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मिले नहीं 200 करोड़, अब प्रशासन कैसे देगा मुआवजा
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 05 Dec 2013 09:28 AM IST
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केंद्र की ओर से चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा नॉन प्लान बजट के तहत मांगे गए अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये के लिए मना करने के बाद प्रशासन की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
प्रशासन ने केंद्र सरकार से 150 करोड़ रुपये किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने के लिए मांगे थे। अब केंद्र के अतिरिक्त बजट देने से मना करने के बाद प्रशासन को मुआवजा देने में दिक्कत आएगी।
पिछले एक दशक में प्रशासन की ओर से चंडीगढ़ में की गई भूमि अधिग्रहण को लेकर दिए गए मुआवजे के खिलाफ जमीन के मालिकों ने जिला अदालत में केस कर दिया था।
इनमें से अधिकतर केस प्रशासन हार गया है और अब जिला अदालत के निर्देश पर प्रशासन को इन जमीनों के मालिकों को बढ़ा हुआ मुआवजा देना है।
प्रशासन के पास मुआवजा देने के लिए बजट नहीं है। इसी वजह से प्रशासन ने केंद्र से अतिरिक्त बजट मांगा था। प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र से इसके लिए पैसा नहीं मिलेगा तब तक वह बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दे सकेंगे।
चंडीगढ़ प्रशासन पिछले कुछ महीनों में जिला अदालत में जमीन मुआवजे से जुड़े कई केस हार गया है। जिला अदालत और हाईकोर्ट में अभी भी जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के खिलाफ बहुत से केस चल रहे हैं।
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अदालत के निर्देश पर प्रशासन को कैंबवाला, कजहेड़ी, पलसौरा, डड्डूमाजरा, मलोया, सारंगपुर के कई किसानों को पहले दिए गए मुआवजे का दोगुना देना पड़ेगा।
इन गांवों में प्रशासन ने कई प्रोजेक्टों के लिए वर्ष 1995 से लेकर 2005 तक जमीन का अधिग्रहण किया था। मुआवजे के केस ज्यादा होने के कारण मुआवजे की रकम भी 150 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है
चंडीगढ़ प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों को पहले 6 से 10 लाख रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया था।
प्रशासन की ओर से दिए गए मुआवजे के खिलाफ किसान अदालत चले गए थे। जिला अदालत ने मुआवजे से जुड़े मामलों में प्रशासन की ओर से दिए गए मुआवजे में पांच से आठ लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए थे और साथ ही प्रशासन को इस बढ़ोतरी का तत्काल भुगतान करने को कहा था।
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प्रशासन ने केंद्र सरकार से 150 करोड़ रुपये किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने के लिए मांगे थे। अब केंद्र के अतिरिक्त बजट देने से मना करने के बाद प्रशासन को मुआवजा देने में दिक्कत आएगी।
पिछले एक दशक में प्रशासन की ओर से चंडीगढ़ में की गई भूमि अधिग्रहण को लेकर दिए गए मुआवजे के खिलाफ जमीन के मालिकों ने जिला अदालत में केस कर दिया था।
इनमें से अधिकतर केस प्रशासन हार गया है और अब जिला अदालत के निर्देश पर प्रशासन को इन जमीनों के मालिकों को बढ़ा हुआ मुआवजा देना है।
प्रशासन के पास मुआवजा देने के लिए बजट नहीं है। इसी वजह से प्रशासन ने केंद्र से अतिरिक्त बजट मांगा था। प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र से इसके लिए पैसा नहीं मिलेगा तब तक वह बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दे सकेंगे।
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चंडीगढ़ प्रशासन पिछले कुछ महीनों में जिला अदालत में जमीन मुआवजे से जुड़े कई केस हार गया है। जिला अदालत और हाईकोर्ट में अभी भी जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के खिलाफ बहुत से केस चल रहे हैं।
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अदालत के निर्देश पर प्रशासन को कैंबवाला, कजहेड़ी, पलसौरा, डड्डूमाजरा, मलोया, सारंगपुर के कई किसानों को पहले दिए गए मुआवजे का दोगुना देना पड़ेगा।
इन गांवों में प्रशासन ने कई प्रोजेक्टों के लिए वर्ष 1995 से लेकर 2005 तक जमीन का अधिग्रहण किया था। मुआवजे के केस ज्यादा होने के कारण मुआवजे की रकम भी 150 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है
चंडीगढ़ प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों को पहले 6 से 10 लाख रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया था।
प्रशासन की ओर से दिए गए मुआवजे के खिलाफ किसान अदालत चले गए थे। जिला अदालत ने मुआवजे से जुड़े मामलों में प्रशासन की ओर से दिए गए मुआवजे में पांच से आठ लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए थे और साथ ही प्रशासन को इस बढ़ोतरी का तत्काल भुगतान करने को कहा था।