फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   CBI investigation in case of death of woman in lockup in Ludhiana

Chandigarh: लॉकअप में महिला की मौत मामले में एसआईटी की जांच कटघरे में आई, CBI जांच में खुली परतें

Tue, 14 May 2024 01:41 PM IST
निवेदिता वर्मा हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़
हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 May 2024 01:41 PM IST
सार

सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि पुलिस ने घटना के दिन रात के समय अपने रजिस्टर में लिखा कि महिला को नसें काटने के बाद बग्गा नर्सिंग होम में ले जाया गया था लेकिन जब जांच टीम अस्पताल में पहुंची तो पता चला कि उनके यहां किसी महिला को नहीं लाया गया था। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस ने झूठी रिपोर्ट दर्ज की थी।

विज्ञापन
CBI investigation in case of death of woman in lockup in Ludhiana
सीबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

2017 में आईटी एक्ट के मामले में गिरफ्तार की गई महिला रमनदीप कौर की लुधियाना के दुगरी थाने के लॉकअप में मौत हो गई थी। इस मामले में तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर दलबीर सिंह व अन्य जवानों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए मामले में परतें खुलती जा रही हैं। 
विज्ञापन


आरोपी इंस्पेक्टर दलबीर सहित एएसआई सुखदेव, महिला कांस्टेबल राजविंद्र कौर व अमनदीप कौर के खिलाफ हुई विभागीय जांच में पहले डीएसपी द्वारा इन्हें बचाने का प्रयास किया गया। यही नहीं बाद में जब एडीसीपी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने जांच की तो उसने भी अलग-अलग स्तर पर इंस्पेक्टर व अन्य को बचाने का प्रयास किया गया। लेकिन अब सीबीआई ने जब शुरू से आखिर तक दोबारा मामले में जांच की तो दफन किए गए सारे कारनामे बाहर आ गए। वहीं मृतका व उसके मंगेतर पर चंडीगढ़ में भी दो मामले दर्ज है।
विज्ञापन


सीबीआई ने जांच करते हुए एफआईआर में लिखा है कि याचिकाकर्ता मुकुल गर्ग करीब 7-8 सालों से अपनी मंगेतर के साथ अपने चाचा के मकान में रहता था। उनके खिलाफ चंडीगढ़ में दो अलग-अलग मामले दर्ज है जो कि कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट फैसले नहीं आने के कारण वह अभी दोनों शादी नहीं कर रहे थे। थाने के शौचालय में उसकी मौत होने के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट की निगरानी में उसका पोस्टमार्टम हुआ। लेकिन पुलिस ने मृतका के परिजनों या किसी रिश्तेदार को भी उसकी मौत की सूचना नहीं दी। बल्कि खुद उन्हें भी मौत के अगले दिन समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद इस बात का पता लगा था। पुलिस ने केवल याचिककर्ता मुकुल गर्ग की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि पुलिस ने जबरन रमनदीप का अंतिम संस्कार किया है। कौर और उसके माता-पिता का भी इंतजार नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि पुलिस ने घटना के दिन रात के समय अपने रजिस्टर में लिखा कि महिला को नसें काटने के बाद बग्गा नर्सिंग होम में ले जाया गया था लेकिन जब जांच टीम अस्पताल में पहुंची तो पता चला कि उनके यहां किसी महिला को नहीं लाया गया था। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस ने झूठी रिपोर्ट दर्ज की थी। हालांकि बाद में फंदे से शव उतारने के बाद रमनदीप कौर के शव को पंचम अस्पताल में ले जाया गया था जहां डाक्टर ने अपनी रिपोर्ट में भी लिखा कि उन्होंने महिला के पास अंडरगारमेंट्स से मिले चाकू को एएसआई सुखदेव सिंह को सौंप दिया था। लेकिन एएसआई ने चाकू को अपने कब्जे में लेने के बाद भी उसे रिकॉर्ड पर नहीं लाया और न ही किसी को सौंपा। महिला कांस्टेबल अमनदीप कौर और राजविंदर कौर ने भी चाकू के संबंध में कोई जवाब नहीं दिया था।

पंजाब डीजीपी ने एसीपी के खिलाफ दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश
इस मामले में लुधियाना आयुक्त के आदेशों पर स्थानीय एसीपी पीपीएस नवीन कुमार को जांच दी गई जिन्होंने जांच के दौरान कई कमियां छोड़ दी जिसका जिक्र सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में किया है। सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक दुगरी थाने में महिला हवालात को स्टोर रूम के तौर पर इस्तेमाल करने के कारण थाना प्रभारी द्वारा रमनदीप कौर को महिला हवालात के साथ बने कमरे में रखा गया था। जबकि इस कमरे का इस्तेमाल महिला हवालात के रहने के लिए किया जाता है। 

महिला आरोपी की निगरानी के लिए थाना प्रभारी द्वारा अपने स्तर पर अपना रिटायरिंग रूम भी बनाया गया था जो कि सीधे तौर पर ड्यूटी में लापरवाही थी। यदि रमनदीप कौर को महिला हवालात में बंद किया जाता और उसकी ठीक से तलाशी ली गई होती और बाथरूम जाते समय उसे अकेले नहीं जाने देना चाहिए था जिससे कि वह अंदर कुंडी नहीं लगा पाती। 

पीपीएस अधिकारी नवीन कुमार ए.सी.पी. लाइसेंसिंग लुधियाना के पास सब-डिवीजन एटम पार्क का अतिरिक्त प्रभार भी था, जो क्षेत्र पर्यवेक्षण अधिकारी होने के नाते उनका कर्तव्य था कि वह दुगरी थाने में महिला लॉकअप का निरीक्षण करते जिसे स्टोर रूम के रूप में प्रयोग किया जा रहा था। वह इस स्टोर को खाली करवाते ताकि इसका उपयोग लेडिज लॉकअप के रूप में किया जा सकता। लेकिन एसीपी ने ऐसा नहीं किया है और न ही इसे किसी वरिष्ठ अधिकारी के संज्ञान में लाया है। इसके अलावा उन्होंने इस मामले में जिमनी नंबर 12-ए तैयार करने में भी काफी देरी की। इससे साफ जाहिर है कि एसीपी नवीन कुमार ने क्षेत्रीय पर्यवेक्षण अधिकारी होने के नाते अपने कर्तव्यों के पालन में लापरवाही बरती है। इसलिए चंडीगढ़ से पंजाब डीजीपी ने उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए।

एसआईटी ने भी जांच में छोड़ दी कई कमियां, सीबीआई ने की पूरी
इस मामले में हाईकोर्ट के आदेशों पर एडीसीपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित करके जांच के आदेश दिए गए थे। लेकिन इस एसआईटी ने भी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण प्वाइंट पर जांच में कमियां छोड़ दी जिन्हें अब सीबीआई ने अपनी जांच में पूरा कर दिया है। रमनदीप कौर द्वारा पुलिस हिरासत के दौरान आत्महत्या करने के संबंध में आईपीसी एक्ट 304-ए गैर इरादतन हत्या के तहत दर्ज मामले में आपराधिक लापरवाही के लिए इंस्पेक्टर सहित अन्य को नामजद किया गया। 


हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि इसकी जांच एडीसीपी रैंक अधिकारी के नेतृत्व में होगी और जांच के दौरान मृतक रमनदीप कौर के हस्ताक्षर, जो कि गिरफ्तारी मेमो, व्यक्तिगत सर्च के मेमो और सूचना के मेमो पर जोड़े गए हैं, से मिलान करवाया जाना चाहिए। एफएसएल और रिपोर्ट के अनुसार आगे की जांच नियमानुसार की जाए। लेकिन हाईकोर्ट द्वारा एसआईटी गठित होने के बावजूद उन महत्वपूर्ण सवालों को नजरअंदाज कर दिया जो इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed