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नई तकनीक: पिंजौर की गोशाला ने अपनाई भ्रूण प्रत्यारोपण विधि, अब बछड़ी बनेगी 20 लीटर तक दूध देने वाली गाय
Thu, 23 Sep 2021 11:23 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 23 Sep 2021 11:23 AM IST
सार
पंचकूला की गोशाला ने नई तकनीक ईजाद की है। हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग के अनुसार देश में पहली बार आई इस तकनीक का परीक्षण यहां की सात गायों पर किया गया है। नई तकनीक से जो बछड़ी पैदा होगी, वह 20 लीटर तक दूध देने वाली गाय बनेगी।
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गोशाला।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
हरियाणा की पिंजौर स्थित गोशाला में अपनाई गई भ्रूण प्रत्यारोपण विधि गोपालकों के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है। इस तकनीक को श्री कामधेनु गोशाला की 7 गायों में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। खास बात यह है कि इस विधि से पैदा होने वाली बछड़ी कम से कम 18 से 20 लीटर दूध देने वाली गाय बनेगी। हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने बताया कि यह तकनीक हिंदुस्तान की किसी भी गोशाला में पहली बार अपनाई गई है, जो गोपालकों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
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स्वावलंबी बनेंगी हरियाणा की गोशालाएं
गर्ग ने बताया कि इस तकनीक से उत्पन्न गोवंश की बाजार में लाखों रुपये कीमत मिलेगी, जिससे हरियाणा की गोशालाएं स्वावलंबी बनने की दिशा में अग्रसर होंगी। यह तकनीक गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विश्वविद्यालय लुधियाना द्वारा प्रारंभ की गई है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह का आभार व्यक्त किया।
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गोशाला की सात गायों में भ्रूण प्रत्यारोपण
हरियाणा गोसेवा आयोग के सचिव डॉ. चिरंतन कादयान ने बताया कि इस विधि को आमतौर पर उच्च गुणवत्ता वाली गायों पर अपनाया जाता है। इस एंब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी के तहत उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली साहीवाल नस्ल की गाय का भ्रूण तैयार करके यहां गोशाला की 7 गायों में भ्रूण प्रत्यारोपण किया है। अभी आने वाले समय में और भी उच्च गुणवत्ता के भ्रूण तैयार करके प्रत्यारोपित किए जाएंगे।
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जानिए कैसे किया जाता है कृत्रिम गर्भाधान
डॉ. कादयान ने इस तकनीक के बारे में बताया कि उच्च दुग्ध उत्पादन वाली देसी गाय को एक प्रक्रिया द्वारा हीट में लाकर गाय के गर्भधारण करने की स्थिति बनने पर उच्च गुणवत्ता वाले सांड के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता है। ऐसी विधि से भ्रूण तैयार होने पर चयनित गाय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तकनीक से काफी अच्छी गुणवत्ता वाले गोवंश पैदा होते हैं।