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कैप्टन अमरिंदर सिंह: प्रचंड मोदी लहर में कायम रखा था करिश्मा, मोदी के साथ आए तो मिली करारी शिकस्त
Thu, 10 Mar 2022 12:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
डिजिटल टीम, चंडीगढ़
डिजिटल टीम, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 10 Mar 2022 12:50 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह।
- फोटो :
twitter @capt_amarinder
विस्तार
प्रचंड मोदी लहर के बीच पंजाब में कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह इस बार अपना करिश्मा दोहरा नहीं सके। 2021 में पंजाब की सत्ता में उस समय एक भूचाल सा आ गया था जब प्रदेश में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी को भी अलविदा कह दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी एक नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस के नाम से बनाई और भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव मैदान में उतरे। अमरिंदर सिंह को पटियाला शहर सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
पूर्व पीएम राजीव गांधी के सहपाठी रहे कैप्टन ने 1980 में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। 80 के दशक में अकाली दल से नाराज होकर उन्होंने खुद की पार्टी बनाई थी लेकिन सफल नहीं हो सके थे। बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। भाजपा व सुखदेव सिंह ढींडसा से हाथ मिलाकर कैप्टन सत्ता की दहलीज तक पहुंचना चाहते थे मगर उनकी उम्मीदों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
आप ने भेदा कैप्टन का गढ़
पटियाला कैप्टन अमरिंदर सिंह का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर पिछले 20 सालों से कैप्टन का कब्जा है। 2002 से लेकर 2017 तक लगातार वह यहां से विधायक रहे हैं। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनावों में अमृतसर सीट से चुनाव लड़ने के कारण उन्हें पटियाला सीट छोड़नी पड़ी थी लेकिन तब भी यह सीट उनके परिवार में रह गई थी।
पत्नी परनीत कौर उपचुनाव जीत गई थीं लेकिन इस बार पंजाब की राजनीति में हालात बदले हैं। कांग्रेस की तरफ से पूर्व मेयर विष्णु शर्मा, आप से पूर्व मेयर अजीत पाल सिंह कोहली और अकाली दल से हरपाल जुनेजा को मैदान में उतारा। आप प्रत्याशी अजीत पाल सिंह कोहली ने अमरिंदर सिंह को करारी मात दी है।