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दुनिया को अलविदा कर मुस्कान बिखेर गई 7 लोगों के जीवन में खुशियां
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मुस्कान
- फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के राबोन निवासी 13 साल की मुस्कान ग्रोवर ने नश्वर संसार को अलविदा कहते हुए भी सात लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेरने का काम किया है। दुर्घटनाग्रस्त होकर पीजीआई पहुंची मुस्कान इलाज के दौरान जिंदगी की जंग हार गई। उनके परिजनों ने समय रहते अंगदान का निर्णय कर सात लोगों की अंधेरी दुनिया में रोशनी बिखेरी है। मुस्कान के हृदय को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से चेन्नई भेजा गया जबकि लिवर, दोनों किडनी, अग्न्याशय और दोनों कॉर्निया पीजीआई में अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया है।
पीजीआई के प्रभारी निदेशक प्रो. सुरजीत सिंह का कहना है कि अपने बच्चे के जाने के बाद अजनबियों के जीवन को बचाने के लिए सोचना अप्रत्याशित और अकल्पनीय है लेकिन मुस्कान के परिवार ने समाज के लिए अनुकरणीय साहस दिखाया है। उन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने का निर्णय अपनी दुनिया उजड़ने के बावजूद लिया है।
बॉक्स
साइकिल से गिरकर हुई थी चोटिल
24 मार्च को अपने घर के बाहर साइकिल चलाते हुए मुस्कान ऊंचाई से गिर गई जिसके कारण उसके सिर में गंभीर चोट लग गई और वह कोमा में चली गई। सोलन के सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद परिजन मुस्कान को लेकर पीजीआई पहुंचे। 24 मार्च को ही मुस्कान को पीजीआई में भर्ती कर लिया गया। पीजीआई न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अपिंद्रप्रीत सिंह ने बताया कि प्रो. एसके गुप्ता की निगरानी में मुस्कान को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही थी। इलाज के दौरान 2 अप्रैल को मुस्कान को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
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बॉक्स
कलेजे के टुकड़े को खोकर भी लिया निर्णय
मुस्कान के पिता राजीव ग्रोवर व माता स्मृति ग्रोवर ने कहा कि हमने अपने कलेजे के टुकड़े को खो दिया है लेकिन हम उसकी मौत पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहते हैं। सकारात्मक शुरुआत के लिए हमने अंगदान का निर्णय लिया है। हमें ऐसा लगता है कि मुस्कान के जीवन का यही उद्देश्य था। उसकी नश्वर यात्रा यहीं समाप्त हो गई है। अब उसे अंगदान के जरिए दूसरे के माध्यम से ही जीना है। उन्होंने बताया कि ईश्वर के सबसे अमूल्य उपहार को खोने के बाद अंगदान का निर्णय लेना हमारे लिए बहुत कठिन था लेकिन एक पल को ऐसा लगा जैसे मुस्कान खुद ही कह रही हो कि यह ही करना है।
इनसेट
चेन्नई में भेजा गया दिल
पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि पीजीआई में मुस्कान के दिल का मिलान प्राप्तकर्ता न मिलने पर उसे ग्रीन कॉरिडोर के जरिए चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में भर्ती एक मरीज के लिए भेजा गया है। 3 अप्रैल को दोपहर 2.30 बजे दिल को हवाई अड्डे से रवाना किया गया जिसमें चंडीगढ़ और मोहाली ट्रैफिक पुलिस व हवाई अड्डा के अधिकारियों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। प्लेन के जरिए दिल दोपहर 3.25 बजे चेन्नई के लिए भेजा गया और 3 अप्रैल को रात 8.27 बजे चेन्नई पहुंच गया। प्रोक़ौशल ने बताया कि नेफ्रोलॉजी और हेपॅटालजी विभाग की ओर से चिह्नित किए गए प्राप्तकर्ताओं को क्रॉस मैच के बाद 4 अप्रैल को मुस्कान का लिवर, किडनी, अग्न्याशय प्रत्यारोपित किया गया। वहीं, कॉर्निया भी प्रतीक्षा सूची में शामिल दो दृष्टिहीनों में प्रत्यारोपित की गई है।
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पीजीआई के प्रभारी निदेशक प्रो. सुरजीत सिंह का कहना है कि अपने बच्चे के जाने के बाद अजनबियों के जीवन को बचाने के लिए सोचना अप्रत्याशित और अकल्पनीय है लेकिन मुस्कान के परिवार ने समाज के लिए अनुकरणीय साहस दिखाया है। उन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने का निर्णय अपनी दुनिया उजड़ने के बावजूद लिया है।
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साइकिल से गिरकर हुई थी चोटिल
24 मार्च को अपने घर के बाहर साइकिल चलाते हुए मुस्कान ऊंचाई से गिर गई जिसके कारण उसके सिर में गंभीर चोट लग गई और वह कोमा में चली गई। सोलन के सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद परिजन मुस्कान को लेकर पीजीआई पहुंचे। 24 मार्च को ही मुस्कान को पीजीआई में भर्ती कर लिया गया। पीजीआई न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अपिंद्रप्रीत सिंह ने बताया कि प्रो. एसके गुप्ता की निगरानी में मुस्कान को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही थी। इलाज के दौरान 2 अप्रैल को मुस्कान को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
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कलेजे के टुकड़े को खोकर भी लिया निर्णय
मुस्कान के पिता राजीव ग्रोवर व माता स्मृति ग्रोवर ने कहा कि हमने अपने कलेजे के टुकड़े को खो दिया है लेकिन हम उसकी मौत पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहते हैं। सकारात्मक शुरुआत के लिए हमने अंगदान का निर्णय लिया है। हमें ऐसा लगता है कि मुस्कान के जीवन का यही उद्देश्य था। उसकी नश्वर यात्रा यहीं समाप्त हो गई है। अब उसे अंगदान के जरिए दूसरे के माध्यम से ही जीना है। उन्होंने बताया कि ईश्वर के सबसे अमूल्य उपहार को खोने के बाद अंगदान का निर्णय लेना हमारे लिए बहुत कठिन था लेकिन एक पल को ऐसा लगा जैसे मुस्कान खुद ही कह रही हो कि यह ही करना है।
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चेन्नई में भेजा गया दिल
पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि पीजीआई में मुस्कान के दिल का मिलान प्राप्तकर्ता न मिलने पर उसे ग्रीन कॉरिडोर के जरिए चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में भर्ती एक मरीज के लिए भेजा गया है। 3 अप्रैल को दोपहर 2.30 बजे दिल को हवाई अड्डे से रवाना किया गया जिसमें चंडीगढ़ और मोहाली ट्रैफिक पुलिस व हवाई अड्डा के अधिकारियों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। प्लेन के जरिए दिल दोपहर 3.25 बजे चेन्नई के लिए भेजा गया और 3 अप्रैल को रात 8.27 बजे चेन्नई पहुंच गया। प्रोक़ौशल ने बताया कि नेफ्रोलॉजी और हेपॅटालजी विभाग की ओर से चिह्नित किए गए प्राप्तकर्ताओं को क्रॉस मैच के बाद 4 अप्रैल को मुस्कान का लिवर, किडनी, अग्न्याशय प्रत्यारोपित किया गया। वहीं, कॉर्निया भी प्रतीक्षा सूची में शामिल दो दृष्टिहीनों में प्रत्यारोपित की गई है।