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विश्वास नहीं होता माता-पिता हमारे बीच नहीं रहे...छलक पड़े जीव मिल्खा सिंह के आंसू
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बरसी के दौरान मौजूद परिवार।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। मुझे अब भी विश्वास नहीं होता कि माता-पिता नहीं रहे। उन्होंने मुझे जीवन जीने का तरीका बताया। मेरा परिवार सौभाग्यशाली है कि उन्हें ऐेसे माता-पिता मिले। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। ऐसा कहते ही जीव मिल्खा सिंह के आंखों में आंसू छलक गए। यह बात उन्होंने पिता मिल्खा सिंह और माता निर्मल मिल्खा सिंह की पहली बरसी के दौरान रविवार को कही।
इंडस्ट्रियल एरिया के एक होटल में उनकी बरसी मनाई गई। इस मौके पर बेटे जीव मिल्खा सिंह, उनकी पत्नी कुदरत कौर, बेटा हरजय मिल्खा सिंह के साथ बहनें डॉ. मोना और सोनिया शामिल रहीं। वहीं परिवार के अन्य करीबी सदस्य भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे थे। बता दें मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी का निधन पिछले साल जून के महीने में हुआ था। दोनों कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। इस बीमारी से जूझते हुए पहले निर्मल मिल्खा सिंह 13 जून और इसके बाद मिल्खा सिंह 18 जून को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे।
डाक्यूमेंट्री देखते हुए भावुक हुआ परिवार
बरसी के दौरान बड़े परदे पर स्क्रीन के माध्यम से मिल्खा सिंह और निर्मल मिल्खा सिंह के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। इसमें पहले मिल्खा सिंह के एक धावक के तौर पर उनका सफर दिखाया गया। देश और विदेशों में उनके एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दौड़ते, अभ्यास और परिवार के सदस्यों के साथ उनकी तस्वीरें दिखाई गईं, वहीं मिल्खा सिंह और निर्मल मिल्खा सिंह के शादी के लम्हें को भी दिखाया गया। इस डॉक्यूमेंट्री को देखते हए जीव मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी के साथ दोनों बहनें भावुक हो गईं।
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मांवां हमेशा ठंडीयां छावां हुंदीआं ने ते पेओ तत्ते घिओ हुंदे
एक वाक्य का जिक्र करते हुए जीव मिल्खा सिंह ने बताया कि एक बार रात के डिनर पर वे माता-पिता के साथ बैठे हुए थे तो उन्होंने पिता से पूछा था कि आप इतने सख्त है और मां उतनी ही शांत स्वभाव की हैं। इस पर उन्होंने अर्थपूर्ण और समझदारी तरीके से जवाब देते हुए कहा कि मांवां हमेशा ठंडीयां छावां हुंदीआं ने ते पेओ तत्ते घिओ हुंदे।
यह लोग पहुंचे श्रृद्धांजलि देने
इस मौके पर यूटीसीए के अध्यक्ष संजय टंडन सहित अर्जुन अवार्डी गोल्फर हरमीत काहलो, पूर्व शूटर और अर्जुन अवार्डी गुरबीर सिंह संधू, निगम की पूर्व मनोनित पार्षद ज्योसना विग, पीजीटीआई और चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के पदाधिकारी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
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इंडस्ट्रियल एरिया के एक होटल में उनकी बरसी मनाई गई। इस मौके पर बेटे जीव मिल्खा सिंह, उनकी पत्नी कुदरत कौर, बेटा हरजय मिल्खा सिंह के साथ बहनें डॉ. मोना और सोनिया शामिल रहीं। वहीं परिवार के अन्य करीबी सदस्य भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे थे। बता दें मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी का निधन पिछले साल जून के महीने में हुआ था। दोनों कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। इस बीमारी से जूझते हुए पहले निर्मल मिल्खा सिंह 13 जून और इसके बाद मिल्खा सिंह 18 जून को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे।
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डाक्यूमेंट्री देखते हुए भावुक हुआ परिवार
बरसी के दौरान बड़े परदे पर स्क्रीन के माध्यम से मिल्खा सिंह और निर्मल मिल्खा सिंह के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। इसमें पहले मिल्खा सिंह के एक धावक के तौर पर उनका सफर दिखाया गया। देश और विदेशों में उनके एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दौड़ते, अभ्यास और परिवार के सदस्यों के साथ उनकी तस्वीरें दिखाई गईं, वहीं मिल्खा सिंह और निर्मल मिल्खा सिंह के शादी के लम्हें को भी दिखाया गया। इस डॉक्यूमेंट्री को देखते हए जीव मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी के साथ दोनों बहनें भावुक हो गईं।
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मांवां हमेशा ठंडीयां छावां हुंदीआं ने ते पेओ तत्ते घिओ हुंदे
एक वाक्य का जिक्र करते हुए जीव मिल्खा सिंह ने बताया कि एक बार रात के डिनर पर वे माता-पिता के साथ बैठे हुए थे तो उन्होंने पिता से पूछा था कि आप इतने सख्त है और मां उतनी ही शांत स्वभाव की हैं। इस पर उन्होंने अर्थपूर्ण और समझदारी तरीके से जवाब देते हुए कहा कि मांवां हमेशा ठंडीयां छावां हुंदीआं ने ते पेओ तत्ते घिओ हुंदे।
यह लोग पहुंचे श्रृद्धांजलि देने
इस मौके पर यूटीसीए के अध्यक्ष संजय टंडन सहित अर्जुन अवार्डी गोल्फर हरमीत काहलो, पूर्व शूटर और अर्जुन अवार्डी गुरबीर सिंह संधू, निगम की पूर्व मनोनित पार्षद ज्योसना विग, पीजीटीआई और चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के पदाधिकारी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।