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Chandigarh News: फ्लैट की अलॉटमेंट रद्द करना पड़ा भारी, रियल एस्टेट कंपनी पर हर्जाना और ब्याज भरने का आदेश
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चंडीगढ़। ग्राहक के फ्लैट की अलॉटमेंट रद्द करना एक रियल एस्टेट कंपनी को भारी पड़ गया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने मोहाली स्थित जाय होम्स कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कंपनी को फ्लैट कैंसिलेशन नोटिस रद्द करने, 75 हजार रुपये हर्जाना, 35 हजार रुपये मुकदमा खर्च और दो साल का नौ प्रतिशत ब्याज अदा करने के आदेश दिए हैं।
यह फैसला अंजना ठाकुर नामक महिला की शिकायत पर सुनाया गया है। उन्होंने जाय होम्स के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया था। अंजना ने वर्ष 2019 में सेक्टर-85, मोहाली स्थित जाय होम्स सोसायटी में एक फ्लैट खरीदा था। कंपनी के साथ 20 जून 2021 को एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत 31 जुलाई 2022 तक फ्लैट का पजेशन दिया जाना था। अंजना ने फ्लैट की कुल कीमत का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा, यानी 58.54 लाख रुपये पहले ही जमा करा दिए थे। कंपनी ने करीब 15 महीने की देरी से फ्लैट का पजेशन तो दे दिया, लेकिन बकाया राशि की जानकारी देने में लगातार टालमटोल करती रही। बकाया रकम जानना अंजना के लिए जरूरी था ताकि वह बैंक लोन के माध्यम से भुगतान कर सकें, लेकिन कंपनी ने जानबूझकर उन्हें जानकारी नहीं दी।
बाद में अंजना ने 5.35 लाख रुपये का चेक भी कंपनी को सौंप दिया, इसके बावजूद कंपनी ने उनसे गैरकानूनी तरीके से अतिरिक्त राशि और ब्याज की मांग शुरू कर दी। अंत में कंपनी ने फ्लैट की अलॉटमेंट ही रद्द कर दी।
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मामले की सुनवाई के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने अंजना के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को फ्लैट का कैंसिलेशन नोटिस रद्द करने और ग्राहक के नाम पर सेल डीड कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा ग्राहकों के साथ इस तरह का व्यवहार उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह फैसला अंजना ठाकुर नामक महिला की शिकायत पर सुनाया गया है। उन्होंने जाय होम्स के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया था। अंजना ने वर्ष 2019 में सेक्टर-85, मोहाली स्थित जाय होम्स सोसायटी में एक फ्लैट खरीदा था। कंपनी के साथ 20 जून 2021 को एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत 31 जुलाई 2022 तक फ्लैट का पजेशन दिया जाना था। अंजना ने फ्लैट की कुल कीमत का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा, यानी 58.54 लाख रुपये पहले ही जमा करा दिए थे। कंपनी ने करीब 15 महीने की देरी से फ्लैट का पजेशन तो दे दिया, लेकिन बकाया राशि की जानकारी देने में लगातार टालमटोल करती रही। बकाया रकम जानना अंजना के लिए जरूरी था ताकि वह बैंक लोन के माध्यम से भुगतान कर सकें, लेकिन कंपनी ने जानबूझकर उन्हें जानकारी नहीं दी।
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बाद में अंजना ने 5.35 लाख रुपये का चेक भी कंपनी को सौंप दिया, इसके बावजूद कंपनी ने उनसे गैरकानूनी तरीके से अतिरिक्त राशि और ब्याज की मांग शुरू कर दी। अंत में कंपनी ने फ्लैट की अलॉटमेंट ही रद्द कर दी।
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मामले की सुनवाई के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने अंजना के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को फ्लैट का कैंसिलेशन नोटिस रद्द करने और ग्राहक के नाम पर सेल डीड कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा ग्राहकों के साथ इस तरह का व्यवहार उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।