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पंजाब में नई बसों को लेकर पनबस और रोडवेज कर्मचारियों में दरार, तीन दिन ठप रही सेवा
दविंदर पाल सिंह ,अमर उजाला, मोगा (पंजाब)
Updated Mon, 10 Sep 2018 09:40 AM IST
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पंजाब रोडवेज की बसें
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पंजाब रोडवेज बेड़े में नई बसों की खरीद ने रोडवेज और पनबस कर्मियों में दरार डाल दी हैं। इन नई बसों के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में 6 डिपो की बस सेवा 3 दिन ठप रहने से रोडवेज को करोड़ों की चपत लगी है। 5, 6, 7 सितंबर को बसें बंद होने से इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हुई। इसी तरह मोगा डिपो के हिस्से में 10 नई बसें आई हैं। यहां भी विवाद के कारण ये बसें वर्कशाप में बाहर दो सप्ताह से खड़ी हैं।
मोगा में तीन गुट हैं जो तकरार पर अड़े हैं। बता दें कि पंजाब में लुधियाना, पटियाला मोगा के डिपो ट्रैफिक मैनेजर सुखजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बसों के बंटवारे का फैसला डायरेक्टर स्टेट ट्रांसपोर्ट दिलराज सिंह ने करा दिया है। उन्होंने माना कि हड़ताल के कारण मोगा डिपो को तीन दिन में करीब 4 लाख रुपये का घाटा हुआ है। इस डिपो को दो ओर नई बसें देने का भरोसा भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि कागजी कार्यवाही पूरी होने बाद जल्दी ही ये बसें चलेंगी।
लकीर खिंचने से अन्य मुद्दे भी सांझे नहीं रहे
पंजाब गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (एटक) प्रदेश नेता जगदीश सिंह चाहल और इंद्रजीत सिंह भिंडर ने कहा नई बसों की बांट के मौके पर कर्मचारी दल और पनबस जत्थेबंदी नेता मीटिंग में मौजूद थे। इसके बाद जत्थेबंदियों में लकीर खिंचने से अन्य मुद्दे भी सांझे नहीं रहे। वहीं पनबस कंट्रैक्टर जत्थेबंदी नेता बलजिंदर सिंह ने कहा कि बसों का बंटवारा ड्राइवरों की सीनियोरिटी के मुताबिक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि रोडवेज जत्थेबंदी को रेशो मुताबिक दी गई अधिक नई बस अब जगरांव डिपो को दे दी गई है। पनबस कर्मियों ने 10 सितंबर की हड़ताल भी वापस ले ली है।
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इस तरह शुरू हुआ विवाद
खस्ता हाल रोडवेज की बसों के मद्देनजर जनता को बेहतर सुविधा देने के लिए सरकार ने 299 नई बसें खरीदी हैं। करीब 100 बसें अलग अलग डिपो में पहुंच गई हैं। इन बसों की बांट ने मुलाजिम जत्थेबंदियों में भी दरार डाल दी है। मोगा डिपो के हिस्से आईं 10 नई बसें विवाद के कारण दो सप्ताह से वर्कशाप में खुले में खड़ी हैं।
इनमें से 6 पनबस जत्थेबंदी को, 3 पंजाब गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (एटक) को और एक अन्य कर्मचारी दल को देने की सहमति बनी थी। लेकिन पनबस कर्मियों ने रोडवेज कर्मियों को 3 बसें देने की बात को रद्द कर दिया। इसके बाद पनबस कर्मियों ने हड़ताल शुरू कर दी और पंजाब के सभी 6 डिपो में तीन दिन पूरी तरह सरकारी बस सेवा ठप रही। इस हड़ताल कारण रोडवेज को 3 दिन में सभी डिपो को करोड़ों की चपत लगी। इसका सीधा फायदा निजी बस ऑपरेटरों को हुआ।
ये भी लग रहे आरोप
एक जत्थेबंदी नेताओं पर यह भी आरोप लगा है कि वह लालच में निजी बस ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने के लिए मामूली बात को मुद्दा बनाकर हड़ताल करा देते हैं। वहीं जनरल मैनेजर ने एक नई बस अपने खाते में डालकर संघर्ष को सुलझाने की कोशिश की लेकिन पनबस कर्मी नहीं माने। मुख्य दफ्तर से अधिकारी भी यह झगड़ा खत्म कराने के लिए यहां पहुंचे लेकिन वह असफल रहे। विभाग के डायरेक्टर के दखल बाद एक नई बस जगरांव डिपो भेज दी है। अब रोडवेज जत्थेबंदी को 2 बसों से ही सब्र करना पड़ा।
अकालियों के समय खूब हुई मनमानियां
इस मौके रोडवेज जत्थेबंदी नेता चाहल ओर भिंडर ने कहा कि अकाली सरकार के समय निजी ट्रांसपोर्टरों ने खुल कर मनमानियां की। निजी ट्रांसपोर्टरों ने राजनीतिक पार्टियां और ट्रांसपोर्ट विभाग से मिलीभगत कर रूटों में विस्तार करवा कर और एकाधिकार जमाकर सूबे में चारों ओर 100 -100 किलोमीटर अवैध रूट पर चलकर रोडवेज को रास्ते से उतार दिया।
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मोगा में तीन गुट हैं जो तकरार पर अड़े हैं। बता दें कि पंजाब में लुधियाना, पटियाला मोगा के डिपो ट्रैफिक मैनेजर सुखजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बसों के बंटवारे का फैसला डायरेक्टर स्टेट ट्रांसपोर्ट दिलराज सिंह ने करा दिया है। उन्होंने माना कि हड़ताल के कारण मोगा डिपो को तीन दिन में करीब 4 लाख रुपये का घाटा हुआ है। इस डिपो को दो ओर नई बसें देने का भरोसा भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि कागजी कार्यवाही पूरी होने बाद जल्दी ही ये बसें चलेंगी।
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लकीर खिंचने से अन्य मुद्दे भी सांझे नहीं रहे
पंजाब गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (एटक) प्रदेश नेता जगदीश सिंह चाहल और इंद्रजीत सिंह भिंडर ने कहा नई बसों की बांट के मौके पर कर्मचारी दल और पनबस जत्थेबंदी नेता मीटिंग में मौजूद थे। इसके बाद जत्थेबंदियों में लकीर खिंचने से अन्य मुद्दे भी सांझे नहीं रहे। वहीं पनबस कंट्रैक्टर जत्थेबंदी नेता बलजिंदर सिंह ने कहा कि बसों का बंटवारा ड्राइवरों की सीनियोरिटी के मुताबिक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि रोडवेज जत्थेबंदी को रेशो मुताबिक दी गई अधिक नई बस अब जगरांव डिपो को दे दी गई है। पनबस कर्मियों ने 10 सितंबर की हड़ताल भी वापस ले ली है।
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इस तरह शुरू हुआ विवाद
खस्ता हाल रोडवेज की बसों के मद्देनजर जनता को बेहतर सुविधा देने के लिए सरकार ने 299 नई बसें खरीदी हैं। करीब 100 बसें अलग अलग डिपो में पहुंच गई हैं। इन बसों की बांट ने मुलाजिम जत्थेबंदियों में भी दरार डाल दी है। मोगा डिपो के हिस्से आईं 10 नई बसें विवाद के कारण दो सप्ताह से वर्कशाप में खुले में खड़ी हैं।
इनमें से 6 पनबस जत्थेबंदी को, 3 पंजाब गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (एटक) को और एक अन्य कर्मचारी दल को देने की सहमति बनी थी। लेकिन पनबस कर्मियों ने रोडवेज कर्मियों को 3 बसें देने की बात को रद्द कर दिया। इसके बाद पनबस कर्मियों ने हड़ताल शुरू कर दी और पंजाब के सभी 6 डिपो में तीन दिन पूरी तरह सरकारी बस सेवा ठप रही। इस हड़ताल कारण रोडवेज को 3 दिन में सभी डिपो को करोड़ों की चपत लगी। इसका सीधा फायदा निजी बस ऑपरेटरों को हुआ।
ये भी लग रहे आरोप
एक जत्थेबंदी नेताओं पर यह भी आरोप लगा है कि वह लालच में निजी बस ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने के लिए मामूली बात को मुद्दा बनाकर हड़ताल करा देते हैं। वहीं जनरल मैनेजर ने एक नई बस अपने खाते में डालकर संघर्ष को सुलझाने की कोशिश की लेकिन पनबस कर्मी नहीं माने। मुख्य दफ्तर से अधिकारी भी यह झगड़ा खत्म कराने के लिए यहां पहुंचे लेकिन वह असफल रहे। विभाग के डायरेक्टर के दखल बाद एक नई बस जगरांव डिपो भेज दी है। अब रोडवेज जत्थेबंदी को 2 बसों से ही सब्र करना पड़ा।
अकालियों के समय खूब हुई मनमानियां
इस मौके रोडवेज जत्थेबंदी नेता चाहल ओर भिंडर ने कहा कि अकाली सरकार के समय निजी ट्रांसपोर्टरों ने खुल कर मनमानियां की। निजी ट्रांसपोर्टरों ने राजनीतिक पार्टियां और ट्रांसपोर्ट विभाग से मिलीभगत कर रूटों में विस्तार करवा कर और एकाधिकार जमाकर सूबे में चारों ओर 100 -100 किलोमीटर अवैध रूट पर चलकर रोडवेज को रास्ते से उतार दिया।