Budget 2020: रेलवे निजीकरण पर पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल बोले- 'इसका एक हिस्सा बिकना देश बिकने जैसा'
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देश की लाइफ लाइन कहे जाने वाले रेलवे विभाग को निजी हाथों में सौंपने का सरकार का फैसला आगे चलकर चिंता का विषय बन सकता है। बजट सत्र-2020-21 में 150 यात्री ट्रेनों के निजीकरण की बात केंद्र सरकार की ओर से कही जा रही है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में आम बजट-2020-21 प्रस्तुत करते हुए यह खुलकर नहीं बोला। क्योंकि इस मसले पर शोर मच जाता।
यह बात पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने शनिवार को कही। उन्होंने सरकार की मंशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इन ट्रेनों को दूसरी ट्रेनों से पंद्रह मिनट पहले प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है और उस डायरेक्शन में कोई दूसरी गाड़ी 15 मिनट तक नहीं चलेगी। यह एक गंभीर मसला है। सरकार पर तंज कसते हुए पूर्व रेल मंत्री ने कहा कि हो सकता है कि आने वाले समय में पूरी भारतीय रेलवे ही निजी हाथों में न सौंप दी जाए।
उन्होंने रेलवे के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि ये महज रेल नहीं, बल्कि देश है। अपनी आबादी, संस्कृति और इतिहास के हिसाब से भी, इसका एक हिस्सा बिकना भी देश का हिस्सा बिकने जैसा है। रेल ने देश में ‘एकजुटता और संघर्ष’ के सफर में मील का पत्थर साबित हुई है। उसका रूतबा बरकरार रहना चाहिए ।
पहली निजी ट्रेन ‘तेजस’ ने कोई जादू नहीं कर दिया
एक रेलवे के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दिल्ली-लखनऊ रूट पर सबसे प्रीमियम ट्रेन स्वर्ण शताब्दी है। जिससे दिल्ली से लखनऊ जाने में करीब साढे 6 घंटे का समय लगता है और ‘तेजस’ को 6 घंटे 20 मिनट का, यानी कोई चमत्कार नहीं कर दिया है तेजस ने, जैसा कि बताया जा रहा है।
हां, एक बात जरूर है कि तेजस एक्सप्रेस में एसी चेयरकार का किराया 1,125 रुपये वसूला जा रहा है, जबकि स्वर्ण शताब्दी का किराया 800 से ज्यादा नहीं है और उसमे भी सीनियर सिटीजन और बच्चों को रेलवे द्वारा दी जा रही सामान्य छूट मिलती है। लेकिन तेजस में यात्रियों को ऐसी कोई छूट नहीं मिलती। बता दें कि तेजस में किराया तय करने के लिए डायनेमिक फेयर सिस्टम लागू है। डायनेमिक फेयर सिस्टम फ्लाइट्स की बुकिंग के लिए भी लागू होता है। हो सकता है कि फेस्टिवल सीजन में फ्लाइट के किराए से ज्यादा टिकट तेजस का हो जाए।
भारतीय रेलवे की कुछ खास बातें
भारतीय रेलवे दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी रोजगार देने वाली कंपनी है और रेलवे में करीब 13 लाख लोग काम करते हैं। देशभर में करीब 1 लाख 15 किलोमीटर रेलवे ट्रैक हैं, 12 हजार से भी ज्यादा ट्रेनों का रोजाना संचालन होता है और रोजाना औसतन 2 करोड़ 30 लाख यात्री भारतीय रेलों में सफर करते हैं।
ये है बजट के पिटारे का सार-
- 4 स्टेशनों का री-डेवलपमेंट होगा।
- पीपीपी मोड के माध्यम से 4 स्टेशन और 150 यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
- रेलवे के स्वामित्व वाली भूमि पर रेल पटरियों के साथ एक बड़ी सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना।
- तेजस जैसी और ट्रेनों को देश के प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों से जोड़ा जाएगा।
- मुंबई से अहमदाबाद के बीच हाई स्पीड ट्रेन को सक्रिय रूप से चलाया जाएगा।
- 100 लाख करोड़ रुपये का नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया जाएगा।
- 27 हजार किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण किया जाएगा।