दौरान 1953 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पंजाब के गवर्नर सीपीएन सिंह मंदिर का दर्शन करने आए थे। निर्मला देवी ने बताया कि मंदिर का इतिहास और महत्व जानने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि चंडी माता के नाम पर शहर बसाया जाएगा। उन्होंने चंडीमंदिर के नाम पर स्थानीय थाना, रेलवे स्टेशन और गांव का नाम रख दिया। इसके बाद चंडी माता के नाम पर चंडीगढ़ शहर बसाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed