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Hindi News ›   Chandigarh ›   Challenge to bring Congress to power divided into groups in front of Shakti Singh Gohil in Haryana

Haryana: शक्ति सिंह गोहिल के सामने गुटों में बंटी कांग्रेस को सत्ता में लाना चुनौती, जल्द बनाना होगा संगठन

Wed, 07 Dec 2022 01:39 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 07 Dec 2022 01:39 AM IST
सार

हरियाणा कांग्रेस में पांच से छह धड़े हैं। प्रदेश प्रभारी का जिम्मा कमलनाथ, सुशील कुमार शिंदे, गुलाम नबी आजाद, शकील अहमद और विवेक बंसल सरीखे दिग्गज नेताओं के पास बीते सालों में रहा लेकिन वह प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के मतभेद दूर नहीं कर पाए। कांग्रेस में गुटबाजी कम होने के बजाय बढ़ी है। 

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Challenge to bring Congress to power divided into groups in front of Shakti Singh Gohil in Haryana
शक्ति सिंह गोहिल - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल को नई जिम्मेदारी कठिन दौर में मिली है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती गुटों में बंटे पार्टी नेताओं को एकजुट कर 2024 में सरकार बनाने की रहेगी। सभी नेताओं के एकजुट हुए बिना राह आसान नहीं है। आठ साल से अधिक समय से प्रदेश में कांग्रेस का संगठन नहीं है और पार्टी सत्ता से दूर है। 

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डेलिगेट नियुक्त हो चुके हैं लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष अभी तक नहीं बन पाए हैं। गोहिल को धरातल तक पकड़ बनाने के लिए जल्द संगठन खड़ा करना होगा। संगठन के गठन में भी बड़ी बाधा गुटों में बंटे नेता ही हैं। अपने अधिक से अधिक जिलाध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, पदाधिकारी और ब्लॉक अध्यक्ष बनाने को लेकर बड़े नेताओं में जंग छिड़ी हुई है। आलाकमान सभी को संतुष्ट कर ही यह नियुक्तियां करना चाहता है, इसलिए सूचियां जारी करने में देरी हो रही है।
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हरियाणा कांग्रेस में पांच से छह धड़े हैं। प्रदेश प्रभारी का जिम्मा कमलनाथ, सुशील कुमार शिंदे, गुलाम नबी आजाद, शकील अहमद और विवेक बंसल सरीखे दिग्गज नेताओं के पास बीते सालों में रहा लेकिन वह प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के मतभेद दूर नहीं कर पाए। कांग्रेस में गुटबाजी कम होने के बजाय बढ़ी है। 

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नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गुट का छत्तीसगढ़ की नई प्रभारी कुमारी सैलजा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी, कैप्टन अजय यादव, रणदीप सुरजेवाला और कुलदीप बिश्नोई से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। कुलदीप तो अब भाजपाई हो चुके हैं, अन्य नेताओं के आपसी मतभेद अब भी बरकरार हैं। तंवर और सैलजा के अध्यक्ष रहते प्रदेश में विरोधी खेमे ने संगठन में नियुक्तियां ही नहीं होने दी। गोहिल तभी पार्टी को सत्ता में ला सकते है, जब वे सभी नेताओं को एक साथ चला सकें। 

भारत जोड़ा यात्रा गोहिल की पहली अग्निपरीक्षा
21 दिसंबर से हरियाणा में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा शुरू हो रही है। पहला चरण 23 दिसंबर तक चलेगा। तीन दिन चलने वाली यात्रा में प्रदेश कांग्रेस के साथ प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के लिए भी अग्निपरीक्षा है। यात्रा को सफल बनाने के लिए पुख्ता रणनीति उन्हें ही तैयार करनी होगी। अधिक से अधिक भीड़ जुटाकर लोगों में सदभावना का संदेश देने की कोशिश होगी, साथ ही 2024 के लिए चुनावी शंखनाद होगा। दूसरा चरण भी यात्रा का होना है, जिसके रूट प्लान को जल्दी अंतिम रूप दिया जाएगा। पहले चरण की यात्रा के लिए नेताओं को बुधवार को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चंडीगढ़ में इसके लिए बैठक बुलाई है।

प्रदेशाध्यक्ष का पद छोड़ने का मिला सैलजा को इनाम
पार्टी हाईकमान ने कुमारी सैलजा को प्रदेशाध्यक्ष पद छोड़ने का इनाम दिया है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के फ्री हैंड के लिए अड़ने पर सैलजा ने सोनिया गांधी के कहने पर तुरंत अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पार्टी ने सैलजा को सीडब्ल्यूसी सदस्य बनाया, उसके बाद स्टीयरिंग कमेटी में शामिल किया। अब छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर हाईकमान ने सैलजा का कद बढ़ाया है।

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