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किसानों को धान का समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रहा
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 14 Sep 2014 12:29 AM IST
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इस्माईलाबाद। अनाजमंडी में धान की आवक शुरू हो गई है। अनाजमंडी में शनिवार को करीब एक हजार क्विंटल धान पहुंचा।
सरकारी खरीद न होने के चलते किसानों को अपना पीआर किस्म का धान समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसान प्रकाश सिंह, रामेश्वर शर्मा, जसविंद्र ठोल, नछत्तर नैन आदि ने बताया कि आलू की फसल लेने के लिए किसानों ने अगेती किस्म की धान 6129 लगाई थी। यह फसल 90 से 95 दिन में पक कर तैयार हो जाती है।
यह फसल अब मंडियों में पहुंच रही है, लेकिन सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है।
सरकार ने इस धान का समर्थन मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल रखा है, जबकि अनाजमंडी में व्यापारी इसको 1200 से 1250 रुपये तक खरीद रहे हैं।
सरकार की गलत नीति के कारण किसानों को चार से पांच हजार रुपये प्रति एकड़ पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को धान की फसल को देखते हुए सरकारी खरीद जल्द शुरू करानी चाहिए ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
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सरकारी खरीद न होने के चलते किसानों को अपना पीआर किस्म का धान समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसान प्रकाश सिंह, रामेश्वर शर्मा, जसविंद्र ठोल, नछत्तर नैन आदि ने बताया कि आलू की फसल लेने के लिए किसानों ने अगेती किस्म की धान 6129 लगाई थी। यह फसल 90 से 95 दिन में पक कर तैयार हो जाती है।
यह फसल अब मंडियों में पहुंच रही है, लेकिन सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है।
सरकार ने इस धान का समर्थन मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल रखा है, जबकि अनाजमंडी में व्यापारी इसको 1200 से 1250 रुपये तक खरीद रहे हैं।
सरकार की गलत नीति के कारण किसानों को चार से पांच हजार रुपये प्रति एकड़ पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को धान की फसल को देखते हुए सरकारी खरीद जल्द शुरू करानी चाहिए ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
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