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Chandigarh: नए-नए हथकंडे अपना रहे साइबर अपराधी, अब ट्रैफिक चालान का फर्जी लिंक भेजकर हो रही ठगी
Sat, 06 Jan 2024 03:25 PM IST
निवेदिता वर्मा
बृजेन्द्र गौड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
बृजेन्द्र गौड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 Jan 2024 03:25 PM IST
सार
सेक्टर-17 थाने की पहली मंजिल पर बने साइबर अपराध पुलिस थाने के पास सीमित स्टाफ है। वहीं, हर माह सैकड़ों शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही हैं। ठगों पर सेक्टर-18 में बनाया गया सेनकॉप्स भी अहम साबित होगा।
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cyber crime
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
चंडीगढ़ में साइबर अपराधियों ने ठगी का मकड़जाल फैला दिया है। आए दिन शातिर ठगी के नए-नए हथकड़े अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। अब ट्रैफिक चालान का फर्जी लिंक भेज कर भी लूटा जा रहा है।
साइबर ठगी के मामले रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं। हर दिन कोई न कोई ठगी का शिकार हो रहा है। इनके जाल में सेना के रिटायर अफसरों से लेकर डॉक्टर, विद्यार्थी सहित सभी फंस रहे हैं। पुलिस ऐसे मामलों में लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है। वर्ष 2023 में चंडीगढ़ पुलिस के पास साइबर ठगी के 7500 से ज्यादा शिकायतें आईं। वर्ष 2019 में यह आंकड़ा 4,793 था।
साइबर अपराधी नई तकनीकों का प्रयोग ठगी के लिए कर रहे हैं। बता दें कि सेक्टर-17 थाने की पहली मंजिल पर बने साइबर अपराध पुलिस थाने के पास सीमित स्टाफ है। वहीं, हर माह सैकड़ों शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही हैं। ठगों पर सेक्टर-18 में बनाया गया सेनकॉप्स भी अहम साबित होगा।
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चंडीगढ़ पुलिस लोगों को सोशल मीडिया समेत स्कूलों-कॉलेजों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित कर साइबर ठगों से बचने के लिए जागरूक कर रही है। इसके बावजूद लोग ठगों के जाल में फंस रहे हैं। साइबर अपराध की शिकायत करने के लिए पुलिस ने 1930 हेल्पलाइन नंबर जारी किया हुआ है।
2023 में यह अहम शिकायतें आईं सामने
गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर की 234 शिकायतें आई। डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड और एटीएम धोखाधड़ी के 1143 मामले, ओएलएक्स पर खरीद-फरोख्त के नाम पर ठगी के 1497 मामले, सोशल मीडिया पर धमका, ब्लैकमेल कर वसूली के 1527 मामले, वर्क फ्रॉम होम और निवेश के नाम पर ठगी के 536 मामले, फर्जी प्रोफाइल के 691 मामले तथा फर्जी कॉल कर क्यू आर कोड, केवाईसी लिंक के नाम पर ठगी के 603 मामले सामने आए थे।
नए हथकंडे अपना रहे
पुलिस का कहना है कि ठग टेलीग्राम के जरिए जॉब और निवेश का लालच दे ठगी करने लगे हैं। वहीं, यातायात चालान का फर्जी लिंक भेज ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके अलावा विदेश में बैठा दोस्त या जानकार बन ठग रहे हैं। पुलिस ने वर्ष 2023 में 106 साइबर अपराधी पकड़े थे। वहीं 2.78 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए। 8.26 लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं, ठगों से 177 मोबाइल, 290 सिम कार्ड, 78 डेबिट कार्ड एवं अन्य सामान सहित पांच लाख की नकदी, गहने, ट्रक, वाहन, दस्तावेज आदि सामान बरामद किया था।
पिछले पांच वर्षों में इतने मामले सामने आए
वर्ष 2023 में 7512
वर्ष 2022 में 7322
वर्ष 2021 में 5921
वर्ष 2020 में 6537
वर्ष 2019 में 4793
पांच वर्षों में हुईं एफआईआर
वर्ष 2023 में 120
वर्ष 2022 में 144
वर्ष 2021 में 68
वर्ष 2020 में 80
वर्ष 2019 में 35
साइबर पुलिस ने दिए ये टिप्स
-अनजान सोर्स से आई किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
-अंजान फोन कॉल्स पर किसी को भी संवेदनशील वित्तीय जानकारी न दें।
-संवेदनशील डाटा और वित्तीय लेन-देन के एप्स पर हमेशा मजबूत पासवर्ड रखें।
-थर्ड पार्टी एप डाउनलोड न करें।
-अपने डिवाइस पर किसी भी एप को अनावश्यक जानकारी न दें।
-अपने डिवाइस के ओपरेटिंग सिस्टम को अपडेटेड रखें।
-सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारियों को साझा न करें।
- ब्राउजर में पासवर्ड को सेव न करें।
लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए सावधानियां बरतने की जरूरत है। सोशल मीडिया और मोबाइल पर संदेश के रूप में आने वाले लुभावने ऑफर से बचना चाहिए और किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। वहीं, अपने खाते आदि से जुड़ी निजी जानकारी भी किसी से साझी नहीं करनी चाहिए। -केतन बंसल, एसपी साइबर अपराध, चंडीगढ़ पुलिस
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साइबर ठगी के मामले रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं। हर दिन कोई न कोई ठगी का शिकार हो रहा है। इनके जाल में सेना के रिटायर अफसरों से लेकर डॉक्टर, विद्यार्थी सहित सभी फंस रहे हैं। पुलिस ऐसे मामलों में लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है। वर्ष 2023 में चंडीगढ़ पुलिस के पास साइबर ठगी के 7500 से ज्यादा शिकायतें आईं। वर्ष 2019 में यह आंकड़ा 4,793 था।
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साइबर अपराधी नई तकनीकों का प्रयोग ठगी के लिए कर रहे हैं। बता दें कि सेक्टर-17 थाने की पहली मंजिल पर बने साइबर अपराध पुलिस थाने के पास सीमित स्टाफ है। वहीं, हर माह सैकड़ों शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही हैं। ठगों पर सेक्टर-18 में बनाया गया सेनकॉप्स भी अहम साबित होगा।
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चंडीगढ़ पुलिस लोगों को सोशल मीडिया समेत स्कूलों-कॉलेजों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित कर साइबर ठगों से बचने के लिए जागरूक कर रही है। इसके बावजूद लोग ठगों के जाल में फंस रहे हैं। साइबर अपराध की शिकायत करने के लिए पुलिस ने 1930 हेल्पलाइन नंबर जारी किया हुआ है।
2023 में यह अहम शिकायतें आईं सामने
गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर की 234 शिकायतें आई। डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड और एटीएम धोखाधड़ी के 1143 मामले, ओएलएक्स पर खरीद-फरोख्त के नाम पर ठगी के 1497 मामले, सोशल मीडिया पर धमका, ब्लैकमेल कर वसूली के 1527 मामले, वर्क फ्रॉम होम और निवेश के नाम पर ठगी के 536 मामले, फर्जी प्रोफाइल के 691 मामले तथा फर्जी कॉल कर क्यू आर कोड, केवाईसी लिंक के नाम पर ठगी के 603 मामले सामने आए थे।
नए हथकंडे अपना रहे
पुलिस का कहना है कि ठग टेलीग्राम के जरिए जॉब और निवेश का लालच दे ठगी करने लगे हैं। वहीं, यातायात चालान का फर्जी लिंक भेज ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके अलावा विदेश में बैठा दोस्त या जानकार बन ठग रहे हैं। पुलिस ने वर्ष 2023 में 106 साइबर अपराधी पकड़े थे। वहीं 2.78 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए। 8.26 लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं, ठगों से 177 मोबाइल, 290 सिम कार्ड, 78 डेबिट कार्ड एवं अन्य सामान सहित पांच लाख की नकदी, गहने, ट्रक, वाहन, दस्तावेज आदि सामान बरामद किया था।
पिछले पांच वर्षों में इतने मामले सामने आए
वर्ष 2023 में 7512
वर्ष 2022 में 7322
वर्ष 2021 में 5921
वर्ष 2020 में 6537
वर्ष 2019 में 4793
पांच वर्षों में हुईं एफआईआर
वर्ष 2023 में 120
वर्ष 2022 में 144
वर्ष 2021 में 68
वर्ष 2020 में 80
वर्ष 2019 में 35
साइबर पुलिस ने दिए ये टिप्स
-अनजान सोर्स से आई किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
-अंजान फोन कॉल्स पर किसी को भी संवेदनशील वित्तीय जानकारी न दें।
-संवेदनशील डाटा और वित्तीय लेन-देन के एप्स पर हमेशा मजबूत पासवर्ड रखें।
-थर्ड पार्टी एप डाउनलोड न करें।
-अपने डिवाइस पर किसी भी एप को अनावश्यक जानकारी न दें।
-अपने डिवाइस के ओपरेटिंग सिस्टम को अपडेटेड रखें।
-सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारियों को साझा न करें।
- ब्राउजर में पासवर्ड को सेव न करें।
लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए सावधानियां बरतने की जरूरत है। सोशल मीडिया और मोबाइल पर संदेश के रूप में आने वाले लुभावने ऑफर से बचना चाहिए और किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। वहीं, अपने खाते आदि से जुड़ी निजी जानकारी भी किसी से साझी नहीं करनी चाहिए। -केतन बंसल, एसपी साइबर अपराध, चंडीगढ़ पुलिस