लॉकडाउन की मार: दो साल के घाटे ने तोड़ी कैटरिंग कारोबार की कमर, सरकार से राहत की मांग
कोरोना के कारण चंडीगढ़ में लॉकडाउन लगा है। इस कारण शादी आदि समारोहों में भी मेहमानों की संख्या सीमित कर दी गई है। इसका सीधा असर कैटरिंग बिजनेस पर पड़ने लगा है।
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कोविड के बढ़ते प्रकोप और लॉकडाउन ने कैटरर्स को भी परेशानी में डाल दिया है। पिछले वर्ष से लेकर इस वर्ष तक चंडीगढ़ के हर कैटरर्स को कम से कम 20 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। शहर में 150 से भी अधिक कैटरर्स हैं। सभी के काम बंद है।
इनकी मांग है कि जब काम बंद है तो जीएसटी व आयकर के अलावा बैंकों की किस्तें भरने में छूट मिले ताकि कैटरर्स को भी थोड़ी राहत मिल सके। पिछले दो वर्षा में बहुत ही घाटा उठाना पड़ा है। गोदाम, दुकान का किराया के अलावा मजूदरों के वेतन का भी खर्चा है।
बैंक की किस्तें टूट रही हैं
आमदनी कुछ भी नहीं है, लेकिन खर्च में कोई कमी नहीं है। गोदाम पर जो मजदूर हैं, उन्हें काम बंद होने के बाद भी नहीं हटा सकते। क्योंकि जब काम शुरू होगा तो फिर मजदूर मिलना मुश्किल होता है। काम चलाने के लिए ट्रक रखे हैं। सामान खरीदने के लिए भी बैंकों से कर्ज ले रखा है। काम नहीं होने के कारण बैंक की किस्तें भी टूट रही हैं। गोदाम का किराया, मजदूरों के वेतन के अलावा ऑफिस का किराया भी भरना पड़ रहा है, लेकिन आमदनी कुछ भी नहीं है। पिछले वर्षों में जो कमाई हुई थी, उसके सहारे ही चल रहा है। काम कुछ भी नहीं है, लेकिन जीएसटी का रिटर्न भरना पड़ रहा है। -दिनेश गुप्ता, लाल कैटरर्स, सेक्टर-37
अब नवंबर का इंतजार करेंगे
पिछले दो वर्षों से काम बिल्कुल बंद है। इस बार भी शादी का सीजन में सभी बुकिंग रद्द हो गई। अब तो नवंबर का इंतजार है। तब क्या होगा, इसका भी भरोसा नहीं है। शादी सीजन की कमाई खत्म हो गई है। कई प्रकार के खर्च हैं। सरकार कैटरर्स को भी राहत दे। सभी प्रकार का टैक्स देते हैं, गाड़ी है, लेकिन चल नहीं रही है। इसके बावजूद उसकी किस्तें, बीमा, रोड टैक्स व अन्य प्रकार के टैक्स देना पड़ रहा है। काम नहीं होने के बाद भी टैक्स भरना पड़ रहा है। -सुरिंदर जगोता, जगोता कैटरर्स, सेक्टर-24
घर का खर्च कैसे चलेगा, समझ में नहीं आ रहा है
पूंजी खत्म होने के कागार पर है
काम बंद होने की चर्चा घरों में भी चलती है। जब आर्थिक तंगी की बात घर में होती है तो बच्चे भी चिंतित होते हैं। उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। बिजली, पानी के अलावा अन्य सभी बिल और टैक्स भर रहे हैं। सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की रियायत नहीं है। अब हमारी जमा पूंजी भी खत्म होने के कगार पर है। सभी कैटरर्स वित्तीय रूप से असहाय हो गए हैं। सरकार जीएसटी व आयकर में छूट तो कम से कम दे। हमारा काम नहीं चलने पर बैंकों की किस्तों में भी छूट मिले, लेकिन सरकार का हम पर कोई ध्यान ही नहीं है। -अमनदीप सिंह, धीर कैटरर्स, सेक्टर-41