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Chandigarh News: राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की भर्ती में भेदभाव से केंद्र सरकार का इन्कार, याचिका खारिज

Wed, 12 Jun 2024 05:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2024 05:25 AM IST
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Central government denies discrimination in recruitment of Presidents bodyguards
-भर्ती प्रक्रिया में केवल कुछ जाति विशेष के लोगों को शामिल करने का याचिका में था आरोप
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-याची को बेहतर तथ्यों के साथ दोबारा याचिका दाखिल करने की हाईकोर्ट ने दी छूट

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए मौजूद प्रेसिडेंट बाॅडीगार्ड में केवल कुछ जातियों को स्थान देने को भेदभाव बताते हुए इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार ने आरोपों से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर बार-बार जवाब का मौका देने के बावजूद याची का जवाब न आने पर याचिका को रद्द कर दिया है। हालांकि याची को छूट दी है कि वह बेहतर तथ्यों के साथ दोबारा याचिका दाखिल कर सकता है।
गुरुग्राम निवासी मनीष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि हमीरपुर आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस के निदेशक ने 12 अगस्त 2017 में एक विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड पद हेतु आवेदन मांगे गए थे। अन्य योग्यताओं के साथ यह भी शर्त थी कि इस नियुक्ति में सिर्फ जाट, जाट सिख और राजपूत जाति के आवेदक ही शामिल हो सकते हैं। याची ने कहा कि देश में इस प्रकार किसी भर्ती को किसी जाति विशेष के लिए आरक्षित नहींं किया जा सकता और यह सीधे तौर पर संविधानिक अधिकारों का हनन है। इस तरह से नियुक्ति में किसी खास जाति के आवेदकों को वरीयता देना संविधान के अनुच्छेद-14 , 15 और 16 के खिलाफ है क्योंकि देश के सभी नागरिकों को सामान अवसर दिए जाने का संविधान में प्रावधान है। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि इन नियुक्तियों में कोई भेदभाव नहीं होता है, याची पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं। 14 राज्यों के और 16 जातियों (एससी/एसटी सहित) के नागरिक राष्ट्रपति के अंगरक्षक के रूप में सेवा कर रहे हैं और पहले भी सेवा कर चुके हैं। भारतीय सेना में सैनिकों की भर्ती सेना नियम, 1954 के प्रावधान द्वारा शासित होती है ।
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केंद्र ने कहा कि याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की भर्ती में बार-बार जाति, धर्म और क्षेत्र आधारित भर्ती का उल्लेख किया है जो गलत है। रेजिमेंटों का नाम भी कुछ वर्गों/जातियों/क्षेत्रों के नाम पर रखा जाता है व राष्ट्रपति के अंगरक्षक 150 सैनिकों वाली एक छोटी इकाई है, जिसे राष्ट्रपति भवन में प्रोटोकॉल के अनुसार समारोह करने का काम सौंपा जाता है। भर्ती के चरण में कोई वर्ग आधारित भेदभाव नहीं था और प्रत्येक जाति किसी भी रेजिमेंट में शामिल हो सकती है और केवल कठोर चयन के बाद ही कर्मियों को शामिल किया जाता है। केंद्र सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट ने याची पक्ष से जवाब मांगा तो बार-बार मौके के बावजूद जवाब नहीं मिला। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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