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पंजाब में पहली बार होंगे उपचुनाव और कांग्रेस को देनी होगी 'अग्निपरीक्षा', फूलका ने बढ़ाई मुश्किलें
Mon, 09 Sep 2019 12:14 PM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 09 Sep 2019 12:14 PM IST
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सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के सियासी इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई सरकार एक साथ चार उप चुनाव कराने जा रही है। इतनी ज्यादा संख्या में उप चुनावों ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ये उप चुनाव सरकार की अग्नि परीक्षा बन गए हैं। शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल और केंद्रीय राज्यमंत्री सोम प्रकाश के लोकसभा में जाने के बाद जलालाबाद और फगवाड़ा सीटें खाली हुई थीं। सरकार इन दोनों पर ही चुनाव करवाना भी चाहती थी। ताकि आसानी से दबाव और मशीनरी का प्रयोग किया जा सके।
आम आदमी पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टियों में गए विधायकों पर इसी लिए कोई फैसला नहीं किया जा रहा था। दाखा के विधायक एचएस फूलका ने चेतावनी दे दी कि अगर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया तो वह सुप्रीम कोर्ट चले जाएंगे। आनन-फानन में लंबे समय से लटका इस्तीफा आखिर मंजूर कर लिया गया। मुकेरियां के विधायक रजनीत बब्बी के आकस्मिक निधन से एक और सीट खाली हो गई। अब चारों उप चुनाव एक साथ ही हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ होंगे। चार जगह लड़ाई लड़ना आसान नहीं है।
सरकार की ताकत बंट जाएगी। जलालाबाद जैसी हाई प्रोफाइल सीट के लिए तो कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार तक नहीं है। मुकेरियां में भी कोई लीडरशिप तैयार नहीं की गई थी। इन चारों में पार्टी के पास सिर्फ एक ही सीट थी। कांग्रेस के लिए समस्या यह है कि अगर एक सीट भी हारी, तो काफी फजीहत होगी। साथ ही उसका असर अगले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। इसे लेकर पार्टी में गंभीर मंथन चल रहा है।
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आम आदमी पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टियों में गए विधायकों पर इसी लिए कोई फैसला नहीं किया जा रहा था। दाखा के विधायक एचएस फूलका ने चेतावनी दे दी कि अगर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया तो वह सुप्रीम कोर्ट चले जाएंगे। आनन-फानन में लंबे समय से लटका इस्तीफा आखिर मंजूर कर लिया गया। मुकेरियां के विधायक रजनीत बब्बी के आकस्मिक निधन से एक और सीट खाली हो गई। अब चारों उप चुनाव एक साथ ही हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ होंगे। चार जगह लड़ाई लड़ना आसान नहीं है।
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सरकार की ताकत बंट जाएगी। जलालाबाद जैसी हाई प्रोफाइल सीट के लिए तो कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार तक नहीं है। मुकेरियां में भी कोई लीडरशिप तैयार नहीं की गई थी। इन चारों में पार्टी के पास सिर्फ एक ही सीट थी। कांग्रेस के लिए समस्या यह है कि अगर एक सीट भी हारी, तो काफी फजीहत होगी। साथ ही उसका असर अगले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। इसे लेकर पार्टी में गंभीर मंथन चल रहा है।
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दावेदारों ने लगाई दौड़
चारों हलकों में टिकट केदावेदारों ने दौड़ तेज कर दी है। हर कोई सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके करीबियों के चक्कर काट रहा है क्योंकि उम्मीदवार सीएम ने ही तय करने हैं। जलालाबाद से पार्टी के पुराने नेता हंसराज जोसन की दावेदारी को यूथ कोटे के जगदीप कंबोज गोल्डी चुनौती दे रहे हैं। यहां से पार्टी सुनील जाखड़ पर भी दांव खेल सकती है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब जीतने के बाद जाखड़ की कैबिनेट सीट पक्की होगी। फगवाड़ा में नया ट्विस्ट आया है।
यहां से परंपरागत दावेदार जोगिंदर मान और बलबीर राजा सोढी परिवार हर बार एक-दूसरे को हराते रहे हैं। इसलिए आईएएस अफसर बलविंदर सिंह धालीवाल का नाम आगे बढ़ाया गया है। वह दो-तीन महीने से तैयारी भी कर रहे हैं। दाखा से पिछला चुनाव हारे मेजर सिंह भैणी और मलकीत दाखा को सीएम के ओएसडी दमनजीत मोही से कड़ी चुनौती मिल रही है। दाखा को सांसद रवनीत बिट्टू का साथ मिल सकता है। मुकेरियां में रजनीश बब्बी के बाद पार्टी केपास कोई चेहरा नहीं है। उनकी पत्नी या बेटे सब्यसाची को टिकट दिया जा सकता है।
कोड की भेंट चढ़ सकती है चेयरमैन की कुर्सी
पंजाब के चार उप चुनाव ने उन लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जिन्हें किसी निगम या बोर्ड का चेयरमैन बनने की उम्मीद है। हरियाणा और पंजाब उप चुनाव केलिए आचार संहिता इस सप्ताह में कभी भी लग सकती है। अगर उससे पहले सरकार ने चेयरमैन नियुक्त न किया तो कुछ महीने केलिए लटक जाएंगे। उसके बाद भी पता नहीं कि कुर्सी मिले या नहीं।
लोकसभा चुनाव का कोड हटने के बाद से ही दावेदार सरगर्म हो गए थे। काफी लंबी कवायद करने के बाद किसी तरह चेयरमैन बनने का सपना साकार होने वाला था। तीन महीने बाद हो सकता है कि समीकरण ही बदल जाएं और उनका नाम ही लिस्ट से बाहर हो जाए। इनमें चेयरमैन के अलावा मेंबर भी शामिल हैं। साथ ही जिला परिषद केचेयरमैन की नियुक्ति भी लटकी हुई है।
यहां से परंपरागत दावेदार जोगिंदर मान और बलबीर राजा सोढी परिवार हर बार एक-दूसरे को हराते रहे हैं। इसलिए आईएएस अफसर बलविंदर सिंह धालीवाल का नाम आगे बढ़ाया गया है। वह दो-तीन महीने से तैयारी भी कर रहे हैं। दाखा से पिछला चुनाव हारे मेजर सिंह भैणी और मलकीत दाखा को सीएम के ओएसडी दमनजीत मोही से कड़ी चुनौती मिल रही है। दाखा को सांसद रवनीत बिट्टू का साथ मिल सकता है। मुकेरियां में रजनीश बब्बी के बाद पार्टी केपास कोई चेहरा नहीं है। उनकी पत्नी या बेटे सब्यसाची को टिकट दिया जा सकता है।
कोड की भेंट चढ़ सकती है चेयरमैन की कुर्सी
पंजाब के चार उप चुनाव ने उन लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जिन्हें किसी निगम या बोर्ड का चेयरमैन बनने की उम्मीद है। हरियाणा और पंजाब उप चुनाव केलिए आचार संहिता इस सप्ताह में कभी भी लग सकती है। अगर उससे पहले सरकार ने चेयरमैन नियुक्त न किया तो कुछ महीने केलिए लटक जाएंगे। उसके बाद भी पता नहीं कि कुर्सी मिले या नहीं।
लोकसभा चुनाव का कोड हटने के बाद से ही दावेदार सरगर्म हो गए थे। काफी लंबी कवायद करने के बाद किसी तरह चेयरमैन बनने का सपना साकार होने वाला था। तीन महीने बाद हो सकता है कि समीकरण ही बदल जाएं और उनका नाम ही लिस्ट से बाहर हो जाए। इनमें चेयरमैन के अलावा मेंबर भी शामिल हैं। साथ ही जिला परिषद केचेयरमैन की नियुक्ति भी लटकी हुई है।