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कैब-ऑटो की 12 को हड़ताल, आपात सेवा में पहुंचेंगे चालक
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चंडीगढ़। 12 अप्रैल को घर से निकलने से पहले खुद की गाड़ी की व्यवस्था कर लें क्योंकि कैब व ऑटो चालकों ने एक साथ हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी है। हालांकि आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं के लिए कैब व ऑटो चालक तैयार रहेंगे। ट्राइसिटी कैब-ऑटो संयुक्त मोर्चा एग्रीगेटर कंपनी और प्रशासन के खिलाफ एसटीए दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने जा रहा है। इस दौरान लगभग 150 लोगों का दल स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को एक पत्र देगा, जिसमें कुछ सवाल पूछे जाएंगे।
मोर्चा के समन्वयक विक्रम पुंडीर ने सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में शनिवार को बताया कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन एग्रीगेटर कंपनी किराया नहीं बढ़ा रही है, जिससे ग्राहक और चालक के बीच तालमेल नहीं बन पाता है। चालक ग्राहक को अचानक सेवा देने से मना कर देता है, जिससे उसे समस्या होती है। देश में पहली बार कैब और ऑटो चालक एक मंच पर आए हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई से कैब व ऑटो चालकों के सामने रोजी-रोटी बंद होने के कगार पर है। उनकी सुध न एग्रीगेटर कंपनियां और न प्रशासन लेता है। प्रशासन सिर्फ रेट बढ़ाने की अधिसूचना जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेता है, इस आदेश पर अमल हुआ या नहीं यह कोई नहीं देखता है। इस मौके पर अनिल कुमार, इंद्रजीत सिंह मन्नू, सोमबीर तोशाम, मुकेश कुमार, अमृत संधू, मैक्स राजपूत सहित कई कैब व ऑटो चालक मौजूद रहे।
ये हैं मांगें
- प्रशासन अपनी अधिसूचना में बढ़ी हुई दरों को एग्रीगेटर कंपनी से लागू करवाए।
- एसटीए व एग्रीगेटर कंपनियों के झगड़े में कैब व ऑटो ड्राइवर को न पीसा जाए।
- कोई कर या फीस बकाया है तो एग्रीगेटर कंपनी भुगतान करे।
- एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से गलत तरीके से बंद की गई चालकों की आईडी को तत्काल खोला जाए।
- एप में ग्राहक की बुकिंग से पहले चालकों को जगह और उसका किराया दिखा जाए ताकि वह अपनी सेवाओं को सुनिश्चित कर सकें।
- सीटीयू बस स्टॉप की तर्ज पर पिक एंड ड्राप स्टॉप बनाए जाएं।
- किराए में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
- एयरपोर्ट और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी तक जाने पर 5 किमी का अतिरिक्त किराया लिया जाए।
- दिल्ली की तर्ज पर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए।
- पिक लोकेशन 2 किमी से अधिक होने पर 10 रुपये प्रति किमी जोड़े जाएं।
- कैब ऑपरेटर और पार्टनर का 10 लाख रुपये का बीमा हो।
प्रशासन से पूछेंगे सवाल
- पिक और ड्रॉप चालान क्या है विस्तार से बताएं।
- क्या एग्रीगेटर कंपनी की ओर से ली जा रही जीएसटी व कमीशन फीस सरकार की ओर से तय की गई है।
- प्रशासन की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि अन्य राज्यों के वाहनों को तीन माह के लिए एक हजार रुपये जमा कराना होगा। यह राज्य का कर है या एग्रीगेटर कंपनी का। यह राज्य का कर है तो इसे सीमाओं पर क्यों नहीं लिया जाता है और एग्रीगेटर कंपनी का कर है तो इसे चालक क्यों देगा।
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- मोटर व्हीकल अधिनियम के अनुसार कोई एग्रीगेटर कंपनी नियमों का पालन नहीं करती है तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। चंडीगढ़ में यह नियम क्यों लागू नहीं है और यह नियम यहां लागू है तो फीस जमा न कराने वाली एग्रीगेटर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
- 2017 से पहले एग्रीगेटर कंपनियों के साथ जो अनुबंध हुआ था, उसमें इस फीस को किसने जमा कराया, यह जानकारी दी जाए।
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मोर्चा के समन्वयक विक्रम पुंडीर ने सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में शनिवार को बताया कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन एग्रीगेटर कंपनी किराया नहीं बढ़ा रही है, जिससे ग्राहक और चालक के बीच तालमेल नहीं बन पाता है। चालक ग्राहक को अचानक सेवा देने से मना कर देता है, जिससे उसे समस्या होती है। देश में पहली बार कैब और ऑटो चालक एक मंच पर आए हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई से कैब व ऑटो चालकों के सामने रोजी-रोटी बंद होने के कगार पर है। उनकी सुध न एग्रीगेटर कंपनियां और न प्रशासन लेता है। प्रशासन सिर्फ रेट बढ़ाने की अधिसूचना जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेता है, इस आदेश पर अमल हुआ या नहीं यह कोई नहीं देखता है। इस मौके पर अनिल कुमार, इंद्रजीत सिंह मन्नू, सोमबीर तोशाम, मुकेश कुमार, अमृत संधू, मैक्स राजपूत सहित कई कैब व ऑटो चालक मौजूद रहे।
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ये हैं मांगें
- प्रशासन अपनी अधिसूचना में बढ़ी हुई दरों को एग्रीगेटर कंपनी से लागू करवाए।
- एसटीए व एग्रीगेटर कंपनियों के झगड़े में कैब व ऑटो ड्राइवर को न पीसा जाए।
- कोई कर या फीस बकाया है तो एग्रीगेटर कंपनी भुगतान करे।
- एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से गलत तरीके से बंद की गई चालकों की आईडी को तत्काल खोला जाए।
- एप में ग्राहक की बुकिंग से पहले चालकों को जगह और उसका किराया दिखा जाए ताकि वह अपनी सेवाओं को सुनिश्चित कर सकें।
- सीटीयू बस स्टॉप की तर्ज पर पिक एंड ड्राप स्टॉप बनाए जाएं।
- किराए में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
- एयरपोर्ट और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी तक जाने पर 5 किमी का अतिरिक्त किराया लिया जाए।
- दिल्ली की तर्ज पर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए।
- पिक लोकेशन 2 किमी से अधिक होने पर 10 रुपये प्रति किमी जोड़े जाएं।
- कैब ऑपरेटर और पार्टनर का 10 लाख रुपये का बीमा हो।
प्रशासन से पूछेंगे सवाल
- पिक और ड्रॉप चालान क्या है विस्तार से बताएं।
- क्या एग्रीगेटर कंपनी की ओर से ली जा रही जीएसटी व कमीशन फीस सरकार की ओर से तय की गई है।
- प्रशासन की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि अन्य राज्यों के वाहनों को तीन माह के लिए एक हजार रुपये जमा कराना होगा। यह राज्य का कर है या एग्रीगेटर कंपनी का। यह राज्य का कर है तो इसे सीमाओं पर क्यों नहीं लिया जाता है और एग्रीगेटर कंपनी का कर है तो इसे चालक क्यों देगा।
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- मोटर व्हीकल अधिनियम के अनुसार कोई एग्रीगेटर कंपनी नियमों का पालन नहीं करती है तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। चंडीगढ़ में यह नियम क्यों लागू नहीं है और यह नियम यहां लागू है तो फीस जमा न कराने वाली एग्रीगेटर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
- 2017 से पहले एग्रीगेटर कंपनियों के साथ जो अनुबंध हुआ था, उसमें इस फीस को किसने जमा कराया, यह जानकारी दी जाए।