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सीबीआई ने कब्जे में लिए AJL से जुड़े सारे रिकॉर्ड, हुड्डा से हो सकती है पूछताछ
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 14 Apr 2017 09:37 AM IST
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सीबीआई
- फोटो : Getty
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केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने नेशनल हेराल्ड के स्वामित्व वाली एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को पंचकूला में दोबारा प्लॉट आवंटन से जुड़ा सारा रिकार्ड कब्जे में ले लिया है। हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) के पंचकूला स्थित कार्यालय से प्लॉट आवंटन से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज दो दिन पहले ही सीबीआई ने कब्जे में ले लिया है। सीबीआई ने छह अप्रैल को ही इस मामले में हुडा के तत्कालीन चेयरमैन व हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक, प्रशासक और टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग के वित्तायुक्त पर केस दर्ज किया था।
अब जांच एजेंसी दस्तावेज की जांच पड़ताल के बाद संबंधित तत्कालीन अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। सूत्रों के अनुसार तीन हफ्ते बाद सभी को एक-एक कर समन भेजे जाएंगे। सीबीआई हुडा के तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ के बाद पूर्व सीएम हुड्डा को भी सेक्टर-30 स्थित अपने कार्यालय में सवाल-जवाब के लिए बुला सकती है।
पूछताछ और दस्तावेज की जांच पड़ताल के बाद घोटाले में अधिकारियों की संलिप्तता पाए जाने पर ही जांच एजेंसी उन्हें चार्जशीट करेगी।
सीबीआई ने अब तक किसी अधिकारी के नाम से केस दर्ज नहीं किया है, लेकिन जांच के बाद उन्हें केस में नामजद किया जाएगा। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के उप सचिव मदन लाल की जांच के आधार पर खट्टर सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद विजिलेंस के उप सचिव की शिकायत पर सीबीआई ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के पूर्व चेयरमैन भूपेंद्र हुड्डा, हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक, तत्कालीन हुडा प्रशासक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के वित्तायुक्त और एजेएल के पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, शक्तियों का दुरुपयोग व भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं में केस दर्ज किया था।
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अब जांच एजेंसी दस्तावेज की जांच पड़ताल के बाद संबंधित तत्कालीन अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। सूत्रों के अनुसार तीन हफ्ते बाद सभी को एक-एक कर समन भेजे जाएंगे। सीबीआई हुडा के तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ के बाद पूर्व सीएम हुड्डा को भी सेक्टर-30 स्थित अपने कार्यालय में सवाल-जवाब के लिए बुला सकती है।
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पूछताछ और दस्तावेज की जांच पड़ताल के बाद घोटाले में अधिकारियों की संलिप्तता पाए जाने पर ही जांच एजेंसी उन्हें चार्जशीट करेगी।
सीबीआई ने अब तक किसी अधिकारी के नाम से केस दर्ज नहीं किया है, लेकिन जांच के बाद उन्हें केस में नामजद किया जाएगा। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के उप सचिव मदन लाल की जांच के आधार पर खट्टर सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद विजिलेंस के उप सचिव की शिकायत पर सीबीआई ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के पूर्व चेयरमैन भूपेंद्र हुड्डा, हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक, तत्कालीन हुडा प्रशासक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के वित्तायुक्त और एजेएल के पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, शक्तियों का दुरुपयोग व भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं में केस दर्ज किया था।
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यह है मामला
जांच एजेंसी पूछताछ के लिए हुड्डा को बुलाने की तैयारी में
एजेएल को प्लॉट आवंटित करने का मामला 1982 का है। 24 अगस्त 1982 को पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल ने पंचकूला के सेक्टर-6 में एजेएल को 3360 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया था। 30 अगस्त 1982 तक कब्जा लेकर छह माह के भीतर निर्माण शुरू करने और दो साल में पूरा करने के निर्देश थे। ऐसा न होने पर 30 अक्तूबर 1992 को प्लॉट रिज्यूम हो गया और 10 नवंबर 1995 को हुडा ने वापस कब्जा ले लिया।
भूपेंद्र हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने के बाद 14 मई 2005 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने प्लॉट के पुन: आवंटन का अनुरोध सरकार से किया। भूपेंद्र हुड्डा तब हुडा के चेयरमैन थे। एलआर ने सरकार को राय दी कि प्लॉट का पुन: आवंटन नहीं हो सकता, मगर 18 अगस्त 2005 को नियमों में छूट देते हुए 1982 में आवंटित रेट पर ही इस प्लाट को दोबारा कंपनी को दे दिया गया।
स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी जांच रिपोर्ट में 62 लाख रुपये की वित्तीय हानि बताई है पर प्लाट की कीमत तब करीब 22 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसका आवंटन लगभग 59 लाख रुपये में हुआ।
भूपेंद्र हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने के बाद 14 मई 2005 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने प्लॉट के पुन: आवंटन का अनुरोध सरकार से किया। भूपेंद्र हुड्डा तब हुडा के चेयरमैन थे। एलआर ने सरकार को राय दी कि प्लॉट का पुन: आवंटन नहीं हो सकता, मगर 18 अगस्त 2005 को नियमों में छूट देते हुए 1982 में आवंटित रेट पर ही इस प्लाट को दोबारा कंपनी को दे दिया गया।
स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी जांच रिपोर्ट में 62 लाख रुपये की वित्तीय हानि बताई है पर प्लाट की कीमत तब करीब 22 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसका आवंटन लगभग 59 लाख रुपये में हुआ।