{"_id":"5f47ea488ebc3e4ae528eff3","slug":"cat-rejected-plea-consider-promotion-chandigarh-news-pkl385999777","type":"story","status":"publish","title_hn":"पदोन्नति पर विचार करने की याचिका को कैट ने किया खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पदोन्नति पर विचार करने की याचिका को कैट ने किया खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की पीठ ने पब्लिक हेल्थ विभाग की स्पेशल सेक्रेटरी (सेवानिवृत्त) पंकज चौधरी एचसीएस की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में उन्होंने अपनी पदोन्नति पर विचार करने के लिए यूपीएससी और हरियाणा सरकार को निर्देश जारी करने की मांग की थी।
याचिका में कहा है कि वह हरियाणा सिविल सर्विसेज की सबसे वरिष्ठ सदस्य थीं। 2012 के बाद वह हरियाणा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति के लिए पात्र थी। उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ शुरू किए गए दो अनुशासनात्मक मामले निराधार थे। आपराधिक मामले में दायर आरोप पत्र भी झूठा था। उन्होंने याचिका में कहा कि हरियाणा कैडर के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति की प्रक्रिया 2012 से 2016 तक के लिए थी, जबकि उनके खिलाफ 18 दिसंबर 2015 तक कोई मामला लंबित नहीं था। सबसे वरिष्ठ होने के नाते उन्हें पदोन्नत किया जाना चाहिए था। उन्होंने निवेदन किया कि उनके खिलाफ मुकदमों के लंबित होने तक हरियाणा सरकार को एक पद आरक्षित रखना चाहिए था। अंतिम फैसले के बाद भी उन्हें नियुक्त किया जा सकता था, लेकिन ऐसा करने की बजाय 31 जुलाई 2020 को 58 वर्ष की आयु में उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया। हरियाणा सरकार और यूपीएससी ने तर्क दिया कि उन पर आपराधिक मामले लंबित होने और कार्रवाई के कारण पदोन्नत नहीं किया जा सकता था। 2012 के बाद उन्हें पदोन्नति केे लिए मान्य माना गया था, यह विवादित नहीं था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कैट ने पंकज चौधरी की पदोन्नति पर विचार करने की याचिका को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
याचिका में कहा है कि वह हरियाणा सिविल सर्विसेज की सबसे वरिष्ठ सदस्य थीं। 2012 के बाद वह हरियाणा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति के लिए पात्र थी। उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ शुरू किए गए दो अनुशासनात्मक मामले निराधार थे। आपराधिक मामले में दायर आरोप पत्र भी झूठा था। उन्होंने याचिका में कहा कि हरियाणा कैडर के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति की प्रक्रिया 2012 से 2016 तक के लिए थी, जबकि उनके खिलाफ 18 दिसंबर 2015 तक कोई मामला लंबित नहीं था। सबसे वरिष्ठ होने के नाते उन्हें पदोन्नत किया जाना चाहिए था। उन्होंने निवेदन किया कि उनके खिलाफ मुकदमों के लंबित होने तक हरियाणा सरकार को एक पद आरक्षित रखना चाहिए था। अंतिम फैसले के बाद भी उन्हें नियुक्त किया जा सकता था, लेकिन ऐसा करने की बजाय 31 जुलाई 2020 को 58 वर्ष की आयु में उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया। हरियाणा सरकार और यूपीएससी ने तर्क दिया कि उन पर आपराधिक मामले लंबित होने और कार्रवाई के कारण पदोन्नत नहीं किया जा सकता था। 2012 के बाद उन्हें पदोन्नति केे लिए मान्य माना गया था, यह विवादित नहीं था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कैट ने पंकज चौधरी की पदोन्नति पर विचार करने की याचिका को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन