फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Centuries have passed but the stain of casteism has not been washed away

Chandigarh News: सदियां बीत गईं पर नहीं धुला जातिवाद का दाग

Tue, 19 Dec 2023 02:02 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Dec 2023 02:02 AM IST
विज्ञापन
Centuries have passed but the stain of casteism has not been washed away
चंडीगढ़। जो हाथ राजस्थान और असम में कांप रहे थे वही हाथ सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में खाने के लिए बढ़े। नाटक के अंत में कलाकार लड्डू लेकर आते हैं और कहते हैं- हमारे हाथ से खाइए। हम और आप एक ही हैं। दर्शक लड्डूओं को हाथों हाथ ले लेते हैं। पहले जब यह नाटक राजस्थान और असम में हुआ था तब कलाकार दर्शकों के बीच गए थे लड्डू लेकर तो दर्शकों के हाथ कांपे थे, लेकिन आज नहीं। जी हां बात हो रही है नाटक द केज की। नाटक में दिखाया गया कि हमारा समाज अभी भी जातिगत भेदभाव से दूषित है।
विज्ञापन

टीएफटी थिएटर फेस्टिवल के तहत इस नाटक का मंचन हुआ। नाटक की शुरुआत पलायन से होती है। जब लोग घर छोड़कर कमाने जाते हैं तो वापस लौटने में दिक्कत होती है। कई तो लौट भी नहीं पाते। नाटक में अनुसूचित जाति की उपेक्षा की कहानी है। एक शादी में एक व्यक्ति जूता पहनकर जाता है तो उच्च वर्ग के लोग उसे पीटते हैं कि उसके पैरों में जूते क्यों हैं। मंदिरों में जो खाना दिया जाता है वहां पर भी उपेक्षा की जाती है। कई मंदिरों में एससी और एसटी का प्रवेश वर्जित है। छोटे बच्चों के साथ छेड़छाड़ को भी दिखाया गया। नाटक में संदेश है कि हम सभी 21वीं शताब्दी में आ गए हैं। डिजिटल इंडिया में हैं। लेकिन इस कुरीति के पिंजरे को नहीं तोड़ पा रहे हैं।
विज्ञापन

नाटक द केज का लेखन दीपक सैनी ने किया है, जबकि नाटक को देबिना रक्षित ने निर्देशित किया है। यह नाटक रोज की जिंदगी की कहानियों के इर्द गिर्द घूमता है। निर्देशक देबिना रक्षित ने बताया कि नाटक के दौरान लाइव म्यूजिक की प्रस्तुति हुई। उन्होंने बताया कि हिंदी, पंजाबी और बंगाली लोकगीत पेश किए गए। नाटक में अनुसूचित जाति पर कहानियां और उनके अंधेरे पक्षों के बारे में दिखाया गया कि किस प्रकार उनका सामाजिक शोषण होता है। इसमें अच्छे कपड़े पहनना और ऊंची जातियों का दबाव सहना दिखाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

विशिष्ट जाति और समुदाय में पैदा हुए लोग जिनके साथ गलत व्यवहार किया जाता है वे अपना पूरा जीवन इसी दर्द और पीड़ा के साथ जीते हैं। इन कहानियों को मंच पर रचते समय इस विचार को सामने लाने का प्रयास किया जाता है कि कैसे जाति, रंग और जन्म स्थान के कारण कोई अपनी पहचान या अपनों को खो देता है। कैसे गरीबी, जातिवाद या साम्यवाद बाल शोषण का कारण बनता है। सिर्फ काले होने या विशिष्ट होने के कारण लोगों को कैसे आंका जा रहा है। नाटक में गंभीर प्रश्नों के साथ हास्य परिहास भी रहा। देबिना कहती हैं कि 21वीं सदी में भी भेदभाव है। गलत सोच को पिंजरे से बाहर लाने की जरूरत है। नाटक में पुष्पक, देवेंद्र, आकाश राणा, दीपक सैनी, मालविका और सूरज ने भूमिका निभाई। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed