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निजी अस्पताल में मानवता हुई शर्मसार, प्री-मैच्योर नवजात को मरने के लिए बास्केट में डाला

Wed, 27 May 2020 02:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Wed, 27 May 2020 02:09 AM IST
सार

  • एक रात बास्केट में पड़ी रही बच्ची, मंगलवार सुबह सामान्य अस्पताल में पुलिस ने भर्ती कराया लेकिन नहीं बची जान
  • नवजात बच्ची को अस्पताल के बास्केट में तड़पती देख एक युवक ने बनाया वीडियो, पुलिस को भी दी शिकायत 
  • पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन नहीं की कार्रवाई, दोबारा शिकायत पर अगले दिन सिविल अस्पताल में कराया भर्ती 

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Case of big negligence in a private hospital in Sonipat of Haryana
मरने के लिए बच्ची को बास्केट में डाला

विस्तार

सोनीपत के एक निजी अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती ने तबीयत बिगड़ने पर जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। प्री-मैच्योर होने के कारण एक बच्चे की पैदा होते ही मौत हो गई, जबकि दूसरी बच्ची जिंदा रही लेकिन उसका वजन काफी कम था। इस कारण बच्ची को बास्केट में रख दिया गया। 

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बच्ची को तड़पती देख एक युवक ने उसका वीडियो बना लिया। उसने मामले की शिकायत पुलिस में कर दी लेकिन पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि करीब 22 घंटे बाद दोबारा पुलिस को शिकायत देने के बाद बच्ची को सामान्य अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां नवजात की मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने मामले की वीडियो बनाकर वायरल की है। 
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जानकारी के अनुसार, शहर के एक निजी अस्पताल में सोमवार शाम करीब सात बजे एक महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। इसमें से एक की मौत हो गई। परिजन उसका अंतिम संस्कार करने चले गए। वहीं, दूसरे नवजात (बच्ची) को अस्पताल में एक बास्केट में डाल दिया गया। रात 10 बजे बच्ची के तड़पने की सूचना रवि नाम के युवक ने पुलिस को दी।

इसके बाद मौके पर सिविल लाइन थाना पुलिस पहुंची। पुलिस को बताया गया कि छह माह की गर्भवती से बच्ची पैदा हुई है और उसका वजन 350 ग्राम है। उसको बचाया नहीं जा सकता है। इस घटना का वीडियो वायरल होने पर मंगलवार सुबह पुलिस को फिर सूचित किया गया। पुलिस ने तब बच्ची को सामान्य अस्पताल की नर्सरी में भर्ती कराया लेकिन शाम को उसकी मौत हो गई। 

विधायक के बेटे को भी लेकर पहुंचा शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता रवि दहिया ने बताया कि वह बार-बार अस्पताल प्रशासन व पुलिस से गुहार लगाता रहा कि बच्ची को इस तरह मरने के लिए न छोड़ा जाए लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। वह विधायक सुरेंद्र पंवार के पास गया और उनके पुत्र ललित को लेकर मौके पर पहुंचा। ललित ने भी अस्पताल प्रशासन से कहा कि आखिर बच्ची को इस प्रकार तड़पते हुए लावारिस क्यों छोड़ दिया गया लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

मामला संज्ञान में आया है। मैं इसकी जांच करा रहा हूं। चिकित्सक या परिजन जिसके स्तर पर भी गड़बड़ी मिलेगी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के स्तर पर कार्रवाई में कोई ढिलाई हुई होगी तो उसकी भी जांच कराएंगे। - जश्नदीप सिंह रंधावा, एसपी सोनीपत।

 

हमारे पास प्री-मैच्योर पैदा हुई बच्ची आई थी। उसका वजन 350 था। उसे दाखिल कर लिया गया था लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। - डॉ. आदर्श शर्मा, सीएमओ सोनीपत

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