तैयार रहें, यूनिवर्सिटी में छप्पड़ फाड़ नौकरियां
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करीब 200 एकड़ में प्रस्तावित कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी बनने पर नौकरियों की बरसात होगी। इसमें प्रोफेसर से लेकर सुरक्षा कर्मचारी और फोर्थ क्लास के हजारों कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। मेडिकल क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में करीब 4 से 5 हजार नौकरियों की संभावना है।
इसके अलावा क्षेत्र के युवाओं में मेडिकल लाइन के प्रति रुझान बढ़ेगा और अपने क्षेत्र के युवा भी डॉक्टर समेत विभिन्न कोर्सों में दाखिला ले सकेंगे। तीसरा असर यह भी होगा कि आसपास में मेडिकल कोर्स की तैयारी कराने वाले कई प्रोफेशनल कोचिंग सेंटर भी करनाल में दस्तक देंगे।
हालांकि, अभी तक केवल यूनिवर्सिटी की घोषणा हुई है। प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद से ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यूनिवर्सिटी का खाका तैयार करने में जुटे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पं. बीडी शर्मा हेल्थ यूनिवर्सिटी, रोहतक से भी संबंधित जानकारी एकत्रित कर रहे हैं।
शैक्षणिक स्टाफ, सुरक्षा कर्मचारी, क्लेरिकल स्टाफ के अलावा चतुर्थवर्गीय कर्मी की नियुक्तियां भी होंगी। मिनिस्ट्रीयल व पैरामेडिकल स्टाफ अलग से होगा। प्रोफेशनल लोगों का मानना है कि यूनिवर्सिटी में करीब 200 डॉक्टर और 400 नर्सों की आवश्कता होगी। एक अनुमान है कि यूनिवर्सिटी में करीब 4 हजार लोगों की नियुक्तियां विभिन्न पदों पर होनी हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को भी रोजगार मिलेगा।
कोचिंग सेंटर की मिलेगी सुविधा
अभी भी शहर में मेडिकल क्षेत्र के प्रति युवाओं में काफी चाव है, लेकिन प्रॉपर गाइडेंस नहीं मिलने के कारण स्टूडेंट्स को प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ जाना पड़ता है।
करनाल में विवि बनने के बाद कई बड़े कोचिंग सेंटर करनाल में ही दस्तक देंगे और इसका सीधा लाभ युवाओं को होगा। वहीं मेडिकल लाइन के प्रति भी ग्रामीण छात्रों का रुझान होगा।
शोध से मिलेगा लाभ: डॉ. सांगवान
रोहतक के पं बीडी शर्मा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के रिटायर्ड कुलपति डॉ. एसएस सांगवान का कहना है कि विश्वविद्यालय विश्व की तरह ही होता है। विभिन्न प्रदेशों और देशों के स्टूडेंट्स मेडिकल पर शोध करेंगे। प्रदेश के लिए यह अच्छी बात है कि यहां पर दो मेडिकल यूनिवर्सिटी होंगी।
इससे न केवल मेडिकल क्षेत्र तरक्की करेगा, बल्कि रोहतक विवि पर भी मरीजों का भार कम होगा और अच्छी तरीके बीमारियों की रोकथाम के लिए शोध हो सकेंगे। जहां तक नौकरियों की बात है तो जाहिर सी बात है कि विवि चलाने के लिए नौकरियां तो मिलेंगी ही।