कैग रिपोर्ट में खुलासाः पंजाब में विकास कार्यों पर लगा है ब्रेक, फंड इस्तेमाल हुई घोर लापरवाही

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Fri, 28 Feb 2020 09:54 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला

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पंजाब विधानसभा में वीरवार को पेश कई गई भारत के लेखा निरीक्षक व महालेखा परीक्षक (कैग) की 2018-19 में सामने आया है कि पंजाब में विकास कार्यों पर ब्रेक लग चुका है। राज्य सरकार राजकोषीय जिम्मेदारियों के निर्वहन और चौथे वित्त कमीशन द्वारा सुझाए बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 को अपनाने में असफल रही है। राज्य सरकार के 33 पीएसयूज में से 27 पीएसयूज के 16 खातों ने घाटा दिखाया, जबकि चार नो लॉस नो प्राफिट की स्थिति में हैं।
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फंड का इस्तेमाल करने में कई सरकारी विभागों ने लापरवाही दिखाई, जिसमें कई विभागों ने अपना फंड वित्त वर्ष के अंतिम महीने में ही खर्च किया और सालभर पैसा दबाए रखा। कैग की रिपोर्ट में पंजाब भले ही राजकोषीय सुधार के पथ पर है, लेकिन यह एक राजस्व घाटे वाला राज्य बन गया है। 2017-18 के दौरान, राजस्व घाटे में पिछले वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2013-14 से 2017-18 की अवधि में राजस्व प्राप्ति और पूंजी प्राप्तियां क्रमश: 35104 करोड़ और 11221 करोड़ से बढ़कर 53010 करोड़ और 18590 करोड़ हो गई।
इस तरह, 2013-18 में, राजस्व प्राप्तियां 10.62 प्रतिशत की वार्षिक औसत विकास दर से बढ़ीं हैं। हालांकि इस रफ्तार से राजस्व व्यय भी बढ़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में चालू वर्ष के दौरान राजस्व व्यय में 7169 करोड़ (12.96 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है, लेकिन पूंजीगत व्यय से सरकार ने हाथ खींचा है। पिछले वर्ष की तुलना में 2017-18 के दौरान पूंजीगत व्यय 1994 करोड़ (45.88 प्रतिशत) घटा। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य सरकार ने अपने बजट अनुमानों के अनुसार परिसंपत्ति निर्माण को उतनी प्राथमिकता नहीं दी।
चालू वर्ष के दौरान पूंजीगत व्यय राज्य के बजट में किए गए अनुमानों की तुलना में 3805 करोड़ कम रहा। इसी तरह, सामाजिक क्षेत्र पर राज्य के खर्च में कुल व्यय का अनुपात 2013-14 में 27.83 प्रतिशत से घटकर 2017-18 में 24.99 प्रतिशत हो गया। पिछले वर्ष की तुलना में चालू वर्ष के दौरान ऋण और अग्रिम के संवितरण में 40604 करोड़ (98.16 प्रतिशत) की कमी आई है।
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