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खुलासा: पंजाब में 2421 करोड़ की अनियमितताएं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 21 Mar 2015 09:43 AM IST
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पंजाब के विभिन्न विभागों में वर्ष 2013-14 के दौरान 2421.76 करोड़ रुपये की अनियमितताएं सामने आई हैं। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) की रिपोर्टों में इन कमियों का उल्लेख हुआ है।
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कैग रिपोर्ट्स शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में पेश की गईं। यह रिपोर्टें गैर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, गैर सार्वजनिक उपक्रमों और राजस्व से संबंधित हैं। इनमें 2012 के दौरान पंजाब सरकार की ओर से खरीदे गए हेलीकॉप्टर की खरीद पर भी उंगली उठाई गई है।
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पंजाब के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल जगबंस सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि गैर सार्वजनिक क्षेत्र के में सोशल, जनरल एवं आर्थिक क्षेत्रों के संबंध में की गई लेखा जांच में 294.26 करोड़ रुपये की अनियमितताएं सामने आईं।
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इनमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के 1.17 करोड़ रुपये अलॉटिड की बजाय किसी अन्य काम पर खर्च किए जाने सहित प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी, साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एन्वायरनमेंट से संबंधित कई गड़बड़ियां शामिल हैं। सोशल सिक्योरिटी, वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट विभाग में चार स्कीमों के 37.50 करोड़ रुपये का सही इस्तेमाल न होने, आंगनबाड़ी केंद्रों में से अधिकतर में पेयजल और शौचालयों का प्रबंध न होना आदि मुख्य गड़बड़ियां सामने आईं।
ताक पर रख करोड़ों खर्च किए
2012 में हेलीकॉप्टर की खरीद करते वक्त नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से नियमों को ताक पर रखकर 32.62 करोड़ रुपये खर्च करने की बात रिपोर्ट में कही गई है। जगबंस सिंह ने कहा कि हेलीकॉप्टर खरीदते वक्त न तो स्पेसिफिकेशंस का कोई ध्यान रखा गया और न ही टेंडर कॉल किए गए। वहीं, शिक्षा विभाग में जरूरतमंद छात्रों के लिए निर्धारित किए गए केंद्रीय सहायता के 17.38 करोड़ रुपये भी उन तक नहंी पहुंच पाए। वहीं, दवाओं और प्री-स्कूल एजुकेशन किट्स की सप्लाई में 20 से 75 फीसदी तक की कमी थी।
नहीं हुई लोन रिकवरी
पुडा में अनियमितताओं के चलते 221.64 करोड़ रुपये के लोन की रिकवरी नहीं हो पाई। सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन विभाग सहित अनुसूचित जातियों एवं पिछड़ी श्रेणियों के लिए पेंशन के संबंध में भी गड़बड़ियों का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। राजस्व क्षेत्र में 221.22 करोड़ रुपये की गड़बड़ियों का उल्लेख अलग-अलग मदों में किया गया है। सेल्स टैक्स/वैट के संबंध में 324 यूनिट्स का रिकॉर्ड चेक करने पर सामने आया कि 61 हजार 882 केसों में 477 करोड़ की राजस्व हानि थी। वहीं, 58 स्थानों पर रिहायशी प्रॉपर्टी और कृषि भूमि के वर्गीकृत न होने की वजह से 2.53 करोड़ रुपये का नुकसान होने पर ऐतराज जताया गया है। इसके साथ ही मिनी बसों, शिक्षण संस्थानों की बसों, टूरिस्ट बसों आदि से संबंधित 7.18 करोड़ रुपये का टैक्स इनके मालिकों से वसूला ही नहीं गया।
दूर-दराज प्रदेशों को सप्लाई की जांच हो
एक जगह कैग ने 49 डीलरों को डेडलाइन समाप्त होने के बाद 3.24 करोड़ रुपये जारी किए जाने पर ऐतराज जताया गया है। वहीं, इनमें से 39 डीलरों ने आठ दो पहिया वाहनों पर तमिलनाडू, असम, महाराष्ट्र, झारखंड आदि प्रदेशों में 4.53 करोड़ रुपये का सामान सप्लाई करने की बात कही है। कैग ने इसकी जांच की सिफारिश की है।
बचाए जा सकते थे 1906 करोड़
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013-14 के दौरान सार्वजनिक उपक्रमों पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और माइक्रो हाइडल प्रोजेक्टों में 1902 करोड़ रुपये का ऐसा खर्च हुआ जो बचाया जा सकता था। यह नियमों व प्रोसीजर को फॉलो न करने की वजह से हुआ।