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सत्र रोकने की अपील कर कैप्टन ने दिखाया पंजाब विरोधी चेहरा: ढींढसा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 18 Dec 2016 09:08 PM IST
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Parminder Singh Dhindsa
- फोटो : File Photo
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शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से चुनाव आयोग और राज्यपाल से सरकार द्वारा बुलाए विशेष सत्र को रोकने की अपील अलोकतांत्रिक और अनुचित है। इसीलिए आयोग ने कोई नोटिस नहीं लिया और राज्यपाल ने भी मामले को संज्ञान लेने लायक नहीं समझा।
वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा ने कहा कि अगर कांग्रेस को प्रस्तावित बिल पर कोई आपत्ति है, तो उसे सत्र में हिस्सा लेकर अपना विरोध जताना चाहिए। उनके विधायकों के इस्तीफे अब तक स्वीकार नहीं किए गए हैं। पंजाब सरकार ने राज्यपाल की सलाह पर अध्यादेश का रास्ता छोड़ विशेष सत्र बुुलाकर सही फैसला किया है। ढींढसा ने कैप्टन से पूछा कि क्या वह ठेके पर तैनात 27 हजार मुलाजिमों को पक्की नौकरी देने के हक में नहीं हैं। या तो कैप्टन संविधान से अनजान हैं, या वह युवाओं को पक्का करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नाजुक हालात में भी कैप्टन अपने तानाशाही रवैये से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्हें हजारों मुलाजिमों के भविष्य के बजाय अपना और पंजाब का भविष्य तबाह करने वाली कांग्रेस का खयाल है।
कैप्टन ने अपने कार्यकाल में सरकारी और अर्द्ध सरकारी नौकरियों पर पूरी पाबंदी लगा दी थी। यहां तक कि निजी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर तलाशने को भी पहल नहीं की। अब वह अकाली-भाजपा सरकार को नौकरियां देने से रोक रहे हैं। चुनाव के समय लोगों को लाभ पहुंचाने के कैप्टन के आरोप को हास्यास्पद बताते हुए ढींढसा ने कहा कि यह आरोप वह शख्स लगा रहा है, जो किसानों के कर्ज माफ करने की स्थिति में न होने के बावजूद कर्ज माफी के फार्म भरवा रहा है। जो पंजाब के हर घर के एक नौजवान को नौकरी और बेरोजगारी भत्ता देने के कागज बांटता फिर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस, शिअद-भाजपा पर अध्यादेश पारित न करने को लेकर हाय तौबा मचा रही थी, अब सरकार ने विशेष सत्र बुलाया तो उसका भी विरोध शुरू कर दिया।
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वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा ने कहा कि अगर कांग्रेस को प्रस्तावित बिल पर कोई आपत्ति है, तो उसे सत्र में हिस्सा लेकर अपना विरोध जताना चाहिए। उनके विधायकों के इस्तीफे अब तक स्वीकार नहीं किए गए हैं। पंजाब सरकार ने राज्यपाल की सलाह पर अध्यादेश का रास्ता छोड़ विशेष सत्र बुुलाकर सही फैसला किया है। ढींढसा ने कैप्टन से पूछा कि क्या वह ठेके पर तैनात 27 हजार मुलाजिमों को पक्की नौकरी देने के हक में नहीं हैं। या तो कैप्टन संविधान से अनजान हैं, या वह युवाओं को पक्का करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नाजुक हालात में भी कैप्टन अपने तानाशाही रवैये से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्हें हजारों मुलाजिमों के भविष्य के बजाय अपना और पंजाब का भविष्य तबाह करने वाली कांग्रेस का खयाल है।
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कैप्टन ने अपने कार्यकाल में सरकारी और अर्द्ध सरकारी नौकरियों पर पूरी पाबंदी लगा दी थी। यहां तक कि निजी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर तलाशने को भी पहल नहीं की। अब वह अकाली-भाजपा सरकार को नौकरियां देने से रोक रहे हैं। चुनाव के समय लोगों को लाभ पहुंचाने के कैप्टन के आरोप को हास्यास्पद बताते हुए ढींढसा ने कहा कि यह आरोप वह शख्स लगा रहा है, जो किसानों के कर्ज माफ करने की स्थिति में न होने के बावजूद कर्ज माफी के फार्म भरवा रहा है। जो पंजाब के हर घर के एक नौजवान को नौकरी और बेरोजगारी भत्ता देने के कागज बांटता फिर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस, शिअद-भाजपा पर अध्यादेश पारित न करने को लेकर हाय तौबा मचा रही थी, अब सरकार ने विशेष सत्र बुलाया तो उसका भी विरोध शुरू कर दिया।
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