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Punjab: रेलवे में TC लगवाने के नाम पर लाखों की ठगी, वाराणसी में ट्रेनिंग करवाकर सैलरी भी दी, ऐसे हुआ खुलासा

Sun, 12 Mar 2023 08:25 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 12 Mar 2023 08:25 AM IST
सार

जिस दफ्तर में युवाओं की ट्रेनिंग होती थी, वह भी रेलवे के दफ्तर जैसा लगता था। ट्रेनिंग के दौरान उनकी हाजिरी भी लगती थी। तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्हें घर भेज दिया गया और कहा गया था कि घर पर नियुक्ति पत्र आएगा।

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Case of cheating youths of Punjab in name of jobs in Railway
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

रेलवे में नौकरी के नाम पर पंजाब के सैकड़ों युवाओं से ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। आरोपियों ने ठगी के शिकार युवकों से तीन महीने तक वाराणसी में टिकट निरीक्षक (टीसी) की ट्रेनिंग भी करवाई। इस दौरान उनके खातों में सैलरी भी आती रही। तीन दिन पहले विजिलेंस ने मुख्य आरोपी दलजीत सिंह को एक पीड़ित परिवार से 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। साथ ही दिल्ली डीआरएम आफिस के हेड क्लर्क रवि मल्होत्रा व क्लर्क जोगिंदर सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

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गिरफ्तारी की खबर मिलते ही शनिवार को ठगी के शिकार 114 लोग विजिलेंस अधिकारियों के पास पहुंचे और अपनी आपबीती बताई। सूत्रों का कहना है कि यह ठगी का पूरा मामला लगभग 65 करोड़ का है। शनिवार को 27 पीड़ितों ने अपने दस्तावेज विजिलेंस अधिकारियों को सौंपे। इस मामले में पुलिस ने भी पर्चा दर्ज किया था, लेकिन कार्रवाई के नाम कुछ नहीं किया था। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी पूर्व सरकार के एक विधायक का करीबी रहा है। इसलिए पुलिस उस पर हाथ नहीं डाल रही थी। बीते सात मार्च को एक पीड़ित के पिता ने आरोपी को और पैसे का लालच दिया तो मुख्य आरोपी विजिलेंस के शिकंजे में फंस गया। अब विजिलेंस ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। विजिलेंस ने पीड़ितों की ओर से दिए गए जाली दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।
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नियुक्ति पत्र नहीं आने से हुआ खुलासा
जिस दफ्तर में युवाओं की ट्रेनिंग होती थी, वह भी रेलवे के दफ्तर जैसा लगता था। ट्रेनिंग के दौरान उनकी हाजिरी भी लगती थी। तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्हें घर भेज दिया गया और कहा गया था कि घर पर नियुक्ति पत्र आएगा। उसमें स्टेशन का भी नाम लिखा होगा। वहीं जाकर ज्वाइन करना होगा। जब तीन महीने बाद नियुक्ति पत्र नहीं पहुंचा, तो इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। एक पीड़ित ने बताया कि वाराणसी में एक साथ 114 नौजवानों को टीसी की ट्रेनिंग दी गई थी। वहां पर उनकी सर्विस बुक भी भरी जाती थी। इस दौरान रेलवे अधिकारियों से भी मिलाया जाता था।
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उम्मीदवारों से 12-12 लाख तक वसूले
फिरोजपुर के प्रीत नगर निवासी दीपक गुंबर ने बताया कि उसने अपने दो बेटों को रेलवे में टीसी की नौकरी दिलवाने की एवज में दलजीत को दस लाख रुपये दिए थे। पैसे देने के बाद भी दलजीत यही दिलासा देता रहा कि उनके बेटों की नौकरी जल्द लग जाएगी। आरोपियों ने आसल निवासी मेजर सिंह से भी उनके बेटे को रेलवे में नौकरी दिलवाने के नाम पर 12 लाख वसूले थे। वकील खुशवंत सिंह के दो बेटों को रेलवे में टीसी लगाने की एवज में 24 लाख रुपये लिए थे। इस संबंध में थाना कैंट में भी मामला दर्ज है। ऐसे लगभग पंजाब के 114 नौजवानों से दलजीत व उसके साथियों ने करोड़ों रुपये की ठगी की है। कईयों ने अपने बेटों की नौकरी की खातिर मकान बेचकर आरोपियों को पैसे दिए थे।


सियासी नेता ने एक आरोपी को छुड़वाया था
पीड़ित दीपक ने बताया कि कुछ महीने पहले पुलिस ने आरोपी जोगिंदर को मोगा से गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में पुलिस ने एक सियासी नेता के दबाव में जोगिंदर को छोड़ दिया था।

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