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बजट 580 करोड़, खर्चे 597 करोड़...निगम की जेब में नहीं रुपइया, कैसे घूमेगा विकास का पहिया

Tue, 30 Jun 2020 04:53 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 30 Jun 2020 04:53 PM IST
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Budget 580 crores, expenses 597 crores, development work by nagar nigam chandigarh
नगर निगम की बैठक - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ नगर निगम में वित्तीय संकट गहराता जा रहा है। नगर निगम में सोमवार को आयोजित सदन की बैठक में निगम कमिश्नर केके यादव ने कहा कि हमारे पास कुल 580 करोड़ का बजट है जबकि अनिवार्य खर्चे 597 करोड़ के हैं। इसके अलावा 121 करोड़ के कार्य जो कि आवंटित हो चुके हैं, उनके लिए भी फंड की व्यवस्था की जानी है। अब सदन ही बताए कि शहर में विकास कार्य कैसे होंगे।
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निगम की वित्तीय हालत किसी से छिपी नहीं है। कमिश्नर ने कहा कि पहले से ही निगम के पास फंड नहीं था। अब कोरोना महामारी के कारण समस्या और बढ़ गई है। निगम के पास जो 67 करोड़ रुपये हैं, उनसे केवल पुराने कार्यों को प्राथमिकता देनी है। प्रशासन का आदेश है कि नए कार्य शुरू नहीं होंगे। निगम को प्रशासन से 425 करोड़ की ग्रांट मिली थी। कोरोना के कारण 30 प्रतिशत बजट में कटौती की गई है। इससे निगम के पास केवल 340 करोड़ की ग्रांट ही बची है। निगम के पास 321 करोड़ रुपये खुद के रेवेन्यू के हैं।
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इसमें कोविड सेस के 20 करोड़ व 60 करोड़ रुपये पेट्रोल खरीदने के लिए हैं। अब एमएचए के निर्देश के अनुसार, कोविड सेस के फंड का उपयोग नहीं कर सकते। ऐसे में निगम के पास केवल 241 करोड़ रुपये ही बचे हैं। इस तरह निगम के पास कुल 580 करोड़ रुपये बचे हैं। वहीं, निगम को 420 करोड़ रुपये सैलरी के, 50 करोड़ रुपये पेंशन के जबकि 120 करोड़ रुपये बिजली बिल अनिवार्य रूप से देने ही हैं। इस प्रकार निगम को 17 करोड़ रुपये और चाहिए ताकि जरूरी कार्यों को पूरा किया जा सके।
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प्रशासन ने कहा अपना रेवेन्यू बढ़ाए निगम

कमिश्नर ने कहा कि प्रशासन के बजट पर भी इस बार असर पड़ेगा। प्रशासन का भी लगभग 1 हजार करोड़ रुपये कटेगा। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि निगम अपना रेवेन्यू बढ़ाए। अभी सड़क निर्माण के लिए 63 करोड़ और पानी सप्लाई के लिए 39 करोड़ रुपये बचे हैं। गांव के विकास कार्यों पर 12 करोड़ खर्च हो चुके हैं जबकि 13 करोड़ बचे हैं। वहीं डार्क स्पॉट पर 10 करोड़ खर्च हो चुके हैं और साढ़े 9 करोड़ बचे हैं। रही बात रेवेन्यू बढ़ाने की तो पानी बिल से जहां 150 करोड़ आना था अब 100 करोड़ ही रह गया है। वहीं पार्किंग, सामुदायिक केंद्र भी बड़े रेवेन्यू के माध्यम थे, अब वह भी समाप्त हो गए।

एजेंसी से पूछें कैसे बढ़ेगा रेवेन्यू : सूद
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व पार्षद अरुण सूद ने कहा कि निगम को अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए एक एजेंसी को हायर करना चाहिए और उससे पूछना चाहिए कि कैसे रेवेन्यू बढ़ाया जाए। वहीं निगम को एनर्जी ऑडिट भी करवानी चाहिए। हालांकि विपक्ष ने भी ने भी भाजपा पार्षदों और अधिकारियों पर खूब हल्ला बोला। कांग्रेस पार्षद ने कहा कि आखिर वेंडरों के लाइसेंस का पैसा कहां जा रहा है। वहीं, सतीश कैंथ ने कहा कि निगम को अब कांग्रेस के हवाले कर देना चाहिए।

मेयर की कमेटी तय करेगी कैसे सुधरेगी स्थिति
कमिश्नर ने सुझाव दिया कि मेयर राजबाला मलिक एक कमेटी बनाएं, जिसमें तय हो कि रेवेन्यू बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए। साथ ही वित्तीय संकट से निपटने के लिए क्या करना चाहिए। हालांकि कमिश्नर का कहना है कि पांचवीं वित्तीय कमीशन की टीम कोरोना महामारी की स्थिति ठीक होने के बाद चंडीगढ़ आएगी। तब कुछ रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है।

ऐसे समझें निगम का वित्तीय संकट

- 425 करोड़ रुपये निगम को मिली ग्रांट
- 340 करोड़ ग्रांट बची कोरोना संकट में
- 321 करोड़ निगम का रेवेन्यू रह गया कोरोना काल में
- 20 करोड़ कोविड सेस का उपयोग एमएचए के निर्देश के बिना नहीं हो सकता
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