करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण में बाधक बंकर ढहाया गया, भारत-पाक के बीच कल होगी बैठक
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श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर निर्माण में जुटी एजेंसियों ने श्री डेरा बाबा नानक की दूसरी पंक्ति की डिफेंस लाइन धुस्सी बांध पर बने भारतीय बंकर को ढहा दिया है। यह बंकर श्री डेरा बाबा नानक व पाकिस्तान स्थ्ति गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब को जोड़ने के लिए भारत द्वारा बनाए जा रहे पुल के निर्माण में बाधा बन रहा था।
बंकर को ढहाने से पहले निर्माण एजेंसियों ने सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत की। सैन्य अधिकारियों को बताया गया की भारत की ओर से रावी नदी के ऊपर बनने वाले 100 मीटर के पुल में यह बंकर बाधा है। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर बंकर को गिराने की अनुमति दे दी।
पाकिस्तान की तरफ से करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण कर रही फ्रेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसीज (एफआईए) ने वहां की सरकार से निर्माण कार्यों के लिए 28 करोड़ की राशि मांगी है। पाकिस्तान करतारपुर साहिब कॉरिडोर का चार किलोमीटर का रास्ता तैयार कर रहा है। आर्थिक संकट में जूझ रही पाकिस्तान सरकार की ओर से फंड जारी करने में की जा रही देरी से निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ी है।
पुल और उस पर स्वागती गेटों की डिजाइन पर होगी चर्चा
सूत्रों ने बताया की भारत-पाकिस्तान के तकनीकी विशेषज्ञों की बैठक 27 मई को होगी। बैठक में श्री डेरा बाबा नानक में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा व रावी नदी पर बनाए जा रहे पुल व दोनों देशों की ओर से पुल पर निर्माणाधीन स्वागती गेटों के डिजाइन पर चर्चा होगी।
यह बैठक श्री डेरा बाबा नानक की जीरो लाइन पर होगी। इससे पहले दोनों देशों के अधिकारियों के बीच पहली बैठक 14 मार्च को अटारी में हुई थी। पाकिस्तान सरकार द्वारा निर्माण कमेटी में अलगाववादियों को शामिल करने के विरोध में भारत ने 2 अप्रैल को वाघा में होने वाली बैठक में भाग लेने से इंकार कर दिया था। दोनों देशों के तकनीकी अधिकारियों की बैठक 16 अप्रैल को हुई थी।
विरासत संरक्षित करने में गंभीर नहीं पाक: एएससी
अमेरिकन सिख काउंसिल (एएससी) ने एक बार फिर पाकिस्तान सरकार से गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब, श्री करतारपुर साहिब के आस-पास 104 एकड़ जमीन को संरक्षित करने की गुहार लगाई है। एएससी के सदस्यों ने इस बात की निराशा प्रकट की है कि पाकिस्तान सरकार से इस संदर्भ में बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
एएससी की उपाध्यक्ष जसबीर कौर का कहना है कि बाबा नानक की विरासत को न संभाला गया तो इस पवित्र स्थल की भावना को नष्ट करने समान होगा। एएससी ने दावा किया है कि श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा और उसके आस-पास के 104 एकड़ क्षेत्र को अछूता रखने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं।
पाकिस्तान सरकार की ओर से करतारपुर कॉरिडोर का आधुनिकीकरण करने के नाम पर इस पवित्र स्थल को पर्यटकों के आकर्षण में नहीं बदला जाना चाहिए। कोई भी समझदार सिख अपनी उत्कृष्ट विशिष्टता के स्थान पर संगमरमर से बने हुए मठ में जाने के लिए हजारों डॉलर खर्च करने की इच्छा नहीं रखता है।