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Chandigarh News: किताबों के दाम में लूट पर सीसीपीसीआर ने शिक्षा विभाग से की बैठक
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चंडीगढ़। नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने पर अभिभावकों को स्कूल की पुस्तकों की खरीद में कठिनाई आ रही है। इस मामले पर अमर उजाला में बुधवार को खबर प्रकाशित की गई थी। इसे संज्ञान में लेते हुए चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीसीपीसीआर) ने इस विषय पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की और समस्या के जल्द समाधान की मांग की।
आयोग की अध्यक्षा शिप्रा बंसल ने कहा कि शैक्षणिक सामग्री की उपलब्धता में सुगमता और पारदर्शिता होनी चाहिए। इसे सुनिश्चित करना बच्चों और उनके अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। सीबीएसई के दिशानिर्देशों और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के अनुसार शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। सीबीएसई के दिश-निर्देशों के अनुसार सभी स्कूलों को अपनी-अपनी वेबसाइट पर निर्धारित पुस्तकों की सूची प्रदर्शित करनी अनिवार्य है।
स्कूल की पुस्तकों को केवल चुनिंदा दुकानों पर उपलब्ध कराने की प्रथा से अभिभावकों को असुविधा होती है। उनकी पहुंच सीमित होती है और आर्थिक बोझ बढ़ता है। किसी भी अभिभावक को विशेष विक्रेताओं से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। आयोग ने विश्वास व्यक्त किया कि इस मुद्दे के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
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आयोग की अध्यक्षा शिप्रा बंसल ने कहा कि शैक्षणिक सामग्री की उपलब्धता में सुगमता और पारदर्शिता होनी चाहिए। इसे सुनिश्चित करना बच्चों और उनके अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। सीबीएसई के दिशानिर्देशों और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के अनुसार शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। सीबीएसई के दिश-निर्देशों के अनुसार सभी स्कूलों को अपनी-अपनी वेबसाइट पर निर्धारित पुस्तकों की सूची प्रदर्शित करनी अनिवार्य है।
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स्कूल की पुस्तकों को केवल चुनिंदा दुकानों पर उपलब्ध कराने की प्रथा से अभिभावकों को असुविधा होती है। उनकी पहुंच सीमित होती है और आर्थिक बोझ बढ़ता है। किसी भी अभिभावक को विशेष विक्रेताओं से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। आयोग ने विश्वास व्यक्त किया कि इस मुद्दे के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
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