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Chandigarh News: कैट ने पीजीआई में नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति को जायज ठहराया
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चंडीगढ़। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पीजीआई नेशनल इंस्टीट्यूट नर्सिंग एजुकेशन के 139 नर्सिंग अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियुक्ति को पूरी तरह जायज ठहराया है। कैट ने पीजीआई में नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति को सही बताते हुए भर्ती के मामले में नियुक्ति देने संबंधित पांच आवेदकों की याचिका को खारिज कर दिया।कैट में नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए भर्ती में आवेदन करने वाले पांच अभ्यर्थियों ने नियुक्तियों के खिलाफ पीजीआई, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय समेत 139 नर्सिंग अधिकारियों को पार्टी बनाते हुए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं में प्रवीण थोमस, दिव्या एलिजाबेथ, प्रिया टी, सोहानी राज और निमिशा पीएन शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पीजीआई प्रशासन की तरफ से वर्ष 2019 में पहले नर्सिंग अधिकारियों के 78 पदों पर रेगुलर भर्ती निकाली गई थी। इसके बाद 82 पदों पर भर्ती निकाली गई, लेकिन सभी पदों पर पीजीआई नाइन के ही स्टूडेंट्स को भर्ती किया। पीजीआई
की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया कि संस्थान में नाइन के स्टूडेंट्स को चार साल की ट्रेनिंग दी जाती है। उसके बाद उन्हें संस्थान में ही नियुक्ति के लिए प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान स्टूडेंट्स के साथ बांड किया जाता है ताकि वह नौकरी के लिए किसी दूसरे संस्थान में न जाएं। वहीं, उक्त पांच याचिकाकर्ताओं का पीजीआई
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ने नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिए टेस्ट भी लिया था, जिसमें वे फेल हो गए थे।
क्या है पूरा मामला
पीजीआई ने 22 सितंबर 2019 को नर्सिंग अधिकारियों के 78 पदों पर भर्ती निकाली थी। ग्रुप बी और सी पदों पर नियमित भर्ती के लिए देशभर से आवेदकों की ओर से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। आवेदन की अवधि 22 अक्टूबर 2019 थी। इसके बाद 26 अक्टूबर 2019 को पीजीआई की तरफ से एक और भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें 82 सीनियर नर्सिंग अधिकारी की भर्ती की जानी थी, लेकिन सभी पदों पर पीजीआई नाइन के ट्रेनिंग स्टूडेंट्स को ही नियुक्ति दी गई। इस नियुक्ति के खिलाफ बाहर से आवेदन करने वाले पांच आवेदकों ने कैट में याचिका दायर की थी।
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याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पीजीआई प्रशासन की तरफ से वर्ष 2019 में पहले नर्सिंग अधिकारियों के 78 पदों पर रेगुलर भर्ती निकाली गई थी। इसके बाद 82 पदों पर भर्ती निकाली गई, लेकिन सभी पदों पर पीजीआई नाइन के ही स्टूडेंट्स को भर्ती किया। पीजीआई
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की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया कि संस्थान में नाइन के स्टूडेंट्स को चार साल की ट्रेनिंग दी जाती है। उसके बाद उन्हें संस्थान में ही नियुक्ति के लिए प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान स्टूडेंट्स के साथ बांड किया जाता है ताकि वह नौकरी के लिए किसी दूसरे संस्थान में न जाएं। वहीं, उक्त पांच याचिकाकर्ताओं का पीजीआई
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ने नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिए टेस्ट भी लिया था, जिसमें वे फेल हो गए थे।
क्या है पूरा मामला
पीजीआई ने 22 सितंबर 2019 को नर्सिंग अधिकारियों के 78 पदों पर भर्ती निकाली थी। ग्रुप बी और सी पदों पर नियमित भर्ती के लिए देशभर से आवेदकों की ओर से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। आवेदन की अवधि 22 अक्टूबर 2019 थी। इसके बाद 26 अक्टूबर 2019 को पीजीआई की तरफ से एक और भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें 82 सीनियर नर्सिंग अधिकारी की भर्ती की जानी थी, लेकिन सभी पदों पर पीजीआई नाइन के ट्रेनिंग स्टूडेंट्स को ही नियुक्ति दी गई। इस नियुक्ति के खिलाफ बाहर से आवेदन करने वाले पांच आवेदकों ने कैट में याचिका दायर की थी।