Punjab News: केंद्र ने चार महीने पहले ही अमृतपाल के बारे में किया था अलर्ट, मगर नहीं उठाया गया कोई कदम
पिछले साल 29 सितंबर को जरनैल सिंह भिंडरावाला के गांव रोडे में जब अमृतपाल ने वारिस पंजाब दे संगठन का कार्यभार संभालने के साथ ही वहां आयोजित समारोह में खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला का अनुयायी बताते हुए सिख युवाओं को अगली जंग के लिए तैयार होने का आह्वान किया था। इसके तुरंत बाद खुफिया एजेंसियों ने अमृतपाल की गतिविधियों और उनसे जुड़ने वाले लोगों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।
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खालिस्तान समर्थक और 'वारिस पंजाब दे' संगठन के मुखिया अमृतपाल सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश खुफिया एजेंसियों ने पिछले साल अक्तूबर में ही कर दी थी। पंजाब सरकार और पुलिस को भेजे इनपुट में केंद्रीय एजेंसियों ने अमृतपाल की दुबई में की गई तैयारियों और पंजाब में चलाए जाने वाले अभियान की पूरी जानकारी देते हुए सिफारिश की थी कि अमृतपाल की गतिविधियों पर तुरंत अंकुश लगाया जाए लेकिन राज्य सरकार ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया।
अजनाला के ताजा घटनाक्रम को डीजीपी गौरव यादव ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ढाल बनाकर किया गया कायरतापूर्ण हमला करार देते हुए पुलिस का बचाव किया है लेकिन इस घटना से उभरे हालात पर पूर्व डीजीपी एके पांडे का कहना है कि सीमावर्ती राज्य में अजनाला जैसी वारदात प्रदेश के खराब भविष्य की तरफ इशारा कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस थाने पर हिंसक हमला स्पष्ट कर रहा है कि कानून-व्यवस्था और अमन-शांति बनाए रखने के लिए हमलावरों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
केंद्र सरकार द्वारा घटनाक्रम के बारे में राज्य सरकार से मांगी गई रिपोर्ट के मुद्दे पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि केंद्र सरकार को अधिकार है कि वह राज्य से कानून-व्यवस्था के बारे में जानकारी हासिल करे। उन्होंने कहा कि अजनाला कांड में राज्य सरकार और पुलिस की पूरी जिम्मेदारी बनती है। इस बात की जांच होनी चाहिए कि अमृतपाल कौन है और उसे कौन-कौन लोग फंडिंग कर रहे हैं, कौन-कौन से लोग अमृतपाल के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। पाकिस्तान में कौन से समर्थक बैठे हैं, अमृतपाल से पैसा किन रास्तों से पहुंच रहा है। पूर्व डीजीपी ने कहा कि अजनाला कांड राज्य पुलिस के खुफिया तंत्र की विफलता का नतीजा है।
गौरतलब है कि पिछले साल 29 सितंबर को जरनैल सिंह भिंडरावाला के गांव रोडे में जब अमृतपाल ने वारिस पंजाब दे संगठन का कार्यभार संभालने के साथ ही वहां आयोजित समारोह में खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला का अनुयायी बताते हुए सिख युवाओं को अगली जंग के लिए तैयार होने का आह्वान किया था। इसके तुरंत बाद खुफिया एजेंसियों ने अमृतपाल की गतिविधियों और उनसे जुड़ने वाले लोगों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इसकी पुष्टि करते हुए डीजीपी यादव और अन्य अधिकारियों ने भी केंद्रीय एजेंसियों से इनपुट मिलने की बात कही थी। बावजूद इसके पुलिस और राज्य सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
डीजीपी यादव ने गृह मंत्री के समक्ष उठाया था मुद्दा
नई दिल्ली में 22 जनवरी को आयोजित सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों के अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन में पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने 'खालिस्तान उग्रवाद- पंजाब में संचार और रसद नेटवर्क' विषय पर प्रस्तुति देते हुए अमृतपाल सिंह द्वारा चलाई जा रही खालिस्तान संबंधी मुहिम का उल्लेख किया था। इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद थे लेकिन डीजीपी यादव द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका एक कारण यह भी रहा कि दिसंबर माह के दौरान पंजाब में नशा तस्करी और किसानों के विभिन्न मोर्चे अहम मुद्दे बने रहे। 'बंदी सिंहों' की रिहाई का मोर्चा शुरु होने के बाद केंद्र सरकार का ध्यान भी इस ओर गया और मोहाली-चंडीगढ़ बैरियर पर मोर्चा समर्थकों के पुलिस पर हमले के बाद केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। अब केंद्र ने अजनाला कांड की रिपोर्ट मांगी है।