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चंडीगढ़ः कॉट्रैक्ट लेक्चरर्स को कैट का बड़ा झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Oct 2015 12:38 PM IST
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चंडीगढ़ के विभिन्न कॉलेजों में कई साल से बतौर कान्ट्रैक्ट काम कर रहे फैकल्टी मैंबर्स को कैट के ताजा फैसले ने झटका दिया है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि कान्ट्रैक्ट फैकल्टी रेगुलर नहीं होंगे।
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यह फैसला ट्रिब्यूनल ने चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीसीईटी) में बतौर कॉन्ट्रैक्ट कार्यरत फैकल्टी समेत 30 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनाया है। कैट ने फैसले में कहा है कि याचिकाकर्ता पारुल अग्रवाल व अन्य तय नियम और शर्तों के आधार पर नियुक्त हुए थे।
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याचिकाकर्ताओं को यूपीएससी के जरिए नियमित भर्ती के रूल को फॉलो करना होगा। याची इस बात का दावा नहीं कर सकते कि उन्हें संविदा पर हमेशा के लिए नियुक्त किया जाए या उन्हें नियमित कर्मियों की तरह माना जाए। जबकि, संबंधित पद के लिए नियम भी तय नहीं हैं। ऐसे में उनकी याचिका मान्य नहीं है। संबंधित केस मोहाली निवासी पारुल अग्रवाल समेत कुल 30 याचियों ने कैट में दायर की थी।
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इसमें केंद्र सरकार, यूपीएससी, यूटी प्रशासन, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीसीईटी) आदि को प्रतिवादी बनाया गया था। ट्रिब्यूनल के ताजा फैसले से उक्त याचिकाकर्ताओं के अलावा शहर के अन्य सभी कॉलेजों में कई साल से कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात फैकल्टी मेंबर्स को झटका लगा है।
कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती 250 असिस्टेंट प्रोफेसर्स को झटका
कैट के फैसले से शहर को सरकारी कॉलेजों में करीब 10 साल से कॉन्ट्रैक्ट पर पढ़ा रहे करीब 250 असिस्टेंट प्रोफेसर के रेगुलर होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। उधर, यूटी के शिक्षा विभाग में भी 100 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट शिक्षक 15 से अधिक साल से पढ़ा रहे हैं।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर कॉन्ट्रैक्ट फैकल्टी के लिए अब हर साल इंटरव्यू सिस्टम को बंद कर दिया गया है। सरकारी कालेजों में कॉन्टैक्ट असिस्टेंट प्रोफेसर को करीब 45 हजार और सरकारी स्कूल के शिक्षकों को 40 हजार हर महीने वेतन दिया जाता है।
1200 एसएसए शिक्षकों का मामला भी लटका
शहर के सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत कार्यरत करीब 1200 शिक्षक काफी लंबे समय से रेगुलर किए जाने की मांग कर रहे हैं। यूटी के शिक्षा विभाग ने एसएसए शिक्षकों का मामला केंद्र सरकार के पास भी भेजा, लेकिन अभी तक मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कैट के नए फैसले से एसएसए शिक्षकों को रेगुलर करने का मामला भी लटक सकता है।
यूपीएससी की सिफारिशों के बिना नहीं कर सकते पक्का
चंडीगढ़ प्रशासन और सीसीईटी ने कैट में दायर जवाब में कहा कि पहले कैट में दायर दो याचिकाओं पर ट्रिब्यूनल के जुलाई 2014 के फै सले के बाद उन्होंने याचिकाकर्ताओं को पक्का करने पर विचार किया था। लेकिन, इसे फरवरी 2014 को निरस्त कर दिया गया। क्योंकि संबंधित पद ग्रुप ‘ए’ का था और इस पर यूपीएससी की सिफारिशों के बिना इन्हें पक्का नहीं किया जा सकता।
जवाब में कहा गया था कि याचियों को केवल 31 दिसंबर 2011 तक के लिए संविदा पर रखा गया था और उनके कॉन्ट्रैक्ट में ब्रेक्स भी थे। साथ ही याचिकाकर्ताओं को जब तक नियमित भर्तियां नहीं होती तब तक के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर नियमित अवधि के लिए रखा गया था।