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कैग की रिपोर्ट ने खोली हरियाणा सरकार की पोल
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 06 Mar 2014 01:33 PM IST
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हरियाणा के प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) की सरकारी विभागों की ऑडिट रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर है।
रिपोर्ट में कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। कहीं सरकार ने राजस्व की उचित वसूली नहीं की तो कहीं उचित भुगतान नहीं किए हैं।
प्रदेश के प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) ओंकार नाथ ने एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य के सरकारी विभागों की अनियमितताओं को उजागर किया है।
वर्ष 2012-13 की ऑडिट रिपोर्ट पर ओंकार नाथ ने कहा कि करीब 636.10 करोड़ रुपये की राशि कर में कमी, ब्याज व पेनल्टी में कमी, आबकारी शुल्क एवं माल कर, मोटर वाहनों पर करों की कमी और रिमांड व रीविजन मामलों के निपटान में विलंब की वजह से हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिक्री कर, वैट, स्टांप शुल्क तथा पंजीकरण फीस, राज्य उत्पादन शुल्क, वाहन कर के 7508 मामलों में 1735.68 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
133 डीलरों से गलत दर से टैक्स वसूला गया, जिस कारण राज्य सरकार को 89.39 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
ओंकारनाथ ने बताया कि राज्य उत्पाद शुल्क में विभाग ने तीन साल बीतने के बाद भी 119 लाइसेंसधारियों से लाइसेंस फीस नहीं वूसली, इससे सरकार को करीब पांच करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
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विभाग की ओर से 144 सहकारी परिवहन समितियों की बसों के संबंध में 2.02 करोड़ रुपये के यात्री कर की मांग नहीं की गई है।
वहीं वित्तीय सुधारों में भी राज्य सरकार पीछे है। राजस्व घाटा 2011-12 तक शून्य तक लाने का लक्ष्य था, जिसे 2014-15 तक शून्य के स्तर पर रखना था, लेकिन राजस्व घाटा कम होने की बजाय बढ़ा है।
ब्याज भुगतान भी 19 प्रतिशत तक बढ़ गए और इस अवधि में 66 मूलभूत संरचना परियोजनाएं अभी तक भी पूरी नहीं हो पाई हैं।
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रिपोर्ट में कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। कहीं सरकार ने राजस्व की उचित वसूली नहीं की तो कहीं उचित भुगतान नहीं किए हैं।
प्रदेश के प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) ओंकार नाथ ने एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य के सरकारी विभागों की अनियमितताओं को उजागर किया है।
वर्ष 2012-13 की ऑडिट रिपोर्ट पर ओंकार नाथ ने कहा कि करीब 636.10 करोड़ रुपये की राशि कर में कमी, ब्याज व पेनल्टी में कमी, आबकारी शुल्क एवं माल कर, मोटर वाहनों पर करों की कमी और रिमांड व रीविजन मामलों के निपटान में विलंब की वजह से हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिक्री कर, वैट, स्टांप शुल्क तथा पंजीकरण फीस, राज्य उत्पादन शुल्क, वाहन कर के 7508 मामलों में 1735.68 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
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133 डीलरों से गलत दर से टैक्स वसूला गया, जिस कारण राज्य सरकार को 89.39 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
ओंकारनाथ ने बताया कि राज्य उत्पाद शुल्क में विभाग ने तीन साल बीतने के बाद भी 119 लाइसेंसधारियों से लाइसेंस फीस नहीं वूसली, इससे सरकार को करीब पांच करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
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विभाग की ओर से 144 सहकारी परिवहन समितियों की बसों के संबंध में 2.02 करोड़ रुपये के यात्री कर की मांग नहीं की गई है।
वहीं वित्तीय सुधारों में भी राज्य सरकार पीछे है। राजस्व घाटा 2011-12 तक शून्य तक लाने का लक्ष्य था, जिसे 2014-15 तक शून्य के स्तर पर रखना था, लेकिन राजस्व घाटा कम होने की बजाय बढ़ा है।
ब्याज भुगतान भी 19 प्रतिशत तक बढ़ गए और इस अवधि में 66 मूलभूत संरचना परियोजनाएं अभी तक भी पूरी नहीं हो पाई हैं।