फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Celebration in Chandigarh after Neeraj Chopra Wins Gold in Tokyo Olympic

चंडीगढ़ में भी जश्न: नीरज चोपड़ा के इतिहास रचते ही डीएवी कॉलेज व ताऊ देवीलाल स्टेडियम में बजा ढोल, बंटीं मिठाइयां

Sun, 08 Aug 2021 09:34 AM IST
निवेदिता वर्मा संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 08 Aug 2021 09:34 AM IST
सार

नीरज चोपड़ा शुरू से ही जेवेलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने के प्रबल दावेदारों में से एक थे। फाइनल की तैयारियां भी उसी तरह से थीं। नीरज चोपड़ा ने जेवेलिन थ्रो सीखने की शुरुआत पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम से की थी।

विज्ञापन
Celebration in Chandigarh after Neeraj Chopra Wins Gold in Tokyo Olympic
नीरज चोपड़ा की जीत पर चंडीगढ़ में जश्न। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज सेक्टर- 10 के छात्र रहे नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में जैसे ही इतिहास रचा, कॉलेज के साथ ही पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में ढोल नगाड़े के साथ जश्न शुरू हो गया। कोई एक-दूसरे को गले लगा रहा था तो कोई तिरंगा लहराकर जीत की खुशी मना रहा था। क्या बच्चे और क्या बड़े सभी के लिए बस यह क्षण गर्व करने का था। इस मौके पर पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं यूटीसीए अध्यक्ष संजय टंडन और खिलाड़ी अंजुम मोदगिल भी डीएसी स्कूल में पहुंचे। दोनों ने शिक्षकों के साथ ढोल की थाप पर भंगड़ा किया। 

विज्ञापन


नीरज चोपड़ा शुरू से ही जेवेलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने के प्रबल दावेदारों में से एक थे। फाइनल की तैयारियां भी उसी तरह से थीं। नीरज चोपड़ा ने जेवेलिन थ्रो सीखने की शुरुआत पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम से की थी। अपने खिलाड़ी का प्रदर्शन देखने के लिए वहां खासा इंतजाम किया था। फील्ड एंड ट्रैक के पास बड़ी सी स्क्रीन लगा रखी थी। ट्रैक के दोनों ओर हाथ में तिरंगा लेकर एथलीट बैठे हुए थे। 
विज्ञापन



नीरज चोपड़ा के पूर्व कोच नदीम अहमद भी हाथों में तिरंगा लिए खिलाड़ियों के साथ लाइव मैच का प्रसारण देख रहे थे। जैसे ही नीरज ने अपने दूसरे मौके में 87.58 मीटर का थ्रो मारा, स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। उसके बाद स्वर्ण पदक की घोषणा के साथ ही मिठाई बांटने का दौर शुरू हो गया। वहीं खिलाड़ियों ने डांस कर जश्न मनाया। डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल पवन शर्मा के साथ शिक्षकों और प्रोफेसर ने खुशी के इस मौके पर एक दूसरे को मिठाई खिलाई।

विज्ञापन
विज्ञापन

स्वर्ण की घोषणा होते ही निकल आए आंसू
ताऊ देवीलाल स्टेडियम में नीरज चोपड़ा ने जेवेलिन पकड़नी सीखी थी। टोक्यो ओलंपिक जाने से पहले ही मुझे विश्वास था कि इस बार नीरज ओलंपिक में जेवेलिन थ्रो में पक्का पदक जीतेगा। आखिरी समय में दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं। जैसे ही नीरज का स्वर्ण पक्का हुआ खुशी के मारे आंखों से आंसू निकल आए। - नसीम अहमद, नीरज के कोच

14 साल का था नीरज, जब मेरे पास आया था: नसीम

कोच नसीम अहमद का कहना है कि 14 वर्ष का नीरज चोपड़ा मेरे पास आया था। उस समय मैं सिर्फ यह देखता था कि कैसे बच्चों को राष्ट्रीय मेडल जीतने के लिए तैयार किया जाए। मेरी यह तमन्ना उस समय पूरी होने लगी जब मैंने देखा कि 14 वर्ष के इस बच्चे ने 50 मीटर तक जेवेलिन थ्रो करना शुरू कर दिया है। जेवेलियन थ्रोअर नीरज चोपड़ा के कोच नसीम अहमद का कहना है कि उनको खुशी उस वक्त हुई जब नीरज ने नेशनल स्पोर्ट्स की दुनिया में कदम रखा। देखते ही देखते उसके शो केस में मेडल रखने की जगह तक नहीं बची।  

मेडल जीतने पर भावुक नसीम ने कहा कि नीरज 2011 से 2015 तक उनके पास पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में प्रेक्टिस करते रहे। उन्होंने कहा कि नीरज इसी स्टेडियम के हॉस्टल में रहते थे। उनके चाचा ने मुझसे संपर्क किया था कि इस लड़के को खिलाड़ी बनाना है। नसीम ने कहा कि पंचकूला में सिंथेटिक ट्रैक था। इस वजह से यहां काफी खिलाड़ी प्रेक्टिस के लिए आते थे। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में वह इसलिए रहते थे कि गांव दूर था। 
 
नेशनल में जीतने के बाद आभास था कि कीर्तिमान स्थापित करेगा 
नसीम अहमद ने कहा कि नीरज में हौसला था, उसी हौसले ने उनको ओलंपिक मेडल दिलवाया। जब नीरज ने नेशनल में गोल्ड मेडल जीते तो उसी समय यह आभास हो गया था कि यह कुछ कीर्तिमान स्थापित करेगा। नसीम अहमद ने कहा कि हॉस्टल में जो डाइट थी वह तो थी ही, साथ ही नीरज और उनके दोस्त सोयाबीन और चने की रोटी भी काफी पसंद करते थे, जिसके लिए वह अलग से इंतजाम करते थे। नसीम अहमद ने बताया कि नीरज करीब पांच घंटे तक अभ्यास करते थे। वह छुट्टियों में भी अपने घर नहीं जाते थे। उन्होंने बताया कि नीरज को सोशल मीडिया या किसी अन्य प्लेटफार्म में कोई रुचि नहीं थी। उन्होंने बताया कि जब उसका सेलेक्शन इंडिया कैंप के लिए हुआ तो उस समय नीरज करीब 74 मीटर तक जेवेलियन थ्रो करते थे। 

स्पांसर मिले तो बात बने
नसीम अहमद ने कहा कि एथलेटिक्स में भी यदि स्पांसर मिले तो खिलाड़ियों को काफी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि एथलीटों को डाइट की सबसे ज्यादा समस्या होती है। इसके साथ ही देश में एथलीटों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में भी अभी काफी सुधार की गुंजाइश है। यदि ग्रामीण इलाकों में ऐसे सेंटर बनें तो ज्यादा खिलाड़ी निकल सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed